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इस दिवाली किसी को ड्राई फ्रूट्स गिफ्ट करने से पहले जान ले ये ज़रूरी बातें

ख़राब और संक्रमित ड्राई फ्रूट्स आपकी तबियत भी ख़राब कर सकते हैं !

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 2:34 PM IST

दिवाली का सीजन आते ही बाज़ार में हर तरफ खाने पीने वाली चीजों की बिक्री बढ़ जाती है। इनकी आकर्षक पैकेजिंग हर किसी को अच्छी लगती है और लोग इतने अलग अलग तरह की चीजें देखकर समझ नहीं पाते कि आखिर वे अपने परिचितों को क्या गिफ्ट करें। कुछ लोग मिठाइयों को अब गिफ्ट के रूप में देना इसलिए बंद कर दिए हैं क्योंकि आये दिन इनकी ख़राब क्वालिटी को लेकर अखबारों और न्यूज़ चैनलों में दिखाया जाता है। अब अधिकतर लोग इस त्यौहार पर एक दूसरे को ड्राई फ्रूट्स के पैकेट ही गिफ्ट करते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि दिवाली पर मिठाइयों की जगह ड्राई फ्रूट्स गिफ्ट करना क्या सच में फायदेमंद होता है?

ड्राई फ्रूट्स को कैसे प्रोसेस्ड किया जाता है:  ड्राई फ्रूट्स के अंतर्गत कई तरह के फल, नट्स और फलों के बीज आते हैं इन सबको ही ड्राई फ्रूट्स के नाम से बेचा जाता है। इनमें उपस्थित पानी को निकालने और इनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए ड्राई फ्रूट्स को या तो धूप में सुखाया जाता है या फिर किसी प्रोसेसिंग प्लांट में अत्याधुनिक ड्रायर और एयर स्प्रे की मदद से सुखाया जाता है। फ्रीज़र में सुखाये हुए ड्राई फ्रूट्स की क्वालिटी बाकी अन्य तरीको से प्रोस्सेड किये गये ड्राई फ्रूट्स की तुलना में काफी बेहतर होती है।

ड्राई फ्रूट्स से होने वाले फायदे: कई डॉक्टर और न्यूट्रीशनिस्ट भी रोजाना ड्राई फ्रूट्स का सेवन करने की सलाह देते हैं क्योंकि इससे शरीर को कई तरह के फायदे होते हैं। सबसे अच्छी बात तो यह है कि सारे ड्राई फ्रूट्स खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं जिस कारण अधिकांश लोगों को इसे खाने में कोई दिक्कत नहीं होती है। इनमे प्रोटीन, विटामिन, मिनरल, एंटी-ऑक्सीडेंट  और डाइटरी फाइबर की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। काजू में मोनो सैचुरेटेड फैटी एसिड, पिस्ता में ओमेगा-3 फैटी एसिड और बादाम, अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड की प्रचुर मात्रा होती है। ये फैटी एसिड शरीर में ख़राब कोलेस्ट्रॉल (LDL) की मात्रा को कम करते हैं और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) का लेवल बढ़ाने में मदद करते हैं। किशमिश, बादाम और ऐप्रकाट का सेवन आपको एनीमिया से बचाता है। नट्स में ग्लाईसेमिक इंडेक्स भी काफी कम होता है जिससे ये वजन कम करने और टाइप-2 डायबिटीज को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं।

इन्ही सब फायदों की वजह से आजकल त्योहारों के सीजन में ड्राई फ्रूट्स की धूम रहती है लेकिन इन्हें खरीदते और खाते समय कुछ बातों का ज़रूर ध्यान रखें। क्योंकि बाज़ार में इनकी बढ़ती मांग के कारण कई लोग इन्हें सही तरीके से प्रोस्सेड नहीं करते हैं और खाद्य सुरक्षा के नियमों और मानकों का पालन नहीं करते हैं। इस वजह से इनके संक्रमित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।

ड्राई फ्रूट्स से होने वाले नुकसान : कुछ लोगों ऐसे भी है जो ड्राई फ्रूट्स के फायदों को पढ़कर इनकी बहुत अधिक मात्रा का सेवन करने लगते हैं जो कि गलत है क्योंकि प्रोसेसिंग के दौरान फैट, शुगर सिरप, केन शुगर और नमक का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इनका अधिक सेवन आपको हाइपरटेंशन और दिल से जुड़ी बीमारियों का शिकार भी बना सकता है। अगर ड्राई फ्रूट में सल्फर डाइऑक्साइड या नमक या शुगर का इस्तेमाल ज्यादा हो तो ऐसे ड्राई फ्रूट का सेवन बच्चों के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए सीमित मात्रा में इसका सेवन करें।

पैकेजिंग : ड्राई फ्रूट्स को खरीदते समय कुछ बातों का ख़ास ध्यान रखें जैसे कि कभी भी बिना पैकेट वाले ड्राई फ्रूट्स या नट्स को न खरीदें क्योंकि खुले हुए ड्राई फ्रूट्स में संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। इसके अलावा आप ड्राई फ्रूट्स के रंगों पर भी ध्यान दें अगर उनका रंग बदल गया है तो समझ लें कि ड्राई फ्रूट्स ख़राब हो चुका है। अंजीर, एप्रिकोट (Apricots) या सूखा आलूबुखारा (Prunes) अगर खाते समय कठोर लगें तो समझ लें कि वे ख़राब हो चुके हैं। अगर ड्राई फ्रूट्स में से किसी तरह की महक भी आ रही है तो भी उसे न खरीदें। बाज़ार में उपलब्ध ड्राई फ्रूट्स के पैकेट पर किसी तरह की एक्सपायरी डेट नहीं होती है जिससे कई लोग यह समझ बैठते हैं कि ड्राई फ्रूट्स कभी ख़राब ही नहीं होते हैं जबकि ऐसा नहीं हैं हालाँकि इनकी शेल्फ लाइफ काफी ज्यादा होती है लेकिन एक खास समय सीमा के बाद ये भी ख़राब हो जाते हैं। इसलिए खरीदते समय पैकेट पर एफएसएसएआई(FSSAI) का लोगो और लाइसेंस नंबर की जांच ज़रूर कर लें फिर खरीदें।

( यह आर्टिकल डॉ सौरभ अरोरा द्वारा लिखा गया है जिन्होने फार्मास्यूटिकल की डिग्री जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी से फार्मास्यूटिकल में डाक्टरेट की उपाधि ली है और हाल ही में उन्होंने फ़ूड सेफ्टी हेल्पलाइन (www.foodsafetyhelpline.com) नामक वेबसाइट भी शुरू की है जिसमें वे खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और उसके रखरखाव से सम्बंधित तमाम जानकारियां साझा करते रहते हैं। )

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अनुवादक: Anoop Singh

चित्र स्रोत: Shutterstock