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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 12:14 PM IST
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अनुवादक : Anoop Singh
रोज सुबह की जल्दबाजी में आप ठीक से अपने नाश्ते का ध्यान नहीं रख पाते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि आप एक गिलासदूध में कुछ सेरेल मिलाकर खा लेते हैं और आप सोचते हैं कि आपके शरीर के लिये ज़रूरी पोषक तत्व आपने ले लिये हैं। लेकिन ऐसा नहीं है, जिस सेरेल को आप हेल्दी समझ रहे हैं वो केमिकल्स से भरा हुआ भी हो सकता है और कभी-कभी तो उसमें बिल्कुल भी पोषक तत्व नहीं होते हैं। जहाँ सारे रेडी-टू-ईट पैकेज्ड फ़ूड यह दावा करते हैं कि उनमें किसी भी तरह के प्रिजरवेटिव(Preservatives) का इस्तेमाल नहीं किया गया है और उनमे ट्रांस फैट भी बिलकुल नहीं है वहीँ जानी मानी न्यूट्रीशिनिस्ट प्रिया कठपाल बताती है कि,इन चीजों को बनाने में इस्तेमाल की गयी कई सामग्रियां आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
बिस्कुट : यह सबको पता है कि बिस्कुट शुगर, रिफाइंड आटे, नमक और दूध से बनते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रिफाइन आटा आपके ब्लड शुगर लेवल को अचानक से बढ़ा देता है। इसके अलावा बिस्कुट में मौजूद वेजिटेबल ऑयल की अधिक मात्रा आपके लिये और खतरनाक हो सकती है। वेजिटेबल ऑयल में बहुत अधिक मात्रा में फैट होता है जिससे आपको कई तरह की बीमारियाँ हो सकती हैं। कुकीज में इन्वर्ट सिरप होता है जोकि ग्लूकोज और फ्रूक्टोज का मिश्रण होता है। यह डायबिटीज़ के मरीजों के लिये बहुत नुकसानदायक है।
मूसली : हालांकि इसके पैकेट पर यह लिखा हुआ होता है कि इसमें बिलकुल भी शुगर नहीं है लेकिन इसमें मौजूद शुगर सिरप आपके शुगर लेवल को बढ़ा सकता है। इसलिए अगर आपका शुगर लेवल हमेशा बदलता रहता है तो शायद इसका कारण आपके नाश्ते में ली हुई मूसली ही है। मूसली के कई पैकेट्स में सोया लेसिथिन होता है जोकि सोयाबीन के तेल से बनता है। सोया लेसिथिन के कई दुष्प्रभाव भी है जैसे की कभी-कभी मिचली आना और चक्कर आना।
रेडी-टू-ईट भोजन : रेडी टू ईट मील्स में डिहाइड्रेटेड सब्जियां होती हैं जिनमें बिलकुल भी पोषक तत्व नहीं होते हैं। और जब आप इन्हें पकाने के लिये गर्म करते हैं तो जो थोड़े बहुत पोषक तत्व बचे भी होते हैं वो भी ख़त्म हो जाते हैं। और सबसे बुरी बात यह है कि इसमें प्रिजरवेटिव का इस्तेमाल किया जाता है इसलिए अगर आप इन्हें अक्सर खातें हैं तो आपकी किडनी और लीवर जल्दी ही खराब हो सकते हैं।
पैकेज्ड सूप : वैसे तो पैकेज्ड सूप सही होते हैं लेकिन इसमें कई तरह के रंग बढ़ाने वाले यौगिक होते हैं। ये कलरिंग एजेंट टॉक्सिक होते हैं और ये आपकी किडनी और लीवर को नुकसान पंहुचाते हैं। इससे लीवर पर अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है।
चित्र स्रोत : Shutterstock