
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : June 18, 2022 4:16 PM IST
yoga for healthy Heart
बिजी लाइफस्टाइल के कारण आजकल लोगों के पास बिलकुल भी समय नहीं है और इस कारण से हृदय समेत कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ने लगता है। ऑफिस में काम करने वाले लोग या जो भी व्यक्ति किसी ऐसी जगह पर काम करता है, जहां पर उसे लंबे समय तक बैठा रहना पड़ता है, उन्हें धीरे-धीरे हृदय संबंधी समस्याएं होने लगती हैं। हालांकि, कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि नियमित रूप से और सही तकनीक के साथ योग करने से हृदय संबंधी कई समस्याओं को दूर किया जा सकता है। मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर संतोष कुमार डोरा के अनुसार, ऐसे योगासन जो श्वसन क्रिया और शारीरिक मुद्रा पर फोकस करते हैं, वे एरिथमिया के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद हो सकते हैं। चलिए जानते हैं एरिथमिया क्या है और इसके इलाज में योग मुद्राएं कैसे मदद कर सकती हैं।
एक्सपर्ट्स के अनुसार दिल की धड़कने की गति जो सामान्य न हो उसे एरिथमिया कहा जाता है। मोटे तौर पर इसे टैकिएरिथमिया, ब्रैडी एरिथमिया या एक्टोपिक बीट्स भी कहा जा सकता है। जब दिल बहुत तेजी से धड़कने लग जाता है जैसे एक मिनट में 60 बार धड़कना तो इसे टैकिएरिथमिया कहा जाता है। वहीं अगर दिल की धड़कन एक मिनट में 60 बार से कम धड़क रही है, तो उसे ब्रैडीएरिथमिया कहा जाता है। जब दिल की धड़कन रुक-रुक कर चलती है और साइनस नोड के अलावा कहीं और से निकलती है तो इसे एक्टोपिक बीट कहा जाता है। वहीं अगर दिल की धड़कन हृदय के किसी अन्य हिस्से से निकल रही है, तो उसे एक्टोपिक बीट कहा जाता है।
एरिथमिया कई बार घातक बन सकता है, जिससे गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। इसमें मरीज को अचानक से चक्कर आना या होश खोने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर एरिथमिया ज्यादा गंभीर है, तो इससे कार्डियक अरेस्ट हो सकता है और मरीज की मृत्यु भी हो सकती है। यही कारण है कि एरिथमिया के सभी प्रकारों की जांच अच्छे से ही की जानी चाहिए। डॉक्टर से अपनी स्थिति के बारे में अच्छे से बात कर लें ताकि आपको स्थिति का अंदाजा हो सके।
योग एक प्रकार का व्यायाम है, जो न सिर्फ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाता है बल्कि व्यक्ति के सामाजिक कल्याण में भी इसका काफी फायदा है। योग करने से शरीर में लचीलता बढ़ती है और मांसपेशियां शक्तिशाली होती है। योग का अभ्यास करने वाले व्यक्ति की मूल मांसपेशियां (कोर मसल) भी शक्तिशाली बनती हैं, जिससे शारीरिक मुद्रा में सुधार होता है। प्राणायाम एक ऐसी योग मुद्रा है, जो फेफड़ों की कार्य प्रक्रिया में सुधार करती है। यह शरीर दिल की बढ़ रही धड़कनों को नियंत्रित करने में मदद करता है और साथ ही ब्लड प्रेशर में भी सुधार करता है।
एरिथमिया के ज्यादातर मामलों में विशेष देखभाल करने की आवश्यकता पड़ती है और इस स्थिति का इलाज विशेष दवाओं को थेरेपी आदि की मदद से करना पड़ सकता है। ऐसा हो सकता है कि योग की मदद से इस बीमारी का पूरी तरह से इलाज न हो पाए, लेकिन कुछ प्रकार के एरिथमिया के लक्षणों को नियंत्रित करने के योग फायदेमंद हो सकता है। उदाहरण के लिए साइनस टैकीकार्डिया जो आमतौर पर कम उम्र के वयस्कों में ज्यादा देखा जाता है। योग की मदद से चिंता के लक्षणों को कम करने, हार्ट रेट को नॉर्मल करने और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है और इनकी मदद से एरिथमिया के लक्षणों में भी सुधार हो जाता है। हालांकि, एरिथमिया का पूरी तरह से इलाज करने के लिए उसकी अच्छे से जांच और इलाज जरूरी है।
स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान के योग गुरु निरंजन मिश्रा के अनुसार हृदय के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए योगासन को सबसे अच्छे विकल्पों में से एक माना जाता है। अगर आप अपने दिल को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो रोज ये योगासन करें