क्रोंचासन या बगुला मुद्रा से कीजिए अपनी लोअर बॉडी को टोनअप

क्रोंचासन आपके शरीर के निचले भाग के लचीलेपन में सुधार के साथ आपके शरीर के कोर को मजबूत बनाती है।

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 2:35 PM IST

क्रोंचासन या सारस मुद्रा बैठकर की जानेवाली एक योगमुद्रा है जो हैमस्ट्रिंग और पिंडलियों पर प्रभाव डालती है। यह मुद्रा पेट फूलने और सूजन से राहत प्रदान करने के लिए जानी जाती है। यह आपके शरीर के निचले भाग के लचीलेपन में सुधार के साथ आपके शरीर के कोर को मजबूत बनाती है। शुरुआत में इस मुद्रा का अभ्यास किसी एक्सपर्ट की निगरानी में ही करनी चाहिए। योग एक्सपर्ट महुआ देब (ट्रेनर, डिफेंस वेलफेयर एसोसिएशन, विशाखापट्टनम अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी) बता रही हैं इस आसन के अभ्यास का सही तरीका और इसके ग़लत अभ्यास से होनेवाले दुष्परिणामों के बारे में।

अभ्यास का तरीका

1. अपने पैरों को सामने की ओर सीधा रखते हुए समस्थिति में बैठ जाएं।

2. ऐसा नहीं है कि इस आसन का अभ्यास करते समय आप स्थिर और पूरा ध्यान लगाकर बैठें।

3. अब अपने बाएं पैर को मोड़कर अपने हिप्स के नीचे ले जाएं। इस मुद्रा को अर्ध विरासन कहा जाता है।

4. अब अपने दाहिए घुटने को मोड़ें और दाहिने हाथ से पकड़ कर दाहिने पांव को जमीन से ऊपर उठाने की कोशिश करें।

5. अब बाएं हाथ को दाएं पैर के टखने के पीछे ले जाएं।

6. घुटने का भीतरी भाग कंधे तक पहुंचना चाहिए और पैर सिर से थोड़ा ऊपर होना चाहिए।

7. जितना संभव हो अपने पैर को अपने धड़ के उतना क़रीब ले जाएं।

8. इस मुद्रा में 30 सेकंड से 1 मिनट तक रहें और दूसरे पैर के साथ दोहराएं।

क्रोंचासन के फायदे

• इससे हैमस्ट्रिंग मसल्स की स्ट्रेचिंग होती है।

• पेट से जुड़े अंगों और दिल को उत्तेजित करता है।

• छाती क्षेत्र का विस्तार होता है।

पीरियड्स के दौरान इस योगसन का अभ्यास न करें। अगर आपको घुटनों या टखनो में कोई चोट लगी है तो इस आसन का अभ्यास न करें। अगर आपके घुटने में हल्का दर्द हो तो आप क्रोंचासन का अभ्यास कर सकते हैं लेकिन घुटने मोड़कर अर्ध विरासन न करें। इसकी बजाय आप जानू शीर्षासन की मदद लें और फिर इस मुद्रा का अभ्यास करें।

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अनुवादक -Sadhna Tiwari

चित्र स्रोत- Mahua Deb

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