इंटरमिटेंट फास्टिंग से सिर्फ वजन ही नहीं घटता बल्कि घटती है शरीर की ये चीज भी, जानें कौन सा अंग होता है कमजोर

इंटरमिटेंट फास्टिंग एक ऐसा डाइट प्लान है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में लोगों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की है। हालांकि, इंटरमिटेंट फास्टिंग पर हुआ ये हालिया अध्ययन आपको इस डाइट प्लान को फॉलो करने का फैसला करने से पहले दो बार सोचने के लिए मजबूर कर सकता है। जी हां, फास्टिंग से आपके शरीर से चीज भी घटने लगती है।

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Written By: Jitendra Gupta | Updated : October 2, 2020 12:01 PM IST

अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं तो आपने इंटरमिटेंट फास्टिंग के बारे में जरूर सुना होगा। जी हां, इंटरमिटेंट फास्टिंग एक ऐसा डाइट प्लान है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में लोगों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की है। हालांकि, इंटरमिटेंट फास्टिंग पर हुआ ये हालिया अध्ययन आपको इस डाइट प्लान को फॉलो करने का फैसला करने से पहले दो बार सोचने के लिए मजबूर कर सकता है। जी हां, आपने बिल्कुल ठीक सुना इस अध्ययन का दावा है कि अगर आप लगातार इस डाइट प्लान को फॉलो करेंगे तो आपका मसल्स मास कम हो सकता है।

क्या कहता है अध्ययन

सैन फ्रांसिस्को स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन में ये सामने आया है कि अन्य डाइट पैटर्न के मुकाबले सिर्फ इंटरमिटेंट फास्टिंग भी अधिक फायदेमंद नहीं है और इस डाइट के परिणामस्वरूप आपके मसल्स मास को काफी नुकसान पहुंच सकता है। अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के दो समूहों की तुलना की। जिसमें से एक समूह को नियमित डाइट (दिन में तीन बार भोजन) और स्नैक दिए गए जबकि दूसरे समूह में शामिल प्रतिभागियों ने सीमित कैलोरी का सेवन किया, जिन्होंने दोपहर और 8 बजे के बीच कुछ भी नहीं खाया-पिया।

क्या निकला अध्ययन का निष्कर्ष

12 सप्ताह तक चले इस अध्ययन के अंत में शोधकर्ताओं ने पाया कि दोनों समूहों के बीच वजन घटाने, फैट मास, ब्लड शुगर कंट्रोल और कोलेस्ट्रॉल के स्तर के मामले में कोई बड़ा अंतर नहीं है। अगर बात करें संक्षेप में तो ये पाया गया कि इंटरमिटेंट फास्टिंग वास्तव में मेटाबॉलिक स्वास्थ्य या वजन घटाने में ज्यादा सुधार नहीं करती है।

शोधकर्ताओं ने ये पाया कि इंटरमिटेंट फास्टिंग वाले प्रतिभागियों के समूह ने थोड़ा अधिक वजन कम किया, लेकिन यह थोड़ा सा वजन उनके लिए अधिक परेशान करने वाली समस्या अपने साथ लेकर आया।

इंटरमिटेंट फास्टिंग समूह वाले प्रतिभागियों में कुल वजन का लगभग 65 प्रतिशत मसल्स मास होता है। यह उन लोगों में बहुत अधिक है जो नियमित रूप से सीमित कैलोरी वाली डाइट लेते हैं, जिनका मसल्स मास लगभग 20-30 प्रतिशत होता है।

अध्ययन में शामिल लोगों को एक विशिष्ट कैलोरी डाइट, मैक्रोज या एक्सरसाइज रूटीन को बनाए रखने के निर्देश नहीं दिए गए थे। उन्हें बस 8 घंटे की समयावधि में अपने सभी कैलोरी सेवन को फिट करने के लिए कहा गया था, जिसका उन्हें कोई खास फायदा नहीं हुआ खासकर उन लोगों की तुलना में जिन्होंने इस तरह के कठोर नियम का पालन नहीं किया था।

क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग फायदेमंद है?

शरीर पर चढ़े अतिरिक्त वजन को कम करने के लिए इस तरह के सख्त उपाय करने का निर्णय लेने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि फास्टिंग के लाभों को प्राप्त करने के लिए आप क्या और कितना खा सकते हैं और मसल्स लॉस को कैसे रोक सकते हैं।