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Written By: Yogita Yadav | Updated : June 22, 2018 12:56 PM IST
गर्मियों का मौसम शुरू होते ही पानी की अहमियत पता चलने लगती है। यूं भी पानी बहुमूल्य तत्वों में से एक है। आजकल पानी की प्योरिटी को लेकर खूब बहस होने लगी है। इन बहसों के बीच तमाम वैज्ञानिक शोधों में भी यह साबित हो चुका है कि पानी को संरक्षित और सुरक्षित रखने के पारंपरिक भारतीय तरीके सबसे बेहतर हैं। खुद डब्ल्यूूएचओ (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन) ने यह माना है कि मटके का पानी सेहत के लिए बहुत लाभकारी है।
मटके के पानी के लाभ
मिट्टी के घड़े का पानी पीना स्वास्थ्य लिए लाभदायक है। इसका तापमान सामान्य से थोड़ा ही कम होता है जो ठंडक तो देता ही है, मेटाबॉलिज्म भी ठीक रखता है। इसे पीने से शरीर में टेस्टोस्टेरॉन का स्तर भी बढ़ता है। यह प्राकृतिक रूप से पानी को फिल्टर करता है और गुड मिनरल्स को भी नष्ट नहीं होने देता। मिट्टी में मौजूद क्षारीय तत्व और पानी के तत्व जब मिलते हैं तो इससे पानी का पीएच लेवल बैलेंस हो जाता है। बेलेंस पीएच लेवल सेहत के लिए फायदेमंद है।
बैलेंस रहता है पीएच लेवल
शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मटके का पानी मदद करता है। बाहर से आने पर अकसर लोग फ्रिज का ठंडा पानी पी लेते हैं। शरीर और पानी का तापमान एकदम विपरीत होने की वजह से पेट और गले की विभिन्न समस्याओ का सामना करना पड़ता है। घड़े का पानी भले ही फ्रिज के पानी की तरह चिल्ड न हो पर यह विरोधी तापमान से होने वाले गले खराब और कब्ज जैसी समस्याओं से भी बचाए रखता है।
संस्कृति का भी हिस्सा है मटका
मिट्टी का घड़ा यानि मटका भारतीय संस्कृति का भी हिस्सा है। लोग न केवल घरों में मटका रखते हैं, बल्कि कई त्याहारों पर तो विशेष रूप से मटका खरीदा और दान किया जाता है। गंगा दशहरा हो, निर्जला एकादशी या अन्य प्रांतों में गर्मियों में मनाए जाने वाले त्योहार, सभी में मटके का महत्व खास है।
चित्रस्रोत:Shutterstock.