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High Blood Pressure है तो लें योग का सहारा, करें ज्ञान मुद्रा का अभ्यास !

हाई ब्लड प्रेशर में ज्ञान मुद्रा करके देखें, होगा लाभ।

इस दौड़भाग और तनाव भरी जिंदगी में लोगों में ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) की समस्या बढ़ती ही जा रही है। खासकर, उच्च रक्तचाप की समस्या से आज अधिकतर लोग परेशान हैं। यह ब्रेन-हैमरेज का कारण भी बन सकता है। गर्भावस्था के अंतिम दिनों में महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर के मामले बहुत देखने को मिलते हैं। इसे नियंत्रित न किया जाए, तो मां-बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है। हालांकि, अधिकतर लोग दवाओं के जरिए हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन एक बार दवा शुरू हो जाए, तो फिर जीवनभर इससे पीछा नहीं छूटता। ऐसे में योग के जरिए भी आप हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को काबू में ला सकते हैं।

हाई ब्लड प्रेशर में योग

योग विशेषज्ञ कुमार राधारमण कहते हैं कि योग में, ध्यान और प्राणायाम के ऐसे कई तरीके हैं, जिनसे आप हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से मुक्त रह सकते हैं। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि आपको दवा साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं।

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आजमाएं ज्ञान मुद्रा

कुमार राधारमण कहते हैं कि यदि आप हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से परेशान हैं, तो ज्ञान मुद्रा करके देखें। इसके लिए सबसे पहले पालथी मारकर बैठ जाएं। पीठ सीधी रहे। यदि पीठ सीधी करके बैठने में दिक्कत हो, तो पीठ को किसी दीवार के सहारे टिका लें। सिर को बिल्कुल सीधा रखते हुए एकदम स्थिर रखें। आंखें बंद कर लें। पलकों में कोई हलचल न हो। अब ज्ञान मुद्रा लगाएं। इसमें अंगूठे के ऊपरी हिस्से को तर्जनी के ऊपरी हिस्से से मिलाएं और बाकी उंगलियों को बिल्कुल सीधा रखें। इस मुद्रा में अपनी हथेलियों को घुटनों पर रख लें। हथेलियों की दिशा ऊपर की ओर रहे। अब अपनी सांसों पर ध्यान दें। न अपनी तरफ से सांसों की गति घटाएं-बढ़ाएं और न ही कोई कुंभक लगाएं।

जब आप सांस पर गौर करना शुरू करेंगे, तो बहुत से विचार आपको घेर लेंगे। उनसे आपको ध्यान में उतरने में दिक्कत होगा। यह हर शुरुआती साधक की समस्या है, लेकिन विचारों का आना तभी तक ध्यान में बाधक है, जब तक आप उनसे लड़ते हैं। उन्हें दूर करने की कोशिश करते हैं। विचारों से लड़ें नहीं, उनका स्वागत करें। आप हैरान होंगे कि जैसे ही आप विचारों को स्वीकार कर लेते हैं, विचार धीरे-धीरे गायब हो जाएंगे। यह निर्विचार अवस्था ही ध्यान है।

धीरे-धीरे, शरीर और मन से आपका ध्यान हट जाएगा और आप केवल सांस रह जाएंगे। सहज श्वास जारी रखें। अगर आप इसी अवस्था में आधे घंटे रह सकते हैं, तो ठीक वरना शवासन में लेट जाएं। आपको नींद का अनुभव होगा, लेकिन नींद से बचने की कोशिश करें। ध्यान से बाहर आने के बाद, धीरे-से दायीं करवट लें और उठकर बैठ जाएं। हथेलियों को कुछ सेकंड तक रगड़ें और फिर उसे अपनी आंखों पर रखें। आंखों पर हथेलियों की गर्माहट से आप तरोताजा महसूस करेंगे और सामान्य दिनचर्या के लिए तैयार हो जाएंगे। हालांकि, किसी भी योगाभ्यास और मुद्रा लगाने से पहले किसी अच्छे योगाचार्य से संपर्क अवश्य कर लें।

अन्य लाभ

अंतर्मुखी होने में मदद मिलेगी।

मन शांत होगा, जिसका प्रभाव घर और बाहर दोनों जगह दिखेगा।

सांस संबंधी रोगों से बचे रहेंगे।

आंतें मजबूत होंगी और पाचन-शक्ति बढ़ेगी।

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