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Written By: Editorial Team | Published : October 10, 2017 12:42 PM IST
दिमाग को प्रभावित करने वाली कोई और चीज़ का दुनियाभर में उतना सेवन नहीं होता जितना की कॉफी को पसंद किया जाता है। यही वजह है कि कॉफी पसंद करनेवालों को इस बात की परवाह नहीं है कि यह कितनी ज़्यादा पकाई जाती है या उबाली जाती है। हालांकि, भारत में कॉफी अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल की जाती है। वहीं दक्षिण भारत में, दिन की शुरुआत फिल्टर कॉफी और गरमागरम नाश्ते के साथ होती है। जबकि देश के बाकी हिस्सों में कॉफी बिल्कुल वैसे ही बनायी जाती है जैसे चाय बनती है, पानी और दूध के साथ उबालकर। कुछ लोग इंस्टैंट कॉफ़ी पीना पसंद करते हैं जिसमें दूध मिलाया जाता है। लेकिन क्या कॉफी बनाने के तरीके से कॉफी का हमारी सेहत पर कोई असर पड़ता है? वैज्ञानिक नज़रिए से देखा जाए तो हां। दरअसल स्टडीज़ स्पष्ट रूप से कहती हैं कि जहां तक सेहत का सवाल है, अलग-अलग तरह से कॉफी बनाने के तरीके का हमारी सेहत पर असर पड़ता है। इसलिए अगर आप कॉफ़ी पसंद करते हैं और आपको दिल से जुड़ी समस्याएं होती हैं, तो यह आर्टिकल आपको ज़रूर पढ़ना चाहिए।
फिल्टर कॉफी धातु से बने एक ऐसे बर्तन में पकायी जाती है जिसमें 2 गोल कप लगे होते हैं। एक कप के नीचे पेंदे में छोटे छेद होते हैं और यह नीचे के कप में फिट होता है। छेद वाले कप को कॉफी पावडर से भर दिया जाता है, जो कंप्रेस्ड होकर सख्त लेयर बनाता है। उसके बाद इसमें गर्म पानी डाला जाता है जो इन छिद्रों के ज़रिए एक कप से दूसरे कप तक पहुंचता है, और नीचे मौजूद पाउडर से घुलकर धीरे-धीरे कॉफी को रिसने देता है। बूंद-दर-बूंद, यह मिश्रण नीचे वाले गिलास में गिरने लगता है, जहां इसमें पानी, दूध और चीनी भी मिलायी जाती है। दूसरी तरफ जब कॉफी बनायी जाती है तो गर्म पानी में कॉफी पावडर घोलकर मिलाया जाता या उच्च तापमान पर उबलते हुए पानी में कॉफी को उबाला जाता है।
रिसर्च के दौरान दोनों तरीकों से बनायी जानेवाली कॉफी का शरीर के सीरम कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर असर का परीक्षण किया। 12 सप्ताह लंबे इस परीक्षण में, सामान्य सीरम कोलेस्ट्रॉल वाले 107 लोगों को फ़िल्टर कॉफी और उबलाकर बनायी गयी कॉफी दी गई। 3 हफ्ते के बाद, फिल्टर कॉफी पीने वाले सभी लोगों को अलग-अलग ग्रुप्स में बांटा गया, जिनमें से कुछ को 6 कप फ़िल्टर्ड कॉफी, कुछ को 4 और फिर कुछ बिल्कुल भी कॉफी नहीं दी गयी। उन्होंने 9 हफ्तों तक सभी लोगों का परीक्षण किया और यह पाया गया कि वो लोग जो फिल्टर कॉफी या कॉफी न पीने वाले समूहों में थे, उनके सीरम टोटल या लो-डेंसिटी कोलेस्ट्रॉल लेवल में बिल्कुल भी अंतर नहीं आया था। लेकिन जो लोग उबली हुई कॉफी पीते थे, 9 हफ्तों के बाद उनके सीरम कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ गया।
तो इसका निष्कर्ष यह निकलता है कि कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी समस्याओं से बचने के लिए शायद उबली हुई कॉफी की बजाय फिल्टर कॉफी पीना ज़्यादा फायदेमंद हो सकता है। इस मुकाबले में फिल्टर्ड कॉफी स्पष्ट रूप से उबली हुई कॉफी से आगे रही ।
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अनुवादक-Sadhna Tiwari
चित्रस्रोत-Shutterstock Images.
संदर्भ- Bak, A. A., & Grobbee, D. E. (1989). The effect on serum cholesterol levels of coffee brewed by filtering or boiling. New England Journal of Medicine, 321(21), 1432-1437.