बॉडी बिल्डिंग के लिए करते हैं प्रोटीन पाउडर का अधिक सेवन, तो जान लें इसके नुकसान

कभी-कभी प्रोटीन पाउडर इंसुलिन स्तर को प्रभावित कर सकता है। वर्कआउट के बाद प्रोटीन पाउडर का उपभोग, इंसुलिन में वृद्धि करता है और नियमित इंसुलिन में यह वृद्धि हानिकारक हो सकता है।

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Written By: Anshumala | Published : March 25, 2019 8:19 AM IST

जो लोग फिटनेस फ्रीक होते हैं, वो अक्सर प्रोटीन पाउडर का इस्तेमाल करते हैं। शरीर में प्रोटीन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए लोग प्रोटीन पाउडर का यूज करते हैं। प्रोटीन पाउडर दूध, मक्खन, केसिन और सोया से बने सूखे पाउडर होते हैं। बॉडी बिल्डर और वर्कआउट करने वाले इसका सेवन अधिक करते हैं। इसमें ग्लोबुलर प्रोटीन होते हैं जो तरल पदार्थ से बने होते हैं। ये तरल पदार्थ बायोडिग्रेशन के प्रोडक्ट से तैयार किए जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि ये ग्लोबुलर शरीर को लाभ पहुंचाने से कहीं अधिक नुकसान पहुंचाते हैं? यदि आप वर्कआउट रूटीन फॉलो करते हैं, तो शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन प्रदान करना भी जरूरी होता है, पर प्रोटीन पाउडर का इस्तेमाल अपने ट्रेनर या फिर डाइटिशियन की सलाह पर ही करें। जानें, इसके अधिक इस्तेमाल से शरीर पर क्या साइड एफेक्ट होते हैं-

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 मुंहासों का आना

प्रोटीन पाउडर में कई प्रकार के हार्मोन और बायोएक्टिव पेप्टाइड्स होते हैं, जो सीबम में वृद्धि करते हैं। सीबम की वृद्धि त्वचा पर मुंहासे की समस्या का कारण बनती है।

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पोषक तत्वों की कमी

शरीर में पोषक तत्वों की कमी प्रोटीन पाउडर उपभोग करके हो सकता है। यदि आप अंडे, दूध और मांस जैसे प्राकृतिक प्रोटीन खाद्य पदार्थों का उपभोग करते हैं तो ऐसी समस्या का कम होती है। प्रोटीन पाउडर अधिक प्रोटीन प्रदान करता है जो घनत्व होता है। इसकी खपत पोषक तत्वों की कमी का कारण बन सकता है।

इन्टेस्टाइनल माइक्रोबायोटा

वे प्रोटीन लैक्टोफेरिन जैसे कुछ यौगिकों का स्रोत होता है। ये यौगिक अडल्ट गट फ्लोरा के जोखिम में वृद्धि करता है। इससे पेट से जुड़ी समस्या हो सकती है और गैस या अपच की समस्याएं भी हो सकती हैं।

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टॉक्सिक

सस्ता प्रोटीन पाउडर जहरीला होता है, जो शरीर के लिए हानिकारक है। यह सिरदर्द, थकान, कब्ज और मांसपेशियों में दर्द का कारण बन सकता है।

इन्सुलिन के स्तर को बढ़ाए

कभी-कभी प्रोटीन पाउडर इंसुलिन स्तर को प्रभावित कर सकता है। वर्कआउट के बाद प्रोटीन पाउडर का उपभोग, इंसुलिन में वृद्धि करता है और नियमित इंसुलिन में यह वृद्धि हानिकारक हो सकता है।

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