जानिए कैसे करते हैं मूर्धासन और इसके फायदे

तनाव, चिंता और अवसाद दूर करने व रीढ़ को मजबूत करने के लिए जरूर करें ये आसन

WrittenBy

Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 2:35 PM IST

मूर्धासन (crown-based pose) एक स्टैंडिंग योग पोज़ है जिससे आपकी लोअर बॉडी पर काम होता है। नियमित रूप से इस आसन को करने से आपको एंटी-एजिंग बेनेफिट्स मिलते हैं यानि आप हमेशा यंग नजर आते हैं। इतना ही नहीं इस आसन को करने से आपका इम्युनिटी सिस्टम मजबूत होता है और आपकी रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। इसके अलावा रोजाना इस आसन को करने से महिलाओं और पुरुषों में हार्मोनल असंतुलन को रोकने में मदद मिलती है। विशाखापट्टनम स्तिथ डिफेंस वेलफेयर एसोसिएशन में ट्रेनर योग एक्सपर्ट महुआ देब आपको इस आसन को करने का सही तरीका और इससे मिलने वाले फायदों के बारे में बता रहे हैं।

इस आसन के फायदे

इस आसन को करने से सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि इससे आपकी स्पाइन को स्ट्रेच मिलता है जिससे आप फिट रहते हैं और आपको स्पाइन से जुड़ी परेशानियों से बचने में मदद मिलती है। इससे आपकी बैलेंसिंग स्किल में सुधार होता है और फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है। इतना ही नहीं इससे आपके स्पाइन व आर्म्स सहित हैमस्ट्रिंग और कमर वाले हिस्से को स्ट्रेच मिलता है। इस आसन से अग्न्याशय, जिगर और गुर्दे से स्राव को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इस आसन से तंत्रिका तंत्र में सुधार होता है जिससे तनाव, चिंता और अवसाद से लड़ने में मदद मिलती है। इससे गर्दन की मांसपेशियों को भी मजबूत बनाया जा सकता है और मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह भी बढ़ता है।

ऐसे करें यह आसन

  • अपने पैरों को संतुलन खोए बिना जितना संभव हो उतना खोलकर खड़े हो जाएं।
  • अब सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर उठाएं और सांस छोड़ते हुए आगे की तरफ झुकें।
  • अपनी कोहनी को जमीन पर टच करें और अपने सिर को कोहनियों के बीच रखें। अगर आप संतुलन बना लेते हैं, तो जमीन से अपनी कोहनियों को उठा लें और हाथ को पीछे ले जाकर उंगलियों को बंद कर लें।
  • इस मुद्रा में 30 सेकेंड या एक मिनट तक रहें।

इस बात का रखें ध्यान

अगर आप अस्थमा, ब्लड प्रेशर या स्लिप डिस्क से पीड़ित हैं, तो आपको इस आसन को करने से बचना चाहिए।

Read this in English

अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Shutterstock

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source