
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : April 22, 2026 1:41 PM IST
Medically Verified By: Dr. Amit Kumar Sanghi
Image credits by: Supplements Side Effects
Gym supplements side effects : हम में से कई लोग अपनी बॉडी को आकर्षक बनाना चाहते हैं, जिसके लिए इन दिनों जिम जाना एक ट्रेंड बन चुका है। इसके साथ ही कई लोग प्रोटीन पाउडर, प्री-वर्कआउट ड्रिंक, फैट बर्नर और मसल गेनर जैसे सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। नारायणा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डॉक्टर अमित कुमार संघी का कहना है कि अक्सर यह देखा जा रहा है कि बिना पूरी जानकारी के इन उत्पादों का काफी ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। फिटनेस का लक्ष्य तो सही माना जाता है, लेकिन गलत तरीके से सप्लीमेंट लेने से शरीर पर गंभीर असर पड़ सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं इस बारे में-
सप्लीमेंट्स को ऐसे उत्पादों के रूप में जाना जाता है, जिनसे शरीर को अतिरिक्त पोषण मिलता है। इनमें प्रोटीन, विटामिन, मिनरल, अमीनो एसिड और अन्य तत्व शामिल होते हैं। इनका उपयोग तब सही माना जाता है, जब शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी पाई जाती है या डॉक्टर द्वारा सलाह दी गई हो। लेकिन आज के समय में इन्हें शॉर्टकट के रूप में अपनाया जाता है, जो जोखिम भरा साबित हो सकता है।
डॉक्टर कहते हैं कि अगर आप गलत तरीके से सप्लीमेंट्स लेते हैं, तो इससे आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। आइए जानते हैं इस बारे में-
सप्लीमेंट्स का सबसे ज्यादा असर पाचन तंत्र पर डाला जाता है। कई लोगों में गैस, पेट फूलना, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं देखी जाती हैं। हाई प्रोटीन सप्लीमेंट्स का अधिक सेवन करने से लिवर और किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाला जाता है। लंबे समय तक बिना जरूरत के इनका सेवन किया जाता है, तो शरीर के प्राकृतिक पाचन संतुलन को बिगाड़ा जाता है।
यह पाया जाता है कि कुछ सप्लीमेंट्स में स्टेरॉयड या हानिकारक केमिकल्स मिलाए जाते हैं। इनका लगातार सेवन करने से लिवर को नुकसान पहुंचाया जाता है। फैटी लिवर, लिवर इंफ्लेमेशन और यहां तक कि लिवर फेल होने का खतरा भी बढ़ाया जाता है। इसी तरह किडनी को अतिरिक्त प्रोटीन फिल्टर करना पड़ता है, जिससे किडनी फंक्शन पर असर डाला जाता है।
कुछ प्री-वर्कआउट और फैट बर्नर सप्लीमेंट्स में कैफीन और अन्य उत्तेजक तत्व अधिक मात्रा में डाले जाते हैं। इससे दिल की धड़कन तेज की जाती है और ब्लड प्रेशर बढ़ाया जाता है। इसके अलावा हार्मोनल असंतुलन भी पैदा किया जाता है, जिससे शरीर में थकान, चिड़चिड़ापन और नींद की समस्या महसूस की जाती है।
अक्सर जिम ट्रेनर या इंटरनेट के आधार पर सप्लीमेंट्स का चयन किया जाता है। शरीर की जरूरत, उम्र, वजन और मेडिकल हिस्ट्री को नजरअंदाज किया जाता है। यही सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। हर व्यक्ति का शरीर अलग तरीके से प्रतिक्रिया देता है, इसलिए एक ही सप्लीमेंट सभी के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता।
डॉक्टर कहते हैं कि सप्लीमेंट्स के बढ़ते चलन के कारण लोग नैचुरल चीजों को कम महत्व देने लगे हैं। दाल, दूध, अंडे, फल और हरी सब्जियां शरीर के लिए पर्याप्त पोषण प्रदान करती हैं। जब इनकी जगह सप्लीमेंट्स को प्राथमिकता दी जाती है, तो शरीर को संतुलित पोषण नहीं मिल पाता।
फिटनेस पाने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद को प्राथमिकता दी जाती है। सप्लीमेंट्स का उपयोग केवल जरूरत पड़ने पर और विशेषज्ञ की सलाह से किया जाना चाहिए। शरीर के संकेतों को समझना और समय पर जांच कराना भी जरूरी माना जाता है।
फिटनेस के लिए शॉर्टकट अपनाने की कोशिश में सप्लीमेंट्स का अंधाधुंध इस्तेमाल किया जाता है, जो लंबे समय में नुकसान पहुंचाता है। सही जानकारी और सावधानी के साथ ही इनका उपयोग सुरक्षित माना जाता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्राकृतिक तरीके ही सबसे बेहतर विकल्प साबित होते हैं।
बादाम, दूध, दही, अंडा, पनीर, मछली, साबुत अनाज, आदि को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।
अगर प्रोटीन पाउडर अच्छी क्वालिटी का है और उसे अन्य सभी बातों का ध्यान रखते हुए सही मात्रा में लिया जा रहा है, तो यह आपके स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह से सेफ माना जाता है। इसलिए एक्सपर्ट्स की सलाह के अनुसार इसे लेना अच्छा विकल्प हो सकता है।
अगर व्यक्ति जिम या व्यायाम आदि नहीं करता है तो उन्हें रोजाना अपने शरीर के प्रति किलोग्राम के अनुसार 0.8 से 1 ग्राम तक प्रोटीन लेना चाहिए। वहीं जो लोग जिम या एक्सरसाइझ करते हैं, वे रोजाना अपने शरीर के वजन प्रति किलोग्राम के अनुसार 1.5 से 1.7 ग्राम तक प्रोटीन ले सकते हैं।
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