Advertisement

जन्माष्टमी स्पेशल- जानिए कैसे रखते हैं गोविंदा अपनी फिटनेस का ध्यान

माजगांव ताड़वाड़ी सार्वजनिक गोविंदा पथक की डायट और फिटनेस सीक्रेट्स

‘गोविंदा रे गोपाला’! ये वो शब्द हैं जो जन्माष्टमी के दिन मुंबई शहर की हर गली में सुनाई देते हैं। जन्माष्टमी के उत्सव की शान कही जाती है महाराष्ट्र में होनेवाली दही हंडी की परम्परा। जिसे आगे बढ़ाने और सहेजने का काम करते हैं गोविंदा पथक। छोटी-बड़ी टोलियों में ये गोविंदा पथक मुंबई की गलियों में धूम मचाते दही और माखन चोरी करने पहुंचते हैं। थर या ह्यूमन पिरामिड लगानेवाले इन गोविंदाओं के लिए इस उत्सव को लेकर जो उत्सुकता, जोश और हर्ष दिखता है उसके पीछे कई दिनों की मेहनत होती है। तो कैसे होती हैं तैयारियां गोविंदा पथकों की और कैसे रखते हैं वो खुद को फिट? यही सब जानने के लिए हमने की बात माजगांव ताड़वाड़ी सार्वजनिक गोविंदा पथक के सदस्य और ज्वॉइंट सेक्रेटरी सौरभ त्रिवेदी से।

गोकुलाष्टमी से पहले की फिटनेस

माज़गांव ताड़वाड़ी गोविंदा पथक उन ग्रुप्स में से है जो 9 थर (मंजिल) लगाकर ‘दही हंडी’ तोड़ते हैं। इस कठिन करतब के लिए गोविंदा पथक के सभी सदस्य डेढ़ से 3 महीने पहले प्रैक्टिस शुरु कर देते हैं। लेकिन सौरभ के मुताबिक स्टैमिना बनाए रखने के लिए सभी गोविंदा सालभर कबड्डी, स्विमिंग और फुटबॉल जैसी एक्टिविटीज़ में भी भाग लेते रहते हैं। इसके साथ ही नियमित रूप जिम जाना भी होता है।  ब्राउन ब्रेड और डेयरी प्रॉडक्ट ज्यादा खाते  है। साथ ही प्रोटीन के लिए मछली, चिकन और अंडा अपने डायट  में शामिल करते हैं।

Also Read

More News

दही हंडी के दिन क्या खाते हैं गोविंदा?

सुबह दूध और पौष्टिक चीजों का हल्का नाश्ता करके निकलते हैं गोविंदा। सुस्ती से बचने के लिए दोपहर में लंच में चावल नहीं खाते। दिनभर धूप में घूमने से गोविंदाओं को डिहाइड्रेशन हो सकता है इसलिए उन्हें ग्लूकोज़, पानी और फ्रूट जूस आदि उपलब्ध कराया जाता है। दही हंडी उत्सव ख़त्म होने के बाद रात में सभी गोविंदा अपनी पसंद के अनुसार खाना खा सकते हैं। बातचीत के दौरान सौरभ ने बताया कि अक्सर लोग बातें करते हैं कि गोविंदा शराब पीकर उत्सव में हिस्सा लेते हैं लेकिन माज़गांव गोविंदा मंडल में अल्कोहल के सेवन पर मनाही है। अगर कोई शराब पीकर आता है तो उसे ‘दही हंडी’ में भाग लेने से रोक दिया जाता है और घर भेज दिया जाता है।

ताकि न हो कोई गोविंदा घायल।

थर (लेयर या स्तर) बनाने से पहले गोविंदा की शारीरिक रचना के आधार पर प्लानिंग की जाती है। सौरभ त्रिवेदी के अनुसार, एक जैसी शारीरिक बनावट थर में संतुलन बनाने में मदद करती है। गोविंदा अपने वज़न और शरीर के आकार के आधार पर थर में अपनी जगह निश्चित करते हैं। साथ ही सभी सदस्य एक-दूसरे का परिवार की तरह ध्यान रखते हैं और पूरी तरह कोशिश करते हैं कि चाहे जो हो जाए एक बार थर बनने के बाद अपने साथियों का साथ नहीं छोड़ेगें और इस तरह सबकी सुरक्षा और उनकी सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाता है।

चित्र स्रोत-Shutterstock

Total Wellness is now just a click away.

Follow us on