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Written By: Atul Modi | Updated : March 21, 2024 8:01 AM IST
'पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का वजन जल्दी बढ़ता है', आमतौर अधिकांश लोग इस बात को मानते हैं। यह बात सालों से मानी जा रही है और इसे आप अपने आस-पास के समाज को देखकर अनुभव भी कर सकते हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या सच में ऐसा है? क्या वाकई पुरुषों का वजन महिलाओं के मुकाबले कम बढ़ता है? और अगर हां, तो साइंस इसे लेकर क्या कहती है? क्या दोनों के खाने या मेटाबॉलिज्म के अंतर के कारण ऐसा होता है? ऐसे कई सवाल सभी के मन में उठते हैं। तो चलिए जान लेते हैं ऐसे ही हर सवाल का जवाब और उसके कारण।
वैसे तो मोटापा महिलाओं और पुरुषों दोनों को ही समान रूप से इफेक्ट करता है। फिर भी इनमें कुछ डिफरेंस जरूर है। आमतौर पर पुरुषों का वजन पेट से बढ़ना शुरू होता है। वहीं महिलाओं में बढ़ते वजन का असर सबसे पहले पेट के साथ ही हिप्स, जांघों में नजर आता है। इतना ही नहीं महिलाओं और पुरुषों दोनों की ओबेसिटी रेट भी अलग अलग होती है। आमतौर पर मोटापा का मुख्य कारण बिगड़ा हुआ खानपान, खराब लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज न करना आदि को माना जाता है। लेकिन इन सबके साथ मोटापे के लिए आपके हार्मोन भी जिम्मेदार होते हैं। खासतौर पर सेक्स हार्मोन। इन्हीं हार्मोन के कारण महिलाओं और पुरुषों की ओबेसिटी रेट में अंतर होता है। क्योंकि इससे मेटाबॉलिज्म और फैट डिस्ट्रीब्यूशन दोनों पर ही असर पड़ता है। महिलाओं और पुरुषों की शारीरिक गतिविधियों के लिए भी मांसपेशियों के साथ हार्मोन जिम्मेदार होते हैं। इसी कारण पुरुष महिलाओं मुकाबले फिजिकल एक्टिविटी ज्यादा कर पाते हैं।
हार्मोन सीधे तौर पर फैट डिस्ट्रीब्यूशन को प्रभावित करते हैं। इसलिए जेंडर के आधार पर दोनों के मोटापे में भी अंतर होता है। बच्चियों में एस्ट्रोजन हार्मोन के उत्पादन के दौरान ब्रेस्ट और हिप्स के आसपास फैट जमने लगता है। कहीं किशोरों में आमतौर पर ऐसा नहीं होता है। वहीं मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने के कारण भी जांघों और हिप्स के साथ फैट पेट की ओर जमा होने लगता है। यही कारण है कि मेनोपॉज के बाद आमतौर पर महिलाओं का वजन बढ़ जाता है।
हार्मोनल चेंज की वजह से पुरुषों और महिलाओं के शरीर में फैट अलग-अलग तरीके से जमा होता है। पुरुषों में आमतौर पर सेंट्रल ओबेसिटी नजर आती है यानी उनके पेट पर चर्बी सबसे पहले जमा होना शुरू होती है। वहीं महिलाओं में सबसे पहले हिप्स और जांघों का फैट बढ़ता है। हालांकि मेनोपॉज के कारण उन्हें सेंट्रल फैट की परेशानी से भी गुजरना पड़ता है।
महिलाओं और पुरुषों में अलग-अलग फैट जमा होने के पैटर्न के साथ ही इनके जोखिम भी अलग-अलग हैं। पुरुषों में मोटापे के कारण हार्ट डिजीज, टाइप 2 डायबिटीज और प्रोस्टेट व कोलन कैंसर जैसे खतरों की आशंका रहती है। वहीं महिलाओं में मोटापे के कारण ब्रेस्ट कैंसर, एंडोमेट्रियल कैंसर, मेटाबोलिक सिंड्रोम और ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी बीमारियां होने का जोखिम बढ़ जाता है।