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आप जिम जाते हैं? जानिये प्रोटीन सप्लीमेंट से जुड़ी तमाम जानकारियां

जानिये प्रोटीन कौन, कब और कितना ले सकता है?

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अनुवादक – Usman Khan

आजकल प्रोटीन सप्लीमेंट का बहुत प्रचलन है। जिम जाने वाले अधिकतर लोग सप्लीमेंट ले रहे हैं। लेकिन कुछ लोगों को इसे लेकर भ्रम है। हालांकि कुछ जिम ट्रेनर इसकी सलाह देते हैं। सवाल ये उठता है कि क्या पहली बार जिम जॉइन करने वाले व्यक्ति को भी सप्लीमेंट की आवश्यकता होती है? खैर, हम आपको अपने इस अर्टिकल में सप्लीमेंट से जुड़ी तमाम जानकारियां दे रहे हैं। इसे पढ़ने के बाद सप्लीमेंट से जुड़े आपके सारे भ्रम दूर हो जायेंगे। पढ़ें- व्हे प्रोटीन के साइड इफ़ेक्ट

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प्रोटीन की किसे ज़रूरत होती है

प्रोटीन बॉडी निर्माण के लिए ज़रूरी होता है। एक सामान्य व्यक्ति को रोजाना 1 ग्राम/किलो बॉडी वेट प्रोटीन जबकि स्पोर्ट्सपर्सन को 1.2-1.5 ग्राम/किलो की आवश्यकता हो सकती है। इतना प्रोटीन आपको रोजाना की खुराक से नहीं मिल पाता है, इसलिए सप्लीमेंट की ज़रुरत होती है। इसे पचाना आसान है और ये पाउडर, बार, मील रिप्लेसमेंट आदि के रूप में मिलता है। आप इसे अपने ट्रेनर की सलाह पर ले सकते हैं। पढ़ें- बिना सप्लीमेंट लिये वजन कैसे बढ़ाएं !

  • ऐसे लोग जिन्हें अपने दैनिक आहार से आवश्यक प्रोटीन नहीं मिल पाता है, वो लोग प्रोटीन सप्लीमेंट ले सकते हैं।
  • जिम जाने वाले, विशेषकर वजन उठाने वाले लोगों को प्रोटीन सप्लीमेंट से फायदा होता है। इससे उन्हें टूटी मांसपेशियों को ठीक करने में मदद मिलती है।
  • वेटलिफ्टिंग, बॉडीबिल्डिंग आदि करने वाले लोग प्रोटीन ले सकते हैं। वास्तव में ऐसे लोगों को प्रोटीन के साथ- सभी आवश्यक पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है।
  • चोटिल खिलाड़ियों को अधिक प्रोटीन की जरूरत है, इससे उन्हें चोट से उबरने में मदद मिलती है।

कब और कितना प्रोटीन लें

बाहर काम करने वाले लोग बॉडी वेट के हिसाब से 1.2-1.5 प्रति किलो प्रोटीन ले सकते हैं। आईसीएमआर के अनुसार, प्रति किलो वजन के हिसाब से1 ग्राम प्रोटीन ले सकते हैं। इसे जूस, दूध और पानी के साथ लिया जाता है। अगर आप ज्यादा भारी काम करते हैं, तो आप दिन में तीन बार 25-30 ग्राम प्रोटीन ले सकते हैं। पढ़ें- बॉडी फैट घटाना है? खाएं कैल्शियम-विटामिन डी सप्लीमेंट

प्रोटीन की क्वालिटी कैसी हो

इसकी क्वालिटी बायोलॉजिकल वैल्यू के आधार पर मापी जाती है। प्रोटीन की बायोलॉजिकल वैल्यू शरीर द्वारा बेहतर तरीके से अवशोषित करने और इसे उपयोग करने के द्वारा मापी जाती है। इसका मतलब ये हुआ कि अगर बायोलॉजिकल वैल्यू ज्यादा है, तो इसमें दुबली मांसपेशियों के निर्माण की क्षमता अधिक होती है।

ये तीन फॉर्म में आता है

प्रोटीन कंसन्ट्रेट- ये सस्ता होता है और इसमें प्रोटीन की मात्रा 29 से 89 फ़ीसदी होती है और बाकी कार्बोहाइड्रेट, वसा, खनिज और पानी होता है।

प्रोटीन आइसोलेट- इसमें कम फैट, कार्बोहाइड्रेट कम होता है। ये खाद्य पदार्थों का एक सूखा मिश्रण होता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा 95-98 फीसदी होती है।

प्रोटीन हाइड्रोलीसेट- ये प्री-डाइजेस्ट प्रोटीन आइसोलेट है, जिसे शरीर द्वारा तेजी से इस्तेमाल किया जा सकता है।

प्रोटीन के प्रकार

1. व्हे प्रोटीन

ये जिम करने वालों के लिए बहुत ज़रूरी है। इसमें 90 फीसदी प्रोटीन होता है। इससे आपको भरपूर ऊर्जा मिलती है और ये बॉडी को आवश्यक प्रोटीन प्रदान करता है। इसमें ब्रांचड चेन एमिनो एसिड ज्यादा होता है। इसमें ल्यूसिन (Leucine) होता है, जो क्षतिग्रस्त मांसपेशियों की मरम्मत में मदद करता है। ये जल्दी से पच जाता है। ये आमतौर पर कंसन्ट्रेट, आइसोलेट और हाइड्रोलीसेट आदि जैसे विभिन्न प्रकार में आता है।

2. सोया प्रोटीन

ये सोयाबीन से प्राप्त होता है। इसका टेस्ट अच्छा नहीं होता और पानी में कम घुलनशील होता है। सोया प्रोटीन में मौजूद (Phytoestrogens) से टेस्टोस्टेरोन में कमी और महिला सेक्स हार्मोन एस्ट्रोजन में वृद्धि करने में मदद मिली है। इसमें अर्गीनाइन और ग्लूटेमाइन जैसे अमीनो एसिड की मात्रा अधिक होती है। इससे उपचय वृद्धि (anabolic growth) हार्मोन के स्राव को उत्तेजित करने, मांसपेशी टूटने को रोककर मांसपेशियों को बनाए रखने में मदद मिलती है। सोया प्रोटीन में वसा और कोलेस्ट्रॉल में कम होता है और दिल के लिए भी अच्छा होता है। सोया प्रोटीन सोया प्रोटीन आइसोलेट, सोया फ्लौर, सोया मिल्क आदि रूप में उपलब्ध है।

3. कैसिइन प्रोटीन

कैसिइन एक कैल्शियम युक्त दूध प्रोटीन है, जो मांसपेशियों टूटने कम कर देता है और परोक्ष रूप से मांसपेशियों का निर्माण करने में मदद करता है। इसमें कैसिइन प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। कैसिइन एक धीमी गति से पचने वाला प्रोटीन होता है और कई घंटे की अवधि में अमीनो एसिड के रिलीज के साथ लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करता है।

4. एग प्रोटीन- एग प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। ये प्रोटीन पाउडर फॉर्म में आता है। इसकी बायोलॉजिकल वैल्यू भी सबसे अधिक होती है। इसमें कम वसा और कार्बोहाइड्रेट और कोलेस्ट्रॉल होता है। इसे पचाना आसान है और धीरे-धीरे ऊर्जा मिलती है।

5. पी प्रोटीन- एक सब्जी वाला प्रोटीन है जो पी यानि मटर से बनता है। इससे किसी तरह की एलर्जी का खतरा कम होता है। इसमें ब्रांच एमिनो एसिड सहित सभी आवश्यक अमीनो एसिड होते हैं। इसे पचाना आसान है। इसे वर्कआउट से पहले और बाद में खा सकते हैं।

6. राइस प्रोटीन- इसे ब्राउन राइस से बनाया जाता है। ये अन्य प्रोटीन की तुलना में ज्यादा देरी से पचता है। इसमें सिस्टीन और मेथियोनाइन की मात्रा अधिक होती है।

7. हेम्प प्रोटीन- ये हेम्प यानि सन बीज से बना होता है। ये एक हाई फाइबर प्रोटीन होता है, जिसमें ओमेगा फैटी एसिड और मैग्नीशियम, आयरन, जिंक और पोटेशियम जैसे खनिजों की मात्रा भी अधिक होती है। इसे पचाना भी आसान है।

आप ये प्रोटीन प्रोडक्ट ले सकते हैं

1. वेगन और वेजीटेरियन

वेजीटेरियन सोया और व्हे प्रोटीन ले सकते हैं। इनमें कम वसा और जीरो कोलेस्ट्रॉल होता है। पी प्रोटीन भी अच्छा विकल्प है। वेगन राइस और पी प्रोटीन ले सकते हैं। इनमें अमीनो एसिड उसी तरह होता है जैसे व्हे प्रोटीन में होता है।

2. लैक्टोज या ग्लूटेन इंटोलरेंट

लैक्टोज इंटोलरेंट के साथ कोई व्यक्ति दूध से बने प्रोटीन सप्लीमेंट को पचाने में सक्षम नहीं होता है। इसलिए ऐसे लोगों को व्हे प्रोटीन यूज करना चाहिए, क्योंकि इसमें कार्बोहाइड्रेट होते हैं। जिन्हें दूध से एलर्जी है, उनके लिए एग प्रोटीन भी बहुत अच्छा विकल्प है। सोया, पी, राइस प्रोटीन भी ऐसे लोगों के लिए बेहतर है।

किस समय लें

अगर आप एथलीट हैं, तो आप दिन में कभी भी प्रोटीन ले सकते हैं। इससे मसल्स प्रोटीन ब्रेकडाउन कार्बोहाइड्रेट (MPB) बढ़ता है। कार्बोहाइड्रेट वाला प्रोटीन सुबह लेने से मसल्स प्रोटीन सिंथेसिस (MPS) बढ़ता है। ये दोनों वर्कआउट के बाद बढ़ते हैं। प्री और पोस्ट वर्कआउट सप्लीमेंट (MPB) कम करने और (MPS) बढ़ाते हैं। पोस्ट वर्कआउट के लिए व्हे प्रोटीन अच्छा विकल्प है। धीमी रफ़्तार से पचने वाले प्रोटीन (MPS) को रातभर हाई रखते हैं।

दुबले मसल्स के निर्माण के लिए

इसके लिए व्हे प्रोटीन अच्छा विकल्प है। इससे वर्कआउट के दौरान शरीर को तुरंत ऊर्जा आवश्यक प्रोटीन मिलता है। इसका सेवन कसरत के पहले और बाद में किया जाता है।

बॉडीबिल्डिंग हार्डग्रेनर्स

इसके लिए व्हे प्रोटीन बेहतर है क्योंकि इसमें क्रिएटिन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स की मात्रा अधिक होती है। इससे मसल्स गेन करने में मदद मिलती है। कई लोगों को काफी मेहनत के बाद भी मसल्स में कोई फर्क नहीं पड़ता है। ऐसे लोग हार्डगेनर की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में आपको बर्न करने से ज्यादा खाने की ज़रूरत होती है। वेट गेनर के सप्लीमेंट में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है। इसके लिए आपको प्रोटीन की भी सख्त ज़रूरत होती है। ऐसे में आप व्हे, कैसिइन या एग प्रोटीन ले सकते हैं।

आपके बजट में क्या आता है

व्हे प्रोटीन कई रूप में आता है और इसकी कीमत भी अधिक होती है। अगर आपका बजट सही है, तो आप ब्लेंडेड प्रोटीन सप्लीमेंट ले सकते हैं। ये तीन तरह का होता है। सोया प्रोटीन भी कई रूप में आता है और इसकी कीमत भी विभिन्न होती है।

मील रिप्लेसमेंट के लिए

हर तीन घंटे के अंतराल में खाने से आपकी बॉडी को फैट बर्न करने में मदद मिलती है। बॉडी को फुल रखने से ब्लड शुगर लेवल सही रखने, लालसा कम करने में मदद मिलती है। अगर आपको दिन में 6 बार खाने में परेशानी हो रही है, तो आप प्रोटीन को शेक के रूप में ले सकते हैं। इसमें शुगर, कार्बोहाइड्रेट, आवश्यक फैटी एसिड आदि होते हैं। इससे आपको कम कैलोरी और हाई प्रोटीन मिलता है। लेकिन इसका लंबे समय तक उपयोग करने से पाचन संबंधी विकार हो सकते हैं।

डायबिटीज के मरीजों के लिए

डायबिटीज के रोगी जीरो शुगर और कार्बोहाइड्रेट वाला प्रोटीन ले सकते हैं। इसके लिए ओबीक्योर (Obicure) प्रोडक्ट्स का उपयोग कर सकते हैं। इसमें हाई प्रोटीन, फाइबर व कम कैलोरी और फैट होता है। इसे डॉक्टर की सलाह पर लें।

महिलाओं के लिए

महिलाएं व्हे प्रोटीन ले सकती हैं। इसके अलावा प्री और पोस्टमेनोपॉज वाली महिलाओं के लिए सोया प्रोटीन भी अच्छा विकल्प है। क्योंकि इसमें प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है।

व्यस्त लोगों के लिए

अगर आपके पास इतना भी समय नहीं है प्रोटीन को दूध में मिक्स किया जाए, तो आप रेडी टू ड्रिंक प्रोटीन शेक ले सकते हैं। इसमें हाई प्रोटीन, कम कार्बोहाइड्रेट है और कुछ आवश्यक फैटी एसिड होते हैं। इससे आप फुल रहते हैं और उल्टा-सीधा खाने से बच जाते हैं और आपकी खाने की लालसा भी कम हो जाती है।

साइड इफ़ेक्ट

  • बिना उचित सलाह के प्रोटीन की अत्यधिक खपत से किडनी और अन्य अंगों पर प्रभाव पड़ सकता है।
  • व्हे प्रोटीन की अधिक खपत से किडनी स्टोन की समस्या हो सकती है

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