हम भारतीय किसी न किसी रूप में अपने हम भोजन में दाल खाते हैं। तड़केवाली दाल हो या छोले-राजमा जैसी सब्ज़िया या दाल वाले परांठे तो हमारे खाने का एक बहुत अहम हिस्सा होता है। भारत में, हमारे लिए कई तरह के दालें उपलब्ध हैं, जो हम विभिन्न तरीकों से पका सकते हैं और हमारे भोजन में शामिल कर सकते हैं। भारतीय तरीके से दाल खाने की सबसे अच्छी बात यह है कि पारंपरिक भारतीय व्यंजनों में यह कोशिश की जाती है कि हमारे हर निवाले में मसाले, कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की एक उचित खुराक मिले। दाल चावल, दाल खिचड़ी, वरण भात, पुरण पोली अपने भोजन में दाल खाने के स्वादिष्ट तरीके हैं। सेलेब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर बता रही हैं दाल खाने के सबसे महत्वपूर्ण और सेहतमंद फायदे और साथ ही कि हमें दाल खाने की भारतीय परंपरा को कभी छोड़ना नहीं चाहिए।
दलहन पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं- जब हम दाल और अनाज को सही अनुपात में मिलाते हैं, तो हम जैविक मूल्य और प्लांट प्रोटीन जैसे तत्व मिलते हैं। आप दाल चावल, खिचड़ी, इडली या पुरण पोली, दाल कचौरी जैसे व्यंजन खाएं। ये लोकप्रिय भारतीय व्यंजन, दालों को अपने आहार का एक नियमित हिस्सा बनाने का एक शानदार तरीका है।
दालें सुपर फूड हैं- दालें मिनरल्स का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं और ब्लड शुगर को कम करने में मदद करते हैं। ये वयस्कों में उन मुंहासे को रोकने में भी मदद करते हैं, जो अक्सर ठोढ़ी और माथे के ऊपरी हिस्से पर दिखाई देते हैं। वे लीवरस्टोन और गैलस्टोन (gallstones) को रोकने के प्राचीन आयुर्वेदिक रहस्य भी हैं।
दालें फायदेमंद हैं- नाइट्रोजन की कमी को ठीक करके, वे उस मिट्टी को मज़बूत और समृद्ध बनाती हैं जिसमें वो पैदा होती हैं। इस तरह वे पूरी इकोसिस्टम को ठीक बनाते हैं और इनसे फूल, फल, मधुमक्खियों को फायगा पहुंचाना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करता है कि केमिकल फर्टिलाइज़र्स की जरूरत नहीं पड़ती।
दाल खाना ट्रेंड में है- अगर आपको अपने हर खाने की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करना पसंद है तो आपको बता दें कि इन दिनों ढेर सारे हैशटैग्स ऐसे हैं जो दालों से जुड़े हुए हैं जैसे- #vegan #dairyfree #glutenfree #crueltyfree, etc.
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भारत में 65,000 से अधिक किस्म की दालें उपलब्ध हैं, लेकिन अब हम सिर्फ 6 प्रकार की दालें खाते हैं। इसीलिए अपने खाने में कम से कम 12-15 प्रकार की दालों को शामिल करें। यह आपके पेट के बैक्टीरिया की डायवर्सिटी और ताकत को बढ़ाएगा और साथ ही देश के किसानों की भी मदद होगी और यह ग्लोबल इकोलॉजी (global ecology) में सुधार करेगा। है ना यह एक बेहतरीन तरीका!
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