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Managing Diabetes With Excerise: डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो आजीवन रहती है और किसी भी बीमारी के साथ जीना आसान नहीं होता। टाइप 2 डायबिटीज के साथ भी जीवन बिताना इसके मरीजों के लिए आसान नहीं होता। हालंकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आप एक हेल्दी और एक्टिव लाइफ नही जी सकते। एक्टिव रहना और एक्सरसाइज करना टाइप 2 डायबिटीज को मैनेज (Managing type 2 diabetes) करने का सबसे असरदार तरीका भी माना जाता है। डॉ. महेश ( Dr. Mahesh D M, Consultant – Endocrinology, Aster CMI Hospital, Bangalore) का कहना है कि फिजिकली एक्टिव रहकर डायबिटीज के मरीज अपनी स्थिति को अच्छी तरह मैनेज कर सकते हैं। रोजमर्रा के जीवन में एक्टिव रहने और एक्सरसाइज करने के फायदे और इसके प्रभाव के बारे में जानने के लिए पढ़ें यह लेख।
डॉ. महेश के अनुसार, रोजाना एक्सरसाइज करने से ना केवल ब्लड शुगर लेवल मैनेज करने में आसानी होती है बल्कि, इससे इंसुलिन सेसिटिविटी भी बेहतर होती है जब आप एक्सरसाइज करते हैं तो शरीर में जमा ग्लूकोज लेवल कम होता है। यह वही ग्लूकोज है जिसका इस्तेमाल मसल्स एनर्जी के लिए करती हैं। एक्सरसाइज करने से वजन कम होता है और मोटापे को कंट्रोल करने से लेकर कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का रिस्क (risk of cardiovascular complications) भी कम होता है।
जर्नल ऑफ दि अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन ( Journal of the American Medical Association) में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित ऐसे लोग जो नियमित एक्सरसाइज करते हैं उनका एचबीए1सी लेवल ( HbA1c levels) लगभग 0.7% तक कम देखा गया। बता दें कि एचबी1एसी लेवल कम होने से लम्बे समय के लिए डायबिटीज को मैनेज करने में आसानी होती है।
किसी भी तरह का वर्कआउट प्लान बनाने या एक्सरसाइज करने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार आप अपने लिए सही और बेहतर एक्सरसाइज प्लान तैयार कर सकते हैं। अपनी पसंद और सुविधा के अनुसार आप वॉकिंग (Walking) , साइकिल चलाना (cycling), स्विमिंग (swimming) और डांसिंग जैसी अच्छी और मजेदार एक्सरसाइजेस चुन सकते हैं। ये सभी आपकी कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद हो सकती हैं।
वेट लिफ्टिग या रेजिस्टेंस बैंड का इस्तेमाल करने से मसल्स मास बढ़ता है मेटाबॉलिज्म भी तेज होता है। वहीं योग (Yoga) और ताई ची (tai chi) जैसी एक्सरसाइजेस करने से शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है और जोड़ों की सक्रियता या जॉइंट मोबिलिटी ( joint mobility) बढ़ती है। इससे आपको चोट लगने की संभावना (risk of injury) भी कम होती है।