मैं 50 वर्षीय हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट डिजीज़ से पीड़ित व्यक्ति हूं। मैं नियमित रूप से दवाई ले रहा हूं। मैंने टीएलसी डायट के बारे में सुना है। क्या यह ह्रदय रोगियों के लिए सही है? इसके अलावा मुझे किस तरह की डायट लेनी चाहिए?
इस सवाल का जवाब ग्रो फिट में चीफ न्यूट्रीशनिस्ट ललिता सुब्रमणियम दे रही हैं।
जिस तरह हाई बीपी और हार्ट डिजीज़ से पीड़ित लोगों को डैश डायट से दिल को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है उसी तरह थेरप्यूटिक लाइफस्टाइल चेंजेस (टीलसी) डायट से भी फायदा होता है। टीएलसी डायट प्लान कोलेस्ट्रॉल कम करने में मददगार है। इसके अलावा एक्सरसाइज, स्मोकिंग और वेट लॉस आदि में बदलाव करना पड़ता है। टीएलसी डायट में सैचुरेटेड फैट का कम सेवन किया जाता है, जिससे आपको मोटापा कम करके शरीर का सही वजन बनाए रखने में मदद मिलती है। आपको बता दें कि मोटापा कोरोनरी हार्ट डिजीज का एक मुख्य जोखिम है।
सैचुरेटेड फैट का सेवन 7 फीसदी से अधिक नहीं करना चाहिए। शरीर में अधिक सैचुरेटेड फैट होने से कोलेस्ट्रॉल जमा होने का खतरा होता है।
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रोजाना डायट के जरिए केवल 200 मिलीग्राम से कम कोलेस्ट्रॉल का सेवन करना चाहिए।
दिल को हेल्दी रखने के लिए किसी भी डायट प्लान में रोजाना 2400 मिलीग्राम से कम सोडियम का सेवन ही करना चाहिए।
रोजाना डायट द्वारा 25 से 35 फीसदी ही कैलोरी की खपत करनी चाहिए। इस बात का ध्यान रहे कि कैलोरी सिर्फ स्वस्थ वजन बनाए रखने के लिए है।
इसके अलावा इस डायट में नियमित रूप से एक्सरसाइज करना भी शामिल है। यानि आपको रोजाना आधा घंटा वाक और एक्सरसाइज़ करनी चाहिए।
इन बातों का भी रखें ख्याल
अपनी डायट में हरी पत्तेदार सब्जियां, फाइबर वाली चीजें शामिल करें। इनमें कम वसा और पोषक तत्व अधिक होते हैं। इतना ही नहीं इनसे आप ज्यादा खाने से भी बचते हैं जिस वजह से ये वजन बढ़ने से रोकने में सहायक हैं। फल और सब्जियों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट से धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमा नहीं होता है।
कई लोग हृदय रोग या हाई कोलेस्ट्रॉल का इलाज कराने के बाद तेल का सेवन पूरी तरह बंद कर देते हैं। वास्तव में सही तरीका ये है कि आप बहुत कम मात्रा में सैचुरेटेड फैट का सेवन करें। वास्तव में आपको इन चीजों को ओमेगा-3 फैट्स में बदल देना चाहिए, जिससे ना केवल कोलेस्ट्रॉल कम होता है बल्कि हार्ट डिजीज का खतरा भी कम होता है।
नमक और मीठे का कम सेवन आपके लिए फायदेमंद है। नमकीन और मीठे से आपके ब्लड प्रेशर पर प्रभाव पड़ता है और वजन बढ़ता है। हालांकि नमक के कम सेवन से सोचने-समझने की क्षमता, हार्ट फेलियर, हाइपरटेंशन और कोरोनरी हार्ट डिजीज का भी खतरा रहता है। इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड्स में शुगर की मात्रा अधिक होती है, जिससे मोटापा बढ़ सकता है, जोकि कोरोनरी हार्ट डिजीज का आम जोखिम है।
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