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Written By: Editorial Team | Updated : April 13, 2018 4:28 PM IST
योग हो या फिटनेस की अन्य गतिविधियां, उन्हें जितनी जल्दी शुरू किया जाए उतना ही बेहतर होता है-इससे आप बढ़ती उम्र के साथ चुस्त -दुरूस्त और आपका शरीर लचीला बना रहता है। लेकीन ज्यादातर लोगों की कहानी यही है कि फिटनेस की बात उनकी बाकी सभी प्राथमिकताओं के बाद सबसे निचले पायदान पर रहती है। इसलिए हमारे द्वारा किए गए अत्याचारों के कारण जब हमारे शरीर में बदलाव आने लगते हैं तो हम हैरान हो जाते हैं। ज्यादातर लोगों के लिए 40 साल के बाद की उम्र में उनका शरीर संकेत देना शुरु करता है, जो कभी-कभी घुटने के दर्द या पीठ में अकड़न के रूप में हो सकता है, ये सारी परेशानियां बताती हैं कि अब आपका शरीर आपका अत्याचार अब और नहीं सह सकता। लेकिन अभी भी बहुत देर नहीं हुई है, क्योंकि अगर आप 40 के दशक में भी अपनी सेहत सुधारना चाहें तो वह कर सकते हैं।
तो अगर आप 40 की उम्र पार कर चुके हैं और फिटनेस के लिए कोई ऐसी कसरत शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं जो आपको फिट बना सके, जोड़ों के दर्द को कम कर सके, मन-शरीर को संतुलित कर सके तो आपको योग करना चाहिए। हमने योग गुरु सर्वेश शशि (जो कि मुंबई के ज़ोरबा योग के संस्थापक हैं ) से बात की, और यह जानने की कोशिश की कि 40 की उम्र के बाद योगाभ्यास शुरु करने वालों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
शशि कहते हैं - 40 वर्ष तक की उम्र पर पहुंचने तक हम सभी अपने जीवन के लगभग हर क्षेत्र में स्थिरता की तलाश में लगे रहते हैं। हम अक्सर शुरुआती वर्षों में हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए कुछ भी नहीं करते हैं। कभी-कभी यह 40 के पहले या बीच में ही हानिकारक हो जाता है क्योंकि शरीर उम्र बढ़ने के साथ ही साथ कमजोर हो रहा होता है। वृद्धावस्था प्राकृतिक है, लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं हम कमज़ोर होते जाते हैं और बीमारियां हमें घेरना शुरू कर देती हैं, ऐसे में रोगों को रोकने के लिए योग का अभ्यास करना अच्छा हो सकता है।
40 की उम्र में कर रहे हैं योग की शुरूआत - किन बातों का रखना है ध्यान ?
सर्वेश: योग के माध्यम से स्वस्थ और बेहतर जीवन अनुभव के लिए आसन, प्राणायाम और क्रियाओं से भलीभांति अवगत होना चाहिए। 40 साल की उम्र में, आप योग के आभ्यास में सामान्य गलती नहीं कर सकते क्योंकि आप का एक गलत कदम आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यही कारण है कि आप अपनी समस्या विशेष जिस पर आपको काम करने की आवश्यकता होती है उसके लिए विशेषज्ञ के साथ योग परामर्श लेते हैं। आमतौर पर, इस उम्र में प्रतिरक्षा प्रणाली की कार्यक्षमता को बढ़ाने की ओर अधिक ध्यान देने के साथ ही साथ फेफड़े की कार्यक्षमता को बढ़ाना, मांसपेशी लचीलेपन पर ध्यान देना, तनाव पर काबू करने जैसे विषय पर विशेष ध्यान देना होता है।
एक स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली बीमारियों और रोगों को रोकने में मदद करती है। यदि आप किसी भी प्रकार की बीमारी या बीमारियों से पीड़ित हैं, तो यह तेजी से सुधार की शुरुआत भी करता है। प्राणायाम का अभ्यास आपके फेफड़ों को मजबूत और स्वस्थ बनाता है जो शरीर में अधिक ऑक्सीजन को सांस लेने में मदद करता है और शरीर में स्थिरता लाता है। शरीर का लचीलापन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शरीर को स्मूद बनाता है, जोड़ों को चुस्त और उन्हें किसी भी अचानक दूर्घटना से बचाता है। सही आसन का नियमित अभ्यास शरीर की मजबूती को बढ़ाता है और की शक्ति और धीरज को बढ़ावा देने में मदद करता है।
कौन से एहतियात लेने की जरूरत होती है - जैसे कौन से आसन या पोजिशन से बचना चाहिए ?
सर्वेश: एक व्यक्ति जो 40 वर्ष की उम्र में है, उसे याद रखना चाहिए कि मन की स्थिरता, बेहतर प्रतिरक्षा प्रणाली, लचीला शरीर, स्वस्थ आंतरिक अंग और बेहतर शरीर की ताकत प्राथमिकता हो। बहुत ज्यादा कुछ भी अच्छा नहीं होता है, इसलिए आसन की आधिकता कभी भी मदद नहीं करेगा। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि आपके लक्ष्य क्या हैं और अभ्यास की नियमितता इसे प्राप्त करने में सहायता करती है। लेकिन जैसे ही आप योग शुरू करते हैं, वैसे ही होने वाले बदलावों पर ध्यान में रखना जरूरी है, ताकि आप उन पर अावश्यक सुधार कर सकें। जब आप देर से शुरू करते हैं तो एक समय में एक कदम की तर्ज पे आपको धिरे-धिरे अपने अभ्यास को निरंतरता के साथ आगे बढ़ाना होता है।
क्या 40 वर्ष की उम्र हो जाने पर भी योग लाभदायक है ?
सर्वेश कहते हैं कि," 40 की उम्र के बाद योग अभ्यास आपको डायबिटीज़, अनिद्रा, तनाव, शरीर में दर्द, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर जैसी और भी कई समस्याओं से दूर रहने में चमत्कारिक रूप से मदद करता है। योग से आपकी अपेक्षा यथार्थवादी होनी चाहिए; आपको जीवन के विभिन्न पहलुओं में से मानसिक और शारीरिक लाभ के साथ-साथ निरंतरता के बीच सामंजस्य पर अधिक ध्यान देना चाहिए। सामान्य चलन की प्रतिस्पर्धा से बचें, लोगों को अपने फिटनेस स्तर को स्थापित करने के लिए और स्वास्थ्य और आंतरिक शांति के प्रति जागरूक रहना चाहिए; क्योंकि आप ही हैं जो वास्तव में अपनी समस्याओं को समझ सकते हैं और पहचान सकते हैं कि किस समस्या को दूर करने की ज़रूरत है और यह जान पाते हैं कि योग की मदद से किस विशेष पहलू पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है।
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अनुवादक: Akhilesh Dwivedi.
चित्रस्रोत: Shutterstock.