... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 1:51 PM IST
Read this in English
अनुवादक: Anoop Singh
पिछले कुछ समय से लोग अब सामान्य बटर की बजाय मार्जरिन का इस्तेमाल ज्यादा करने लगे हैं क्योंकि कई लोगों का मानना है कि मार्जरिन, बटर से ज्यादा हेल्दी होता है। मुख्य तौर पर मार्जरिन का इस्तेमाल कूकीज और केक बनाने के लिए ही किया जाता है लेकिन अब लोग घरों में पराठे और ब्रेड के साथ भी इसी का इस्तेमाल कर रहे हैं। जानी मानी न्यूट्रीशनिस्ट डॉ तेजेंदर कौर सरना यहाँ बटर और मार्जरिन दोनों के फायदे और नुकसान के बारे में बता रही हैं। पढ़ें: जानिये क्यों आपको बाज़ार से बटर नहीं खरीदना चाहिए
मार्जरिन वेजिटेबल ऑयल से बना हुआ होता है और इसमें अनसैचुरेटेड फैट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इसे ट्रांस फैटी एसिड और फ्री रेडिकल्स के साथ पैक किया जाता है जो अनसैचुरेटेड फैट के फायदे को और बढ़ा देते हैं। दूसरी तरफ बटर दूध से बनाई हुई एक नेचुरल चीज है। जहाँ मार्जरिन में ट्रांस फैटी एसिड होते हैं वहीँ बटर में सैचुरेटेड और पालीअनसैचुरेटेड फैट होता है। मार्जरिन में सिंथेटिक विटामिन होते हैं वहीँ बटर में एंटी-ऑक्सीडेंट और विटामिन ए होता है। बटर का कलर तो नेचुरल होता है लेकिन मार्जरिन में ख़ास रंग पाने के लिए ब्लीच और प्रिजरवेटिव का इस्तेमाल किया जाता है। बटर को बनाने में किसी तरह के प्रोसेस को नहीं अपनाया जाता है यह पूरी तरह से प्राकृतिक होता है वहीँ मार्जरिन को लम्बे समय तक सही बनाये रखने के लिए कई तरह के केमिकल और कलरिंग एजेंट का इस्तेमाल किया जाता है।
कितना सेवन करें: आप चाहे जितनी कैलोरी लेते हो लेकिन ऐसा माना जाता है कि पूरी कैलोरी का 20% फैट से ही हासिल होना चाहिए। शरीर को सुचारू रूप से चलने के लिए सैचुरेटेड फैट, ओमेगा-3 फैटी एसिड और ओमेगा-6 फैटी एसिड बहुत ज़रूरी होते हैं, इसलिए ज़रूरी है कि आप पर्याप्त मात्रा फैट के रूप में इन्हें हासिल करें। इसके अलावा फैट किसी भी रूप में हो वो शरीर के लिए नुकसानदायक ही होता है इसलिए चाहे मार्जरिन हो या बटर, हमेशा सीमित मात्रा में ही सेवन करें।
चित्र स्रोत: Shutterstock