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Written By: Editorial Team | Published : October 5, 2017 1:15 PM IST
मोटापा एक गंभीर समस्या है। इससे आपको कई गंभीर रोगों का खतरा होता है। अगर जिम में घंटों पसीना बहाने या तमाम तरह की डायट लेने के बाद भी आपका वजन कम नहीं हो रहा है, तो आप एक खास तरीका आजमाकर देख सकती हैं। ये तरीका है पुरुषों के साथ बैठकर खाना। जी हां, अनुसंधान कहता है कि जब महिलाएं पुरुषों की कंपनी में होती हैं यानी उनके साथ बैठकर खाना खाती हैं, तो वो कम खाने लगती हैं।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पुरुषों के साथ बैठकर खाने से जादुई रूप से वजन कम हो जाता है। वास्तव में जब महिलाएं पुरुषों की कंपनी में होती हैं, तो वे हेल्दी चीजें ऑर्डर करती हैं और कम खाती हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया और यूनिवर्सिटी ऑफ अक्रोन के शोधकर्ताओं ने भोजन और कैलोरी सेवन पर सामाजिक प्रभाव का अध्ययन किया। उनका मानना है कि जेंडर, खाने की आदत और सामाजिक संदर्भ का एक-दूसरे पर प्रभाव पड़ता है। अध्ययन में पिछले शोधों के निष्कर्षों का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि महिलाओं और पुरुषों के लिए शरीर की छवि न केवल भोजन के प्रकार को प्रभावित करती है बल्कि मात्रा को भी प्रभावित करती है। दूसरों पर एक प्रभाव पैदा करने और दूसरों के सामने "स्वयं की प्रस्तुति" बनाने में भोजन एक बड़ी भूमिका निभाता है।
चूंकि बड़ा भोजन मर्दाना को दर्शाता है और छोटा भोजन स्त्रीत्व को दर्शाता है, इसलिए महिलाएं पुरुषों की कंपनी में छोटा भोजन ऑर्डर करती हैं और पुरुष महिलाओं के सामने के बड़ा भोजन ऑर्डर करते हैं, सभी एक अनुकूल तरीके से खुद को प्रोजेक्ट करने का प्रयास करते हैं।
शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि महिलाएं अपोजिट सेक्स यानी पुरुष के सामने अपने इम्प्रेशन को कंट्रोल करने के लिए मील साइज़ का उपयोग करती हैं। और उनकी परिकल्पना के अनुसार, यह पाया गया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने 9987 कम कैलोरी का सेवन किया।
इसलिए अगर आप वजन कम कर रही हैं, तो अपने दोस्तों के साथ खाएं और उनके साथ रेस्टोरेंट्स जाएं। ध्यान रहे कि यह उपाय पुरुषों पर काम नहीं करता है क्योंकि निष्कर्ष बताते हैं कि पुरुष महिलाओं की कंपनी में ज्यादा खाते हैं।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock
सन्दर्भ- Allen‐O’Donnell, M., Cottingham, M. D., Nowak, T. C., & Snyder, K. A. (2011). Impact of group settings and gender on meals purchased by college students. Journal of Applied Social Psychology, 41(9), 2268-2283.