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Exercise For Pelvic Floor Muscles: पेल्विक फ्लोर (Pelvic Floor) शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जो हमारे पेल्विक पार्ट्स यानी यूट्रस, वजाइना, ब्लैडर और बाउल को सही स्थिति में बनाए रखने में मदद करता है। पेल्विक फ्लोर की मसल्स आपको बेहतर कोर स्ट्रेंथ, यौन स्वास्थ्य और पॉश्चर में योगदान करती हैं। कमजोर पेल्विक फ्लोर मसल्स के कारण मूत्र असंयम, कमर दर्द, यौन समस्याएं, और आंतों की समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में, इन मसल्स को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है। पेल्विक फ्लोर मसल्स को मजबूत बनाने के लिए आप अपने डेली रूटीन में कुछ एक्सरसाइज को शामिल कर सकते हैं। आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसी एक्सरसाइज के बारे में बता रहे हैं, जो पेल्विक फ्लोर की मसल्स को मजबूत बनाने में मदद कर सकती हैं। तो आइए, जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -
कीगल एक्सरसाइज पेल्विक फ्लोर मसल्स को मजबूत करने में बहुत मददगार है। यह पेल्विक मसल्स को टोन करती है और बैली फैट घटाने में भी मदद करती है। इसके नियमित अभ्यास से यूरिन लीकेज की समस्या से छुटकारा मिल सकता है। इसे करने के लिए अपने घुटनों को मोड़ कर आराम की स्थिति में बैठ जाए। अपनी पेल्विक मसल्स को वैसे ही टाइट करें जैसे आप पेशाब रोकते समय करते हैं। 5-10 सेकंड तक इस स्थिति में रहें, फिर मसल्स को धीरे-धीरे रिलैक्स करें। इसे 30 से 50 बार दोहराएं।
स्क्वाट्स पेल्विक फ्लोर मसल्स के साथ-साथ ग्लूट्स और हिप्स को भी मजबूत बनाते हैं। इसे करने के लिए अपने पैरों को बराबर दूरी पर खोलकर खड़े हो जाएं। अब अपने दोनों हाथों को सामने की ओर आपस में जोड़ें और फिर नीचे की तरफ बैठें। इसके बाद फिर अपनी पोजीशन में वापस आ जाएं। इसके 15 के 3 सेट करें।
ग्लूट ब्रिज पेल्विक फ्लोर मसल्स, ग्लूट्स, कोर मसल्स और हिप्स को मजबूत करने के लिए एक बेहतरीन एक्सरसाइज है। इसके करने के लिए जमीन पर पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। अपने घुटनों को मोड़ें और पैरों को कूल्हों की चौड़ाई पर रखें। अपने हाथों को शरीर के बगल में रखें। अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए, अपने हिप्स को ऊपर उठाएं। ग्लूट्स और पेल्विक फ्लोर मसल्स को टाइट करें और इस स्थिति में 5-10 सेकंड तक बने रहें। फिर धीरे-धीरे हिप्स को वापस जमीन पर लाएं। इसके 10-15 के 3 सेट करें।
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।