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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 12:16 PM IST
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अनुवादक: Mousumi Dutta
प्राचीन काल से योगियों का मानना है कि आहार से सृष्टि को शक्ति मिलती है और उसी पर निर्भर होकर शरीर के कार्यकलाप का संचालन होता है। इसी संचालन पर शरीर का स्वस्थ और अस्वस्थ रहना निर्भर करता है। इसलिए सही आहार का ध्यान रखना स्वस्थ रहने के लिए ज़रूरी होता है। योगी आहार को शरीर के प्रभाव के आधार पर तीन भागों में विभाजित करते हैं – सत्व, राजस और तमस। उनका मानना है कि तामसिक भोजन करने से शरीर में आलस आता है वहीं राजसिक आहार का सेवन करने से शरीर को आराम की अनुभूति नहीं होती है। जबकि सात्विक भोजन करने से आप हल्का और ऊर्जा से भरपूर महसूस करेंगे। ये माना जाता है सात्विक आहार शुद्ध, स्वच्छ और पौष्टिकता से भरपूर होता है। गीता रमेश, ज्वाइंट मैनेजिंग डाइरेक्टर ऑफ कैराली आयुर्वेदिक ग्रूप एण्ड ऑथर ऑफ द आयुर्वेदिक कुकबुक में कहा है कि इस तरह का आहार खाने से न सिर्फ शरीर की प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेड और फैट की ज़रूरत पूर्ण होती बल्कि शरीर और मन को पूर्ण रूप से पौष्टिकता भी मिलता है।
अब बात करते हैं कि उपवास के बाद या ऐसे ही आम दिनों में सात्विक भोजन करना क्यों अच्छा होता है
गीता रमेश के कहे अनुसार सात्विक आहार को हजम करना बहुत आसान होता है क्योंकि ये बहुत ही हल्की प्रकृति की होती है। उपवास के बाद हमेशा ऐसा खाना खाना चाहिए जो आसानी से हजम हो जाय। सात्विक भोजन की अच्छी बात ये है कि ये आहार शीतल, ताजगी भरी और मन को शांत रखने वाली होती है। उनका कहना है कि ऐसा डायट लेने से मन शांत, सचेत और ताजगी से भरा रहता है। ऐसा आजार पेट को बहुत भाता है क्योंकि राजसिक डायट थोड़ा तीखा, खट्टा और नमकीन होता है जबकि तामसिक आहार बासी और स्वादहीन होता है।
परंपरागत सात्विक खाना क्या होता है
गीता का कहना है कि परंपरागत सात्विक खाना बहुत ही सामान्य और उर्वर भूमि से उत्पन्न हुआ होता है। ऐसे फूड्स देखने में बहुत ही आकर्षक होते हैं और इसको सही समय पर उपजाया जाता है। सात्विक फूड प्राकृतिक रूप से खाने योग्य बन कर तैयार होते हैं यानि इसमें किसी भी प्रकार के केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता है। सात्विक आहार में ऐसे आहार शामिल नहीं होते हैं जिनमें किसी पशु या पक्षी को मारकर या हानि पहुँचाकर लाया जाता है। फल, सब्ज़ी, होल ग्रेन और बादाम आदि सात्विक भोजन के अंतगर्त आते हैं जो मन और शरीर को शांती प्रदान करने की क्षमता रखते हैं। सात्विक भोजन पकाने के 3-4 घंटे के अंदर ही खा लेना चाहिए। पढ़े- उपवास में सेहतमंद रहने के लिए एक्सपर्ट की सलाह
सात्विक भोजन का स्वास्थ्यवर्द्धक गुण
आप ये जानकर आश्चर्य में पड़ जायेंगे कि सात्विक भोजन करने के बहुत सारे स्वास्थ्यवर्द्धक गुण है। आयुर्वेद के अनुसार, सात्विक आहार के सेवन से मानसिक शक्ति, शारीरिक स्वास्थ्य और जीवन अवधि को शक्ति मिलती है। ऐसे भोजन के सेवन से थकान, शांति और चित्त को अपार आनंद का अनुभव होता है। अगर आपको हाई बीपी या डाइबिटीज़ की बीमारी है तो सात्विक आहार आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है। इसके अलावा सात्विक भोजन करने से त्वचा के साथ बाल की क्वालिटी भी बेहतर हो जाती है।
याद रखें ये बातें
• गीता रमेश की सलाह है कि सात्विक भोजन अच्छी तरह से चबाकर और संतुलित मात्रा में सेवन करना चाहिए।
• कभी भी हद से ज्यादा मात्रा में सात्विक भोजन नहीं खाना चाहिए इससे वह तामसिक भोजन के रूप में परिवर्तित हो जाता है जो पाचन प्रणाली को नुकसान पहुँचा सकता है।
• इसके अलावा सात्विक आहार को ज्यादा मसाला देकर या ज्यादा पकायें नहीं। क्योंकि वह राजसिक भोजन का रूप धारण कर लेता है जो शरीर के बेचैनी का सबब बन सकता है।
इसलिए उपवास के बाद हमेशा सात्विक भोजन के सेवन की सलाह दी जाती है जिससे शरीर और मन दोनों को शांति और ऊर्जा दोनों मिल सके। इससे शरीर भी स्वस्थ रहेगा और पूजा का समापन भी अच्छी तरह से हो सकेगा।
चित्र स्रोत: Shutterstock