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मेरी उम्र 35 वर्ष है और मैं हेल्दी मानी जाने वाली चीज़ें खाने की कोशिश करती हूं। यही वजह है कि मैंने शक्कर की जगह मिश्री का प्रयोग शुरु किया, क्योंकि मुझे लगता है कि सेहत के लिहाज से मिश्री बेहतर है। लेकिन मेरी एक सहेली ने कहा कि मिश्री और शक्कर में ज़्यादा अंतर नहीं होता। क्या यह सच है? क्या शक्कर की जगह मिश्री का इस्तेमाल करने से कोई फायदा नहीं होता? क्या शक्कर का ग्लिसमिक इंडेक्स कम होता है? और कृपया मुझे बताइए कि कितनी मात्रा में मिश्री खायी जा सकती है?
इस सवाल का जवाब दे रही हैं चाइल्डहूड ओबेसिटी एक्सपर्ट, न्यूट्रिशनिस्ट एंड लाइफस्टाइल कोच,डॉ. तेजेंदर कौर सरना, जो मुंबई से हैं।
मिश्री को लेकर एक ग़लत लेकिन प्रचलित बात यह है कि यह शक्कर की तुलना में सेहत के लिए कम नुकसानदायक है। सेहत पर शक्कर के बुरे प्रभावों के कारण बहुत से लोगों ने शक्कर की जगह मिश्री या गुड़ खाना शुरु कर दिया है। लेकिन जहां तक बात शक्कर और मिश्री की निर्माण प्रक्रिया की है तो इन दोनों के दाने गन्ने के रस के संतृप्त या सैचुरैटड मिश्रण से बनते हैं। वैसे तो इन्हें बनाने का तरीका लगभग समान ही है। लेकिन मिश्री अधिक गाढ़ी होती है और इसमें साधारण चीनी की तुलना में कैलोरी की मात्रा भी अधिक होती है। यही नहीं, ऐसी कोई वैज्ञानिक स्टडीज़ उपलब्ध नहीं हैं जो ये बता सकें कि विभिन्न प्रकार की शक्कर में पोषण तत्वों का स्तर समान होता है या नहीं। इसीलिए मिश्री से मिलने वाली कैलोरी और इसकी निर्माण प्रक्रिया को ध्यान में रखकर यही कहा जा सकता है कि मिश्री शक्कर का हेल्दी पर्याय नहीं है। इसलिए शक्कर की बजाय बेधड़क मिश्री खाने से बेहतर है कि आप अपने भोजन में चीनी और मीठे की मात्रा कम करें।
क्या डायबिटीक्स के लिए मिश्री अच्छी है?
शायद आपको हमारी बात पर भरोसा न हो लेकिन शक्कर को किसी भी रुप में अधिक मात्रा में खाने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है। चूंकि मिश्री भी शक्कर का एक रुप है, आपको इसका सेवन करते हुए भी सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि मिश्री का चिकित्सा संबंधी उपयोग का प्रमाण मिलता रहा है और पूर्व में कुछ रोगों के उपचार के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन मिश्री कितनी मात्रा में ली जा सकती है, इसे लेकर विवाद बना हुआ है।
शक्कर को रसायनशास्त्र में सुक्रोज़ कहा जाता है। इसमें ग्लूकोज़ और फ्रूक्टोज़ होते हैं और इसका ग्लिसमिक इंडेक्स 65 होता है। दूसरी तरफ मिश्री का ग्लिसमिक इंडेक्स भी इतना ही है। आर्टफिशियल मीठे का ग्लिसमिक इंडेक्स शून्य होता है, लेकिन उनके सेवन से कई साइड-इफेक्ट्स भी होते हैं।
यही नहीं, खून में ग्लूकोज़ की मात्रा खाने में केवल कार्बोहाइड्रेट की मात्रा और उसके प्रकार पर निर्भर नहीं करती है। बल्कि आप कार्बोहाइड्रेट के साथ कितनी मात्रा में फैट या प्रोटीन लेते हैं उसपर भी निर्धारित होती है। इसलिए अगर आपके भोजन में अधिक ग्लिसमिक इंडेक्स वाले कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक है तो बेहतर यही होगा कि आप उस दिन आप शक्कर से बनी चीज़ें कम खाएं। इस तरह आपका ग्लूकोज़ लेवल कंट्रोल हो जाएगा।
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अनुवादक-Sadhna Tiwari
चित्रस्रोत- Shutterstock