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Written By: Usman khan | Updated : January 5, 2017 12:13 PM IST
पश्चिमी सभ्यता भारतीयों पर बुरी तरह हावी होती जा रही है। रोजाना प्रयोग में होने वाली सामान्य चीजों में हम विदेशी ब्रांड खोजते हैं। इतना ही नहीं अब हम अपने घर के लिए भी विदेशी चीजें ही पसंद करते हैं। इनमें से एक है टॉयलेट। लोग घरों में अब वेस्टर्न टॉयलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। बेशक वेस्टर्न टॉयलेट देखने में सुंदर और आरामदायक है लेकिन इसके कई सारे नुकसान भी हैं। जिन्हें पढ़कर आप हैरान रह जाएंगे।
1) बिना कुछ किए एक्सरसाइज
एक्सरसाइज के लाभों के बारे में हर कोई वाकिफ है। लेकिन अधिकतर लोग नियमित रूप से एक्सरसाइज नहीं कर पाते हैं। इसका सबसे बेहतर तरीका ये है कि आप इंडियन टॉयलेट का इस्तेमाल करना शुरु कर दें। इंडियन टॉयलेट में आप उठते-बैठते हैं और हाथों का इस्तेमाल करते हैं। इसके इस्तेमाल से आपका ब्लड सर्कुलेशन सही बना रहता है। इसके अलावा आपके हाथ-पैरों और मांसपेशियों में होने वाले दर्द से छुटकारा मिलेगा। जबकि वेस्टर्न टॉयलेट में आप आराम की मुद्रा में बैठते हैं जिससे आप ज्यादा मुवमेंट नहीं कर पाते। पढ़ें- इन 9 बातों को मानेंगे तो पब्लिक टॉयलेट के इस्तेमाल से नहीं पड़ेंगे बीमार
2) पानी की बचत
वेस्टर्न टॉयलेट में ज्यादा पानी का यूज होता है, बावजूद उसके गुदा की सही से सफाई नहीं हो पाती। इसके लिए आपको टॉयलेट पेपर की ज़रूरत पड़ती है। दूसरी तरफ इंडियन टॉयलेट में सफाई के लिए कम पानी का इस्तेमाल होता है और सफाई भी बेहतर हो जाती है।
3) पाचन क्रिया सही रहती है
जब आप इंडियन टॉयलेट में बैठते हैं तो आपके पूरे पाचन तंत्र पर दबाव बनता है जिससे लैट्रिन तेज प्रेशर से बाहर आती है। इससे आपका पेट सही से साफ हो जाता है और आपको आराम मिलता है। दूसरी ओर वेस्टर्न टॉयलेट में आप आराम से तो बैठ जाते हैं लेकिन आपकी लैट्रिन का प्रवाह कम रहता है, जिससे कई बार डाइजेशन से जुड़ी समस्याएं पैदा हो जाती हैं।
4) बच्चों के प्रयोग में आसान
इंडियन टॉयलेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका प्रयोग बच्चे आसानी से कर सकते हैं। चूंकि ये धरातल से जुड़ी होती है, इसलिए एक उम्र आने तक बच्चे बिना किसी सहारे के अपनेआप इसका प्रयोग कर लेते हैं। वेस्टर्न टॉयलेट में बच्चों के गिरने का डर बना रहता है।
5) आराम बन सकता है हराम
इंडियन टॉयलेट की बनावट में कुछ खास प्रयोग नहीं किया गया है। जब आप सड़क सफर में, जंगलों में और पहाड़ों जैसी किसी जगह होते हैं, तो आप बिना किसी समस्या के लैट्रिन कर सकते हैं क्योंकि आपको सिर्फ धरातल पर बैठना है। जब बात करते हैं वेस्टर्न टॉयलेट की तो इसका प्रयोग करने वाले को अरामदायक स्थिति में लैट्रिन करने की आदत होती है। अगर उसे कहीं बाहर लैट्रिन जाना पड़े तो उसे समस्या हो सकती है।
6) ज्यादा प्राइवेसी
प्राइवेसी के मामले में इंडियन टॉयलेट बेहतर है। इसके धरातल पर बने होने के कारण आपको भी जमीन से सटकर बैठना पड़ता है। इससे आपको एक फायदा होता है कि आप स्पाई कैमरे या अन्य गलत हरकतों से बच जाते हैं। दूसरी ओर वेस्टर्न टॉयलेट में आप कुछ ऊंचाई पर बैठते हैं। ऐसे में आपके प्राइवेट पार्ट्स दिखने की ज्यादा संभावना रहती है।
चित्र स्रोत - Shutterstock
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