आयुर्वेद में बताये वात, पित्त और कफ़ जैसे दोषों के लिए करें ये योगासन

अपने दोषों को ठीक से समझिये फिर उसी अनुसार योगासनों का चुनाव करें!

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 1:51 PM IST

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अनुवादक: Anoop Singh

योग और आयुर्वेद एक दुसरे से काफी हद तक जुड़े हुए हैं। योगा और आयुर्वेद दोनों ही वैदिक ग्रंथों से विकसित किये गये तरीके हैं। जहाँ योग की उत्पत्ति यजुर्वेद से हुई है वहीँ आयुर्वेद की उत्पत्ति अथर्ववेद और ऋग्वेद से हुई है। ये सभी पांच तत्वों (जल,अग्नि,वायु,धरती,और आकाश) और त्रिगुण (सत्व,राजस और तमस) के सिद्धांत पर आधारित हैं। आयुर्वेद में तीन प्रमुख दोषों के बारे में बताया गया है और शरीर पर खाने और दवाइयों के असर के बारे में भी बताया गया है। इन प्रमुख तीनो दोषों को योग आसनों से भी दूर किया जा सकता है। आर्ट ऑफ़ लिविंग के योगा टीचर ज्योति अग्रवाल इन दोषों के बारे में और उन्हें योग द्वारा दूर करने के बारे में बता रही हैं ।

वात : वात दोष वाले लोग दिमाग से तेज और क्रिएटिव होते हैं। इसमें हुए असंतुलन के कारण लोगों में अनिद्रा और एंग्जायटी के लक्षण ज्यादा पाये जाते हैं। ऐसे लोग जो इन समस्याओं से पीड़ित हों उन्हें स्थिर होकर करने वाले योगासन जैसे कि माउंटेन पोज, मुड़ने वाले आसन जैसे कि अर्ध मत्स्येन्द्रासन और शीर्षासन करने चाहिए। ये योग आसन आपको शांति प्रदान करते हैं और आपकी एंग्जायटी को कम करते हैं।

पित्त: पैशन, हिम्मत और उत्साह पित्त दोष के लक्षण होते हैं। इसमें हुए असंतुलन के कारण लोग गुस्से और प्रतियोगितात्मकता से परेशान रहते हैं। इनसे निजात पाने के लिए उस्त्रासन एंड धनुरासन जैसे योग आसन करने चाहिए। इस योग आसनों को करने से शरीर से उर्जा बाहर निकलती है और आपकी धैर्य रखने की क्षमता का विकास होता है।

कफ़: मजबूती, समर्पित और संतुलित रहना कफ़ के लक्षण हैं। इसमें हुए असंतुलन के कारण आपमें टाल मटोल करने की आदत और नीरसता आने लगती है। इससे निजात पाने के लिए ज़रूरी है की आप गहरी सांसों से सम्बंधित योगासन करें। इसलिए उत्साह बढ़ने और फोकस करने की क्षमता का विकास करने के लिए आप सूर्य नमस्कार और कपालभाति जैसे योगासन करें।

चित्र स्रोत: Shutterstock


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