मैट्रेस पर नहीं आती चैन की नींद तो फर्श पर सोएं, जानें फर्श पर सोना कैसे है लाभदायक

दिन भर की थकान मिटाने के लिए क्या आप भी बिस्तर का सहारा लेते हैं? ऐसा करके आप कई बीमारियों को दावत दे रहे हैं। फर्श पर सोकर देखिए। चैन की नींद तो आएगी ही, दर्द से भी मिलेगी राहत।

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Written By: Anshumala | Published : October 10, 2018 4:29 PM IST

दिन भर जमकर काम करना। थक-हार कर घर आते ही बिस्तर पर पड़ जाना। मोट-मोटे आरामदायक गद्दे पर बेशक आपको कुछ देर के लिए आराम मिल जाए, लेकिन इससे चैन और सुकून की नींद नहीं मिलती। एक शोध की मानें, तो ये मैट्रेस कई बीमारियों को न्योता देते हैं। जिस तरह स्वस्थ रहने के लिए सेहतमंद खानपान जरूरी है, ठीक उसी तरह पर्याप्त नींद भी जरूरी है। जब आप सही तरीके अपनाते हुए पर्याप्त रूप से सोते हैं, तो आपका शरीर दिन भर की थकान से जल्दी उबर पाता है। लिवर सभी महत्वपूर्ण डिटॉक्सिन का काम करता है। मासंपेशियां और दिमाग रिलैक्स हो जाते हैं।

अक्सर मोटे-मोटे गद्दे या मैट्रेस पर सोने वालों को गर्दन, कमर में दर्द की शिकायत रहती है। कई बार आप सिर्फ करवटें ही बदलते रह जाते हैं जिससे आपकी नींद पूरी नहीं हो पाती। यदि आप गद्दे से होने वाली समस्याओं से परेशान हैं, तो कुछ दिन जमीन पर सोकर देखिए। जमीन पर सोना आपको कहीं ज्यादा आरामदायक लगेगा।

फर्श पर सोना बेहतर क्यों

अब तक कोई भी अध्ययन ऐसा नहीं आया है, जो यह साबित करता हो कि फर्श पर सोना फायदेमंद नहीं होता है। जरा सोचिए, आज से हजारों वर्ष पहले जब मैट्रेस का आविष्कार नहीं हुआ था, तो लोग जमीन पर ही सोते थे। आज भी छोटे शहरों, गांवों में लोग जमीन पर ही सोते हैं। बेशक इसका कोई सबूत नहीं है जो यह बताए कि तब लोगों को फर्श पर सोना कैसा लगता था। फर्श पर एक बार सोकर देखिए। इसका अपना ही एक अलग मजा है। संभव है कि आपको शुरुआत में थोड़ा आरामदायक न लगे। या फिर फर्श पर सोने में चुभन महसूस हो। आरामदायक गद्दे की कमी महसूस को, लेकिन जल्दी ही आपको इसकी आदत पड़ जाएगी।

कितना सेहतमंद

आखिर कितना स्वास्थ्यकर है फर्श पर सोना? जब आप सोते हैं, तो मांसपेशियों से तनाव को दूर करना जरूरी होता है। ऐसे में मैट्रेस या गद्दे पर उतना अधिक लाभ नहीं होता है। यदि आप मांसपेशियों से तनाव दूर करना चाहते हैं, तो फर्श पर सोएं। फर्श पर आप गद्दे के मुकाबले ज्यादा सही मुद्रा में सो पाते हैं। सही मुद्रा में सोने से ही मांसपेशियों का तनाव दूर होता है। शुरुआत में आपको फर्श पर सोने में समस्या महसूस हो सकती है, लेकिन इसकी आदत लगने में लगभग चार से छह दिन का समय लग सकता है।

कैसे करें कोशिश

कब और कैसे फर्श पर सोने की शुरुआत करनी चाहिए इस पर भी विशेषज्ञों की अपनी-अपनी राय है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी शुरुआत धीरे-धीरे करनी चाहिए। इसके लिए बेड पर जाने से पहले फर्श पर दस, बीस या फिर तीस मिनट के लिए लेट जाएं। हर रात समय को बढ़ाते जाएं। इस प्रक्रिया को लगभग एक महीने तक अपनाएं। वहीं कुछ कहते हैं कि बस आपको सही तरीका अपनाकर फर्श पर सोने की शुरुआत कर देनी चाहिए। पहली कुछ रात तकलीफ होगी। दर्द भी बढ़ सकता है, पर इस बात की गारंटी है कि आप फर्श पर इतनी सुकून की नींद सो सकते हैं, कि दोबारा बिस्तर पर सोने का सोचेंगे ही नहीं।

तय करें सोने का समय

शरीर के लिए बेहतर रुटीन से बढ़कर कुछ भी नहीं। एक्सरसाइज करने के लिए रुटीन जरूरी नहीं, लेकिन अच्छी नींद के लिए रुटीन बेहद जरूरी होता है। जब आप आठ घंटे की नीदं नहीं लेंगे, तो बेहतर तरीके से काम नहीं कर पाएंगे। सिर दर्द होगा। ब्रेन फॉग रहेगा। दिन भर मीठा खाने का मन करेगा। इसिलए रात में सोने का समय दस बजे तय कर लें।

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