अगर आप अक्सर पीठ और गर्दन में बेचैनी महसूस करते हैं तो आपको जात्रा परिवर्तनासन का अभ्यास करना चाहिए। इस आसन को करते समय पेट की मांसपेशियों पर ज्यादा असर पड़ता है। इससे आपके हिप्स व स्पाइन को स्ट्रेच मिलता है और ऐंठन से राहत मिलती है। इसके अलावा डीटोक्स के लिए भी ये बेहतर आसन है। योग एक्सपर्ट महुआ देब आपको इस आसन को करने का सही तरीका और फायदे बता रही हैं।
ऐसे करें यह आसन
आराम की मुद्रा में लेट जाएं, पैरों को एकसाथ रखें और कंधे ऊंचाई पर रखकर बाहें फैला लें। हथेलियों को नीचे जमीन पर रखें।
पैरों को ऊपर की तरफ धड़ के 90 डिग्री पर रखें और जब आपके पैर लेफ्ट साइड जाएं तो अपने सिर को राइट साइड ले जाएं।
लेफ्ट साइड पैरों को जमीन पर रखने के दौरान सांस लें और रीढ़ को लंबा रखें। इसके बाद कंधों को जमीन पर रखते हुए सांस छोड़ें।
इस पोजीशन में तीस सेकंड तक रहें और पैर व शरीर को बीच में लाएं और दोनों को राइट साइड ले जाएं और सिर को लेफ्ट साइड ले जाएं।
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इसी तरह दूसरी तरफ से भी करें।
इस आसन को करने का एक तरीका यह भी है
आराम से लेट जाएं और बाहों को कंधे की ऊंचाई की बगल में फैला लें, दोनों घुटनों को मोड़ लें और पैरों को जमीन पर रखें, हिप्स को उठाते समय घुटनों को सीने के पास लाएं।
घुटनों को लेफ्ट साइड ओर ले जाएं और उन्हें जमीन पर रखें और अपनी सिर को राइट साइड रखें।
इस पोजीशन में सांस लें और रीढ़ को लंबा करें और दोनों कंधों को जमीन पर रखते हुए सांस छोड़ें।
अब घुटनों को बीच में लाएं और पैरों जमीन पर रखें। दूसरी तरफ से अभी ऐसे ही करें।
इस आसन को करने से होते हैं ये लाभ
रीढ़ की हड्डी में लचीलापन और लोच आती है और लोअर बैक व हिप्स की कठोरता कम होती है।
पाचन बेहतर होता है, सर्कुलेशन बेहतर होता है और थकान व तनाव कम होता है।
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