खाना खाते समय हम पानी का एक गिलास साथ ज़रूर रखते हैं और बीच-बीच में पानी पीते रहते हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स इस आदत को बुरा मानते हैं। लेकिन खाना खाने के बीच में पानी पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। खाना खाते वक्त पानी पीने से आपके शरीर को इन 5 तरीकों से नुकसान होता है:
लार निकलने की प्रक्रिया को कम करता है: हजम करने की प्रक्रिया का पहला चरण, लार का निकलना होता है क्योंकि वही पाचक अग्नि या हजम करने वाली एन्जाइम्स को संकेत देती है कि हजम करने की प्रक्रिया को शुरू करनी है। खाना खाते-खाते जैसे ही आप पानी पी लेते है लार उसी में घुल जाता है जिसके कारण संकेत देने वाली शक्ति भी कमजोर पड़ जाती है और मुँह में भोजन को तोड़ने की प्रक्रिया भी बंद हो जाती है जिससे खाना को हजम करना मुश्किल हो जाता है।
आमाशय रस घुल जाता है: हमारे पेट में पाचक अम्ल होते हैं जो खाद्द पदार्थ को तोड़कर हजम करने में सहायता करते हैं। इसके अलावा खाने के साथ यदि कोई संक्रामक घटक (ऐजंट) चला जाता है तो उसको मारने में मदद करता है। आयुर्वेद के अनुसार डाइजेस्टिव एन्जाइम्स को ‘पाचक अग्नि’ भी कहते हैं। पानी पीने से यह पाचक अग्नि रूपी एन्जाइम्स पानी में घुल जाते हैं।जिसके कारण खाना हजम करने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है।
एसिडिटी का कारण बन जाता है: अगर आपको एसिडिटी की समस्या है तो पानी पीने की आदत आपके के लिए खतरनाक साबित होगी। इससे हजम करने वाली प्रणाली में बाधा उत्पन्न होती है। सोनाली सबरवाल के अनुसार जब तक आमाशय पूरी तरह से सैचुरेटेड (संतृप्त) नहीं हो जाता जल को सोखता रहता है, उसके बाद पाचक अम्ल को घोलना शुरु कर देता है और मिश्रण सामान्य अवस्था की तुलना में गाढ़ा हो जाता है। इसके कारण एन्जाइम्स का निकलना कम हो जाता है। पेट में बिना हजम वाला खाद्द रह जाने के कारण एसिडिटी हो जाती है।
शरीर में इन्सुलिन की मात्रा बढ़ जाती है: खाते वक्त पानी पीने से शरीर खाना को अच्छी तरह से तोड़कर हजम नहीं कर पाता है जिसके कारण खाद्द का ग्लूकोज़ वसा में बदलकर जमा होने लगता है। इस कारण रक्त में शर्करा का स्तर भी बढ़ जाता है।
इससे वज़न बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है: खाना खाने के बीच में पानी पीने का एक और बुरा प्रभाव शरीर पर पड़ता है। इन्सुलिन के बढ़ने के कारण खाना का ग्लूकोज़ वसा के रूप में जमा होने लगता है जिसके कारण पाचक अग्नि कम काम करता है, जो मोटापा के बढ़ने का कारण बन जाता है। शरीर के वात, कफ़, और पित्त में असंतुलन पैदा हो जाने के कारण शरीर के दूसरे कामों में भी बाधा उत्पन्न होने लगती है।
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