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मेरी उम्र 28 साल है और मैं पेशे से सॉफ्टवेर इंजीनियर हूँ। मैं एक ऐसे साउथ इंडियन ब्राह्मण परिवार से हूँ जहां नॉन-वेज खाना पूरी तरह मना है। लेकिन हाल ही में उन्होंने अपने शाकाहारी डायट में भी बदलाव लाये और अब सब लोग सिर्फ कच्ची शाकाहारी चीजें खाने लगे हैं। ऐसा वे किसी आध्यात्मिक गुरु के बताने पर कर रहे हैं। अब सब लोग सिर्फ ताजे फल और कच्ची हरी सब्जियां खाते हैं साथ ही उसमें तेल या नमक कुछ भी नहीं मिलाते हैं। इसके अलावा मुझ पर भी दवाब बनाया जा रहा है कि मैं भी ऐसा ही करूं। क्या ऐसी चीजें खाने से मेरे शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जायेगी? क्या सच में बेहतर स्वास्थ्य के लिए ऐसा खाना खाना ज़रूरी है?
वास्तव में अगर आप अपनी नैचुरल डायट पर किसी भी तरह की रोक लगाते हैं तो उससे आपको नुकसान ही है। जो लोग यह मानते हैं कि सब्जियों को और बाकी खाने वाली चीजों को बिना पकाये ही कच्चे खा लेना चाहिए उसके पीछे उनका तर्क होता है कि पकाने पर उसके पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। हालांकि उन्हें यह नहीं पता कि ऐसे तो रॉ फ़ूड के कई एंजाइम इंसान के पेट में अपने आप ही नष्ट हो जाते हैं। एक बारगी फलों और सब्जियों को तो कच्चे खाया भी जा सकता है लेकिन आप अनाज और बाकी चीजों को तो खा भी नहीं सकते क्योंकि इन्हें चबाना बहुत मुश्किल है।
विटामिन बी -12 ऐसा पोषक तत्व होता है जो आमतौर पर हमें एनिमल प्रोडक्ट से ही मिल पाता है। हालांकि यह हमें प्लांट मिल्क और सोया आइटम्स से भी मिल सकता है लेकिन इनमें मात्रा काफी कम होती है। यह हमारे शरीर की नर्व सेल्स को सुरक्षित रखते हैं और शरीर के लिए एक जेनेटिक मटेरियल का उत्पादन करते हैं। शाकाहारी चीजों में इस विटामिन की काफी कमी होती है जिसके कारण आपके शरीर को इससे जुड़े फायदे नहीं मिल पाते हैं। इसके अलावा सिर्फ शाकाहारी लोगों में विटामिन डी, ओमेगा-3, आयरन, कैल्शियम, जिंक और आयोडीन की भी कमी हो जाती है। प्रेगनेंट महिलायें या ग्रोविंग बेबी के लिए भी कच्चे शाकाहारी चीजें खाना उनके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
इसी तरह शाकाहारी या कच्चे शाकाहारी चीजों में फोलिक एसिड की मात्रा कम होती है। एक शोध के अनुसार फोलेट की कमी मुख्य रूप से उन लोगों को होती है जो फलीदार सब्जियों का सेवन कम करते हैं। वैसे भी इन फलीदार सब्जियों को कच्चा खाना बहुत मुश्किल है। इसके अलावा आपमें प्रोटीन की कमी भी हो सकती है क्योंकि दाल प्रोटीन के मुख्य स्रोत होते हैं और दालों को कच्चा खा पाना और भी ज्यादा मुश्किल है।
इस समस्या से कैसे बचें:
ऐसे कई पौधे हैं जिनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा ज्यादा होती है जैसे कि हेम्प सीड्स, फ्लेक्ससीड्स, अखरोट, चिया बीज और सोयाबीन। हालांकि इन शाकाहारी चीजों में मौजूद अल्फा-लिनोलेनिक एसिड आसानी से ओमेगा-3 फैटी एसिड में कन्वर्ट नहीं हो पाता है। इस परेशानी से बचने के लिए शाकाहारी लोग 200-300 मिलीग्राम इकोसेपेनटैनोइक एसिड (eicosapentaenoic acid) और डोकोसहेक्सानोइक एसिड (docosahexaenoic acid) को सप्लीमेंट के रूप में खाना चाहिए। अगर आप शरीर में आयरन और जिंक की मात्रा बढ़ाना चाहते हैं तो अपनी डायट में फर्मेंटेड फ़ूड और स्प्राउट्स की मात्रा बढ़ा दें। इसी तरह अगर आप विटामिन डी और बी 12 की मात्रा बढ़ाना चाहते हैं तो ऐसी शाकाहारी चीजों को शामिल करें जिसमें इन विटामिन की मात्रा ज्यादा हो।
इन सबसे भी ज्यादा सबसे ज़रूरी बात यह है कि अपने पेरेंट्स और बाकी घर के सदस्यों को किसी अच्छे डायटीशियन के पास लेकर जायें। अगर उन्हें किसी तरह की बीमारी पहले से ही है तो ज़रूरी यह है कि आप पहले दोक्रोर से अपनी समस्या ठीक करवाएं फिर जाकर ऐसे किसी लाइफस्टाइल को अपनाएँ। दूसरी बात यह कि आप अपने जीने के तरीके को कभी भी अपने बच्चों या भाइयों पर न थोपें। घर का कोई सदस्य क्या खाना चाहता है यह उसकी अपनी निजी पसंद होनी चाहिए।
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अनुवादक: Anoop Singh
चित्र स्रोत: Shutterstock