... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 12:16 PM IST
Read this in English
अनुवादक – Shabnam Khan
योग की मुद्राएं जागरुकता का भाव पैदा करने में सहायक होती हैं। ऐसी ही एक योग मुद्रा है अभय मुद्रा। ये न सिर्फ आपको जागरूक करती है और वर्तमान में बनाए रखती है बल्कि साथ ही साथ आपको भय यानी डर से मुक्ति भी दिलाती है।
आर्ट ऑफ लिविंग के मेडिटेशन गुरू दीपक शर्मा कहते हैं, ‘संस्कृत में अभय का अर्थ होता है निडर यानी जिसे डर न लगे। इस योग मुद्रा का इतिहास बताता है कि जब भगवान बुद्ध पर एक हाथी ने आक्रमण किया तो उन्होंने डर से उबरने और नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए इस मुद्रा का अभ्यास किया।एक्ज़ाम से पहले इस मुद्रा का अभ्यास करने से एक्ज़ाम से लगने वाला डर दूर होता है। ये मुद्रा मन को शांत करती है और चिंता दूर करने में मदद करती है। इस मुद्रा का अभ्यास करने से साहस आता है। इससे आप अपने चक्र या ऊर्जा मार्ग भी खोल सकते हैं।’
इस मुद्रा को ऐसे करें:
इस योग मुद्रा की एक और ख़ास बात ये है कि आप इसे दिन के किसी भी समय कर सकते हैं। इसके लिए आपको योगा मैट या किसी और चीज की जरूरत भी नहीं पड़ती। अपनी सुबह अभय मुद्रा से शुरू करें और इसे 40 दिन तक दोहराएं। हर रोज़ सुबह इसका अभ्यास करने से आपका दिन शांत बना रहेगा।
चित्र स्रोत - Shutterstock