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Written By: Yogita Yadav | Published : February 25, 2019 5:43 PM IST
शरीर के फिट रहने के लिए जरूरी है कि उसमें किसी भी पोषक तत्व की कमी नहीं होनी चाहिए। खासतौर से प्रोटीन की। ©Shutterstock.
अगर आप फिटनेस फ्रीक यानी फिटनेस के दीवाने हैं तो आपको अपनी डायट का बहुत ख्याल रखने की जरूरत है। शरीर के फिट रहने के लिए जरूरी है कि उसमें किसी भी पोषक तत्व की कमी नहीं होनी चाहिए। खासतौर से प्रोटीन की । प्रोटीन फिटनेस बनाने में एक बहुत अहम भूमिका अदा करता है। आइए जानें क्यों जरूरी है फिटनेस के लिए प्रोटीन।
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इसलिए जरूरी है प्रोटीन
प्रोटीन आवश्यक पोषक पदार्थों में से एक है। इसे मानव शरीर में कोशिकाओं की संरचनात्मक इकाई के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि मांसपेशियां, त्वचा, बाल, हड्डियां और रक्त लगभग प्रोटीन से बने होते हैं। मानव शरीर को फिट एवं स्वास्थ्य रखने तथा मांसपेशियां को मजबूत करने के लिए प्रोटीन बहुत ही आवश्यक होता है। प्रोटीन की कमी होने पर शरीर में एनर्जी कम होने लगती है, बाल झड़ने लगते हैं, नाखून कमजोर हो जाते हैं, वजन कम होने लगता है, कमजोरी महसूस होना, चोट या जख्म जल्दी ठीक नहीं होते।
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प्रोटीन की कमी के ये हैं नुकसान
मांसपेशियों में दर्द
शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन प्राप्त न होने पर, जोड़ों तथा मांसपेशियों में दर्द होने लगता है। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन का सेवन न करने से जोड़ों में उपस्थित तरल पदार्थ का निर्माण कम होने लगता है, जिससे लचीलापन कम हो जाता है और जोड़ों में अकड़न के साथ मांसपेशियों में भी दर्द की समस्या भी बढ़ जाती है। अतः मांसपेशियों को उचित पोषण प्रदान करने के लिए प्रोटीन की उचित खुराक को प्राप्त करना आवश्यक होता है। अतः प्रत्येक व्यक्ति को उचित मात्रा में प्रोटीन युक्त आहार के सेवन पर ध्यान देना चाहिए।
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हिमोग्लाबिन की कमी
शरीर में प्रोटीन की कमी से रक्त में सफेद रक्त कोशिकाओं (white blood cells) की संख्या कम होती जाती है तथा साथ ही साथ हीमाग्लोबिन भी कम हो सकता है। जिसके परिणामस्वरूप रोग प्रतिरोधक क्षमता को नुकसान पहुँचता है। यदि शरीर में लम्बे समय तक हीमोग्लोबिन की कमी, कुपोषण का कारण बन सकती है।
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संक्रमण में वृद्धि
प्रोटीन की कमी, प्रतिरक्षा प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। प्रतिरक्षा में कमी के कारण संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है तथा इसकी जटिलताओं में भी वृद्धि कर सकता है, यह समस्या गंभीर रूप से प्रोटीन में कमी का एक सामान्य लक्षण है। बहुत कम प्रोटीन युक्त आहार के सेवन से, शरीर में संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो सकती है, जिसके कारण सम्बंधित व्यक्ति सर्दी, इन्फ्लूएंजा तथा अन्य संक्रमणों का शिकार हो सकता है।
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एनीमिया का खतरा
एनीमिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें मानव शरीर लाल रक्त कोशिकाओं का पर्याप्त मात्रा में उत्पादन करने में असफल रहता है। प्रोटीन की कमी होने पर लाल रक्त कोशिकाओं का पर्याप्त उत्पादन नहीं हो पाता है, जिससे एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है। प्रोटीन की कमी के परिणामस्वरूप शरीर में विटामिन बी 12 और फोलेट की कमी होने का भी खतरा होता है। प्रोटीन की कमी, रक्तचाप को कम कर व्यक्ति को थकावट से ग्रस्त कर सकती है।
त्वचा और नाखून की समस्या
त्वचा और नाखून की समस्या प्रोटीन की कमी का संकेत हो सकती हैं। प्रोटीन की कमी के परिणामस्वरूप सम्बंधित व्यक्ति के नाखून कमजोर, भंगुर तथा अनियमित आकार के हो सकते हैं तथा कुछ मामलों में नाखूनों पर सफेद बैंड या भूरे धब्बे दिखाई देने लगते हैं। प्रोटीन की कमी के परिणामस्वरूप रुखी तथा परतदार त्वचा, त्वचा पर लाली और पैच (patches) के उत्पन्न होने के साथ-साथ सौंदर्यता में गिरावट इत्यादि लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
बालों का झड़ना
शरीर के बाल लगभग 90% प्रोटीन से बने होते हैं। इस प्रोटीन को केराटिन (keratin) के रूप में जाना जाता है। अतः प्रोटीन बालों का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो लंबे और मजबूत बालों के विकास को बढ़ावा देता है। जब शरीर में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन की कमी होती हैं तो बालों से सम्बंधित समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं जिसके अंतर्गत बालों का पतला होना, रंग फीका पड़ना तथा कमजोर और भंगुर होकर गिरना आदि को शामिल किया जा सकता है।
फैटी लिवर
वसायुक्त यकृत (Fatty liver) या यकृत कोशिकाओं में वसा का जमाव, क्वाशियोरकर (Kwashiorkor) नामक समस्या का एक सामान्य लक्षण है। वसायुक्त यकृत प्रोटीन की कमी के सबसे आम लक्षणों में से एक है और यदि इस समस्या का इलाज न किया जाये तो यह अनेक रोगों के विकसित होने का कारण बन सकती है, जिसके अंतर्गत सूजन, लीवर स्केरिंग (liver scarring) और यकृत की विफलता (liver failure) आदि को शामिल किया जा सकता है।
हड्डी फ्रैक्चर का उच्च जोखिम
प्रोटीन की कमी केवल शरीर के ऊतकों और मांसपेशियों को प्रभावित नहीं करती है, बल्कि हड्डियों के फ्रैक्चर होने के उच्च जोखिमों का कारण भी बनती है। व्यक्ति द्वारा पर्याप्त प्रोटीन का सेवन नहीं करने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। रजोनिवृत्ति महिलाओं में, एक अध्ययन से पाया गया कि उच्च प्रोटीन का सेवन हिप फ्रैक्चर (hip fractures) के जोखिम को कम कर देता है।
अत्यधिक थकान
शरीर में प्रोटीन की कमी होने से रक्त में शर्करा का स्तर कम हो जाता है, जिससे व्यक्ति को शारीरिक कमजोरी महसूस होने के साथ ही थकावट और अन्य परेशानियां उत्पन्न होती हैं। इसके अलावा प्रोटीन की कमी, बार-बार भूख लगने का कारण भी बन सकती है। अतः जो व्यक्ति कठिन मेहनत करने वाले होते हैं, और समुचित मात्रा में प्रोटीन का सेवन नहीं करते हैं, तो यह स्थिति उन व्यक्तियों के लिए अनेक परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिये प्रत्येक व्यक्ति को यह ध्यान रखना चाहिए कि शरीर में प्रोटीन की कमी न होने पाये।