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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 1:59 PM IST
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अनुवादक – Usman Khan
कई बच्चे ज्यादा मोटे होते हैं। परिजन अक्सर ये समझते हैं कि अगर बच्चा मोटा है, तो इसका मतलब है कि वो हेल्दी है। लेकिन आपको बता दें कि मोटे होने का बिल्कुल भी ये मतलब नहीं है कि बच्चा हेल्दी भी हो। वास्तव में बच्चे की खाने की आदतें उसके मोटापे का कारण बन सकती हैं। चाइल्डहुड ओबेसिटी एक्सपर्ट डॉक्टर तेजेंदर कौर सरना के अनुसार, मोटापा बच्चों का बड़ा दुश्मन है। बचपन के मोटापे यानि चाइल्डहुड ओबेसिटी के कारण बच्चे को लंबे समय तक कई जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। डॉक्टर सरना आपको बता रही हैं कि बचपन में मोटापा किन-किन कारणों से बढ़ता है। पढ़ें- इन 4 आसान एक्सरसाइज से दूर करें चेहरे का मोटापा
1) ओवर फीडिंग- कई बार माता-पिता ये सोचकर कि बच्चे को ज्यादा एनर्जी की जरूरत है, उसे ज्यादा चावल या रोटी खिलाते हैं। कई बार तो बच्चा खाना भी नहीं चाहता है लेकिन आप जबरदस्ती उसके मुंह में ठूस देते हैं। यकीनन इससे उसका मोटापा बढ़ सकता है।
2) प्रोसेस्ट फूड- खाना बनाने का समय नहीं मिल पाने के कारण आप बच्चे को चिप्स, कबाब, बिस्कुट, सैंडविच जैसे प्रोसेस्ट फूड खिलाने लगते हैं। आपको बता दें कि इससे जीवन तो आसान हो जाता है लेकिन ये चीजें धीरे-धीरे बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती हैं। जाहिर है कैलोरी से भरपूर इन चीजों से बच्चे का वजन बढ़ सकता है।
3) खाने का गलत समय- सही समय पर खाने से विशेषकर दो घंटे के अंतराल में खाने से सही पोषण मिलते हैं। लंबे समय तक नहीं खाने से ब्लड शुगर लेवल डाउन हो सकता है जिससे मेटाबोलिज्म प्रभावित हो सकता है। इसलिए बच्चे को सही समय पर खाना दें। सही समय पर खाने से मेटाबोलिज्म रेट बढ़ता है और खाना पचाने में आसानी होती है।
4) जंक फूड- बाहर का खाना विशेषकर जंक फूड जैसे- पिज्जा, बर्गर आदि खाने से बच्चे का मोटापा बढ़ सकता है। बजाय इसके बच्चे को घर का खाना खिलाना सही विचार है।
5) सॉफ्ट ड्रिंक- कोला और अन्य कार्बोनेटेड ड्रिंक में भरपूर मात्रा में शुगर होता है। जाहिर है अगर आपके फ्रिज में ये चीजें रखी होंगी, तो बच्चा बार-बार पिएगा। आपको बता दें कि शुगर से कैलोरो बढ़ती है और कोई पोषण नहीं मिलता है।
6) कंप्यूटर पर गेम खेलना- आजकल के बच्चे खेलने के लिए बाहर जाने की बजाय फोन या कंप्यूटर पर गेम खेलना ज्यादा पसंद करते हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इससे बच्चे आलसी होने लगते हैं और किसी अन्य शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेते हैं। जाहिर है इससे बच्चे की कैलोरी बर्न नहीं होती है और मोटापे का शिकार हो जाते हैं।
चित्र स्रोत - Shutterstock