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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 2:35 PM IST
किटोजेनिक डायट(Ketogenic diet) कुछ दिनों से काफी चर्चा में है। लेकिन बहुत से लोगों को पता नहीं कि यह आमतौर पर उन बच्चों को दी जाती है जिन्हें मिरगी या एपलेप्सी (epilepsy) की समस्या है। कम कार्बोहाइड्रेट वाली यह डायट झटपट वजन कम करने के लिए फायदेमंद मानी जाती है। लेकिन लोगों को पता नहीं कि इसे बहुत सवधानी से फॉलो करना पड़ता है। इसके अपने फायदे और नुकसान हैं। जहां इसके फायदे आसानी से दिख जाते हैं वहीं नुकसान के बारे में किसी को जानकारी नहीं। अगर ठीक तरीके से इसे फॉलो नहीं किया तो यह ख़तरनाक हो सकती है।
किटो डायट केवल एक्सपर्ट की देखरेख में कुछ समय तक ही करनी चाहिए। इसी तरह यह डायट शुरू करने से पहले भी डायट में कुछ बदलाव करने पड़ते हैं। यतीश राजू नामक एक युवा जो फिटनेस के लिए काफी फिक्रमंद है , उनके साथ हाल ही में कुछ ऐसा हुआ जिसे वह बहुत बुरा अनुभव कहते हैं। यतीश ने तेज़ वेटलॉस पाने की उम्मीद से इस डायट की शुरुआत की थी।
यह है यतीश की कहानी
यतीश हमेशा से फिटनेस को लेकर सजग थे। इसलिए कॉलेज ख़त्म होने के बाद यतीश ने जिम ज्वाइन किया। यतीश का कहना है कि मैं जिम गया और अपना नाम लिखवा लिया। मैंने पर्सनल ट्रेनर के लिए ज़्यादा पैसे भी दिए।मेरा दिन शुरू होता था सुबह 10 बजे से और मैं घर पहुंचता था रात 9.15 बजे और जिम जाता था रात 9.30 बजे। मैंने फेसबुक पर कुछ हेल्थ और फिटनेस ग्रुप भी ज्वाइन कर लिए। साथ ही ऑनलाइन ऐसे तमाम काम किए जिनसे मैं अपने इस नए फिटनेस प्लान को कम्पलीट करने के लिए प्रोत्साहित होता रहूं। मुझे लगने लगा था कि मैं सही राह पर चल रहा हूं और जल्द ही अपना लक्ष्य प्राप्त कर लूंगा।
किटो डायट के बारे में यतीश को पता कैसे चला?
समय के साथ कसरत के लिए यतीश का प्यार और फिट बनने की चाहत बढ़ती रही। यतीश कहते हैं मुझे धीरे-धीरे महसूस होने लगा कि जिम मेरी ज़िन्दगी का एक अहम् हिस्सा बन गया है। फिटनेस मुझे रोमांचित करने लगी। अब तो मैं ज़्यादातर समय दूसरों से भी फिटनेस से जुड़ी बातें करता रहता था। मैं कई घंटों तक वर्कआउट के बारे में आर्टिकल्स पढ़ता रहता था। मैं इस नए बदलाव से काफी खुश था। अपने रिसर्च के दौरान यतीश को किटो डायट के बारे में पता चला। यतीश यह देखकर हैरान था कि किस तरह 2 महीनों में ही किटो डायट करनेवाले लोगों के शरीर में बहुत बड़ा परिवर्तन आ गया।उत्सुकतावश मैं किटो डायट के बारे में और भी अधिक पढ़ने लगा। यह और कुछ नहीं बल्कि बड़े हो आसान तरीके से शरीर से कार्बोहाइड्रेट और फैट का निष्कासन है।
यतीश का किटो डायट प्लान
यतीश ने अपने बीएमआर और कैलोरी काउंट की जांच करायी। मैंने अपनी किटो डायट की तैयारी शुरू कर दी जिसमें 90% फैट, प्रोटीन और बहुत कम कार्बोहाइड्रेट था। मैंने बिलकुल भी कार्ब नहीं खाया।
यतीश की किटो डायट के पहले पांच दिन ऐसे रहे-
पहला दिन- सब ठीक ही था। मैं वेट लॉस के लिए इतना उत्साहित था की खाने-पीने से जुड़े बदलावों पर ध्यान ही नहीं गया।
दूसरा दिन- मैं थोड़ा थक गया था पर मुझे लगा शायद ऐसा होता है।साथ ही सुस्ती और सरदर्द भी महसूस होने लगा।
तीसरा और चौथा दिन- मुझे पता चला कि एक किलो वजन पहले से ही कम हो गया है मैं बहुत खुश था।
पांचवा दिन- मैं दफ्तर से घर आ रहा था तभी मैंने महसूस किया कि मेरी बायीं आंख से मुझे सबकुछ धुंधला-सा दिख रहा है। मैंने ध्यान नहीं दिया। थोड़ी देर बार मैं किसी तरह अपनी सोसाइटी तक पहुंचा लेकिन तभी दाहिनी आंख से भी कम दिखने लगा। लेकिन जब मैं सीढ़ियां चढ़ने लगा तो मैं गिर पड़ा। उसके बाद मैंने सीधे अस्पताल मैं आंखें खोली। जहां मेरे शरीर में सलाइन चढ़ाया जा रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मेरे सर पर पत्थर रख दिया हो। मैं इसका कारण समझ गया। मुझे समझ आ गयी कि किस तरह डायट में अचानक से बदलाव करने से मैंने अपने शरीर पर अत्याचार किया है।
मुझे अंदाज़ा हो गया मेरा शरीर बिना कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट के साथ तालमेल नहीं बिठा सकता और मुझे इस डायट को शुरु करने से पहले किसी डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए थी।
ऐसा लग रहा था जैसी पांचवीं कक्षा का बच्चा दसवीं की परीक्षा दे रहा हो। यहां हम किटो डायट को ग़लत या सही नहीं कह सकते, लेकिन ग़लती हुई बिना सोचे समझे उसे शुरु करने की। मैंने पहले किसी डॉक्टर से बात नहीं की। हर किसी का शरीर एक ही चीज़ के लिए अलग-अलग तरीके से प्रतिक्रिया देता है। इसलिए सबसे पहले हमें अपने शरीर को समझने की कोशिश करनी चाहिए। अपनी शारीरिक क्षमता पता होनी चाहिए सभी को। सौ बातों की एक बात यही है कि कोई भी नयी डायट शुरु करने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर बात कर लेनी चाहिए।
अब यतीश की डायट ऐसी है।
यतीश ने इस बुरे अनुभव के बाद एक संतुलित और हेल्दी डायट अपनायी है जिसका वह ईमानदारी से पालन करते हैं। लाज़मी है कि उनका वज़न उतनी तेज़ी से नहीं घटा जिसकी उन्हें उम्मीद थी। लेकिन वह पहले से अधिक हेल्दी और फिट महसूस कर रहे हैं। यतीश के साथ जो भी हुआ उसे ध्यान में रखते हुए यही कहा जा सकता है कि किसी भी प्रकार के फिटनेस या डायट प्लान को शुरु करने से पहले अपने डॉक्टर से बात ज़रूर कर लें। विशेषकर अगर उस डायट प्लान में से किसी पोषक तत्व की एक महत्वपूर्ण मात्रा कम करनी हो तो बिना डॉक्टरी सलाह के डायट शुरु करना ख़तरनाक हो सकता है।
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अनुवादक -Sadhna Tiwari
चित्र स्रोत- Yatish Raju