जन्माष्टमी व्रत रेसिपी: तिल की खीर

जानिए क्या होते हैं नियम निर्जला और फलाहार व्रत के।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : January 5, 2017 2:45 PM IST

जन्माष्टमी हिंदुओं के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। यह भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष के आठवें दिन होता है।  इस दिन लोग अपने प्रिय श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं। भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और मध्यरात्री श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा-पाठ करके अपना व्रत तोड़ते हैं।

मुख्यत:इस दिन दो प्रकार के व्रत रखे जाते हैं और दोनों का अपना महत्व है। क्या है इस व्रत की अहमियत और उनका तरीका यही बताया हमें मुंबई के पंडित अजय गिरी ने।

निर्जल व्रत

जन्माष्टमी के दिन कई भक्त निर्जल व्रत करते हैं। इस प्रकार के व्रत में न तो कुछ खाया जाता है और न ही पानी या कोई तरल पदार्थ का सेवन किया जाता है। भक्त पूरे दिन प्रभु श्रीकृष्ण का नाम  जपते हैं और उनका ध्यान करते हैं। ऐसी मान्यता है कि अन्न और जल का त्याग करके वे भगवान के समीप हो सकते हैं। साथ ही उनका यह भी कहना है कि भोजन औऱ पानी का त्याग ही वो सबसे बड़ा त्याग है जो वे अपनी इच्छाओं की पूर्ति के बदले भगवान को अर्पण कर सकते हैं। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मध्यरात्रि श्रीकृष्ण के जन्म के बाद आरंभ होता है। जहां पूजा-पाठ के बाद भक्त निर्जल व्रत समाप्त कर सकते हैं।

पंडित अजय गिरी के अनुसार, जन्माष्टमी का व्रत भक्तों के मन से असहायता की भावना खत्म करके उन्हें सक्षम और आत्मविश्वासी बनाता है।

फलाहार व्रत

ऐसे लोग जो बिना पानी (निर्जल) का व्रत नहीं रख पाते उन्हें फलाहार व्रत की सलाह दी जाती है। यह व्रत निर्जल व्रत से थोड़ा आसान होता है क्योंकि व्रत रखनेवाला व्यक्ति दूध और फल खा सकता है। हालांकि ऐसा कहा जाता है कि जन्माष्टमी के दिन नमक और अनाज नहीं खाना चाहिए।

लोग चाहे निर्जला व्रत रखें या फलाहार। सभी का मकसद केवल ईश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करना है। भक्त इस दिन भजन-कीर्तन और श्रीमदभगवद गीता का पाठ कर प्रभु श्रीकृष्ण की भक्ति करते हैं।

प्रसाद

श्रीकृष्ण को माखनचोर कहा जाता है इसलिए प्रसाद के लिए दूध, शक्कर और घी से बनी चीजें चढ़ाई जाती हैं। कई घरों में तिल की खीर, श्रीखंड, पेड़े और कलाकंद जैसी मिठाइयां बनाई जाती हैं। नोएडा की करूणा रस्तोगी बता रही हैं एक मीठी-सी रेसीपी जिसे आप इस जन्माष्टमी प्रसाद के लिए तैयार कर सकती हैं और दिन में फलाहार के साथ इसे खाया भी जा सकता है।

Til ki Kheer Hindi

तिल की खीर

सामग्री

  • 100 ग्राम सूखा नारियल
  • 100 ग्राम सफेद तिल
  • 40 ग्राम गुड़
  • 6-7 किशमिश
  • 4-5 काजू
  • 4-5 इलायची
  • 200 ग्राम खोया( मावा)
  • 1 लीटर दूध

विधि

  • तिल को कड़ाही में बिना तेल या घी के सूखा भूनें। फिर इसे आंच से उतारकर दरदरा पीस लें।
  • एक बर्तन में दूध उबालें। 10 मिनट तक पकाएं और ज़रूरत के हिसाब से चम्मच से हिलाते रहें।
  • अब दूध में गुड़ मिलाएं। अच्छी तरह मिलाएं और 10 मिनट तक पकने दें।
  • इलायची को कूटकर दूध में मिलाएं।
  • अब इस मिश्रण में गुड़ डाल दें।
  • भूना हुआ तिल और नारियल (कसा हुआ) डालें।
  • सबकुछ अच्छी तरह मिलाकर 10 मिनट तक पकने दें।
  • काजू और किशमिश से सजाएं।

इस मीठे से प्रसाद के साथ करें श्रीकृष्ण की पूजा और प्राप्त करें उनसे ढ़ेर सारा आशीर्वाद। जन्माष्टमी की शुभकामनाएं।

(प्रस्तुत इमेज मूल वर्णन पर आधारित कल्पित प्रतिरूप है।)

चित्र स्रोत- Shutterstock.


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