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Written By: Yogita Yadav | Published : August 10, 2019 10:09 AM IST
यह इतनी सहज प्रक्रिया है कि हमारा ध्यान ही इस ओर नहीं जाता। जबकि विशेष तरीके से सांस लेने पर हम इस पर गौर कर पाते हैं। इससे बेहतर रोग प्रतिरोधक शक्ति, मन में स्थिरता और प्रसन्न मन की प्राप्ति होती है। © Shutterstock
श्वास को लेने और छोड़ने का संतुलित योग (Breathing Technique) ही योगासन है। वैज्ञानिक भी यही मानते हैं कि ज्यादातर बीमारियों की वजह हमारे श्वास लेने और छोड़ने में पैदा हुआ असंतुलन है। अगर इसे नियंत्रित कर लिया जाए तो कई समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। सप्ताह भर के काम के बाद अगर आप शारीरिक और मानसिक रूप से थक गए हैं, तो यह खास ब्रीदिंग टेक्नीक यानी खास तरह से सांस लेने की प्रक्रिया आपको रिफ्रेश कर देगी।
यह खास तरह की ब्रीदिंग टेक्नीक आपको सप्ताह भर की थकान उतारने में मदद करेगी। हर रोज की दौड़ भाग में अगर आप खुद के लिए समय नहीं निकाल पाते तो इससे तनाव और अवसाद में बढ़ोतरी होती है। जिसके कारण हम थकान का अनुभव करते हैं। पर अगर आप वीकेंड में यह प्रक्रिया दोहराएं तो आपको शारीरिक और मानसिक थकान से मुक्ति मिलती है।
एकांत जगह पर बैठें। एक हाथ छाती पर, दूसरा पेट पर हो और गहरी सांस लें। ध्यान रहे कि आपको सांस मुंह से नहीं, नाक से लेनी है। छाती पर रखा हाथ स्थिर हो, पेट वाला हाथ धीरे-धीरे मूव हो। अब मुंह से सांस लेने की कोशिश करें। इस क्रिया को 5 मिनट तक दोहराएं।
आंखें बंद कर सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। नाक से सांस लेकर मुंह से छोड़ें। कस कर मुट्ठी भींचें। इस स्थिति में होने वाले तनाव को नोटिस करें। धीरे-धीरे उंगलियां खोलें और हथेलियों के तनाव से मुक्त होने का एहसास करें।
आंख बंद कर गहरी सांस लें। अब 10 तक गिनती करें। इस प्रक्रिया को दोहराएं, काउंटिंग 50-100 तक बढ़ाएं। किसी सुंदर वस्तु पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें, मसलन कोई पेंटिंग, फ्लॉवर वास या कोई भी कलरफुल चीज।
शांत जगह पर बैठें और आंखें बंद कर सांसों और शरीर पर ध्यान केंद्रित करें। आंख खोलें, आसपास के वातावरण पर ध्यान केंद्रित करें। कोई आवाज खुशबू या घटना...जो भी हो, उसके प्रति जागरूक हों। अवेयरनेस की प्रक्रिया 5 बार दोहराएं।
श्वास हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। इसके बिना जीवन संभव नही है। अपनी व्यस्तता में हम अपनी श्वास पर ध्यान नहीं दे पाते। यह इतनी सहज प्रक्रिया है कि हमारा ध्यान ही इस ओर नहीं जाता। जबकि विशेष तरीके से सांस लेने पर हम इस पर गौर कर पाते हैं। इससे बेहतर रोग प्रतिरोधक शक्ति, मन में स्थिरता और प्रसन्न मन की प्राप्ति होती है।
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