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How to increase brain power
How to increase brain power : डिमेंशिया दिमाग से जुड़ी एक ऐसी न्यूरोडीजेनेरेटिव स्थिति है, जिसमें इंसान की सोचने-समझने की शक्ति प्रभावित हो जाती है। इससे, रोज़मर्रा के काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। आमतौर पर यह माना जाता है कि यह बुढ़ापे में खासकर 60 साल की उम्र के बाद होती है, लेकिन अब यह समस्या कम उम्र के लोगों में भी देखने को मिल रही है। एक हालिया स्टडी में पता चला कि पिछले तीन दशकों में 40 से 64 साल के लोगों में डिमेंशिया का खतरा दुनिया भर में दोगुना हो गया है। ऐसे में यह चिंता का विषय है, जो कम उम्र के लोगों को भी चपेट में ले सकता है।
ऐसे में यह बढ़ती हुई समस्या इस बात पर ज़ोर देती है कि हमें ऐसी आदतें अपनानी चाहिए, जो डिमेंशिया के खतरे को शुरू से ही कम करने में मदद करें। लेकिन इसके लिए आपको बड़े लाइफस्टाइल बदलाव करने की ज़रूरत नहीं है। आप छोटी-छोटी आदतों से भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं, जिन्हें आप अपनी रोज़मर्रा की रूटीन में शामिल कर सकते हैं। ये आदतें उतनी ही बेसिक और सिंपल हो सकती हैं, जितनी कि ब्रश करना होता है। यह एक रूटीन काम है, जिसे आप रोज करते हैं। एक न्यूरोसाइंटिस्ट के मुताबिक, दांत ब्रश करने जैसी बेसिक रूटीन भी कुछ पावरफुल और प्रोडक्टिव साबित हो सकती है।
आपको सुनने में थोड़ा सा अजीब लग सकता है, लेकिन अगर आप डायमेंशिया के जोखिम से बचे रहना चाहते हैं, तो अपने नॉन एक्टिव हाथका इस्तेमाल करना शुरू करें। मतलब अगर आप किसी भी काम को ज्यादातर सीधे यानी राइट हैंड से करते हैं, तो उसे लेफ्ट हैंड से करना शुरू करें। अगर आप सुबह के समय ब्रश को भी अपने नॉन-एक्टिव हाथ यानी सीधे की बजाय उल्टे और उल्टे की बजाय सीधे हाथ से करें, तो यह काफी फायदेमंद साबित होगा। इससे आपके फोकस करने और चीजों को याद रखने में मदद मिलती है।
इस ट्रिक को अपनाने से हमें ऑटोपायलट मोड से बाहर निकलने में मदद मिलती है। इस तरह की एक्टिविटी हमारी उम्र बढ़ने के साथ हमारे दिमाग को शार्प बनाए रखने की क्षमता को बेहतर करता है। वहीं, डिमेंशिया के खतरों को कम करने का मतलब दिमाग को चुनौती देना होता है, इसलिए आपको अपने दिमाग को अनजान कामों में लगाना होगा।
हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ब्रश करते समय एक पैर पर खड़े होने से हमारे वेस्टिबुलर और प्रोप्रियोसेप्टिव सिस्टम बेहतर होता है, जो दिमाग और शरीर का बैलेंस भी अच्छा करता है। इससे कोऑर्डिनेशन मज़बूत होता है। रिसर्च से पता चलता है कि जिन लोगों का बैलेंस बेहतर होता है, उनका ओवरऑल स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। एक रिसर्च से यह साफ हुआ है कि अगर किसी की बॉडी का बैलेंस खराब होता है, तो इससे कॉग्निटिव सिस्टम भी खराब होने का डर रहता है और यह समस्या डिमेंशिया के विकास से जुड़ी हुई है। यह उम्र बढ़ने के साथ हमारे दिमाग को तेज़ रखने में भी मददगार होता है।
दिमाग को एक्टिव रखने के लिए और भूलने की समस्या से बचे रहने के लिए आप रिवर्स लेटर नंबर सीक्वेंस ट्राई कर सकते हैं। यह आपके लिए चैलेंजिंग हो सकती है। दरअसल, यह एक तरह से ब्रेन गेम है, जिसमें बहुत ज़्यादा फोकस और लगातार ध्यान देने की ज़रूरत होती है। इसके लिए अल्फाबेट को उल्टे क्रम में Z से A तक पढ़ें। साथ ही हर अक्षर को उसके नंबरके साथ याद करें। उदाहरण के लिए काउंटडाउन ऐसे होना चाहिए: Z26, Y25, X24, W23। यह एक्सरसाइज ब्रेन गेम है, जो यह पक्का करता है कि आपका दिमाग ज़्यादा मेहनत कर रहा है, क्योंकि यह एक ही समय में दो सीक्वेंस को उल्टे क्रम में कोऑर्डिनेट करता है।