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Written By: Editorial Team | Updated : October 27, 2017 11:33 AM IST
शायद आपको पता ही होगा कि मेयोनेज़ से लेकर सेज़र ड्रेसिंग सब चीजों में कच्चा अंडा का ही इस्तेमाल किया जाता है। वेटलिफ्टर्स और एथलिट्स प्रोटीन की मात्रा डायट में बढ़ाने के लिए स्मूदी और ओट्स में कच्चे अंडे का इस्तेमाल करते हैं। तो फिर क्यों ये सवाल आता है कि कच्चा अंडा खाना चाहिए कि नहीं। चलिये न्यूट्रिशनिस्ट करिश्मा चावला से पुछते हैं कि नहीं क्या करना सेफ है?
पौष्टिकता
आपको ये जानकार आश्चर्य होगा कि एक कच्चे अंडे में 3 ग्राम प्रोटीन होने के साथ-साथ विटामिन ए, बी, ई, ल्यूटीन और एन्टीऑक्सिडेंट्स होते हैं। अंडा को पकाने से उसकी पौष्टिकता कुछ हद तक कम हो जाती है। कच्चे अंडा में कोलीन, मिनरल होता है जिससे मस्तिष्क का काम अच्छी तरह से होता है और प्रोटीन नर्वस और इम्युन सिस्टेम को सुचारू रूप से करने में मदद करता है। लेकिन सच है कि अंडा को पकाने से ये न्यूट्रिएन्ट्स कम नहीं होते हैं। तो पकाया और कच्चा अंडा का पौष्टिकता के मामले में कोई प्रॉबल्म नहीं होता है।
डाइजेशन
लेकिन जब हजम करने की बात आती है तो पके हुए अंडे का नाम सबसे पहले आता है। जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन के स्टडी के अनुसार कच्चा अंडा खाने से 50 प्रतिशत प्रोटीन की खपत शरीर में होती है और पका हुआ अंडा खाने से 90 प्रतिशत प्रोटीन की होती है खपत। अंडे में जो प्रोटीन, एवीडीन होता है वह कच्चे अवस्था में बायोटिन के साथ मिलकर घुलने में बाधा उत्पन्न करता है। लेकिन अंडे को पका देने से बायोटीन प्रोटीन को घुलने में बाधित नहीं करता है। तो मसल्स को बनाने के लिए आपको स्मूदी में कच्चा अंडा देने की उतनी ज़रुरत नहीं है।
स्वास्थ्य समस्या
कच्चा अंडा खाने का एक ही खतरा है। मुर्गी जब अंडा देती है तब उसमें साल्मोनेला नाम का बैक्टिरीया होता है जो अंडे के छिलके पर रहता ही है। साल्मोनेला के इंफेक्शन से दस्त, उल्टी, बुखार और सिर दर्द तक हो सकता है।
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अनुवादक: Mousumi Dutta
चित्र स्रोत: Shutterstock