खेलकूद करने वाले युवाओं में आम है एन्टीरियर क्रूसिएट लीगामेंट इंजरी, जानें क्या है इलाज की प्रक्रिया

युवा जो ज्यादा खेलते हैं या जो मोटरसाइकिल तेज स्पीड में चलाते हैं, उनमें सबसे ज्यादा चोट लगने की या एक्सीडेंट होने की संभावनाएं होती हैं, जिसके कारण वे एसीएल इंजरी का शिकार बने हैं। कई बार सीढ़ियों से चढ़ते-उतरते वक्त या बाथरूम में पैर फिसलने से भी एसीएल इंजरी हो जाती है।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : November 23, 2020 4:31 PM IST

एन्टीरियर क्रूसिएट लीगामेंट (एसीएल) एक प्रकार का लीगामेंट है जो घुटने को स्थिर रखने में सहायक होता है। एन्टीरियर क्रूसिएट लीगामेंट इंजरी खासकर एथलीट्स और युवाओं के बीच आम है, इसीलिए इसे स्पोर्ट्स इंजरी में शामिल किया जाता है। क्रिकेट, बास्केटबॉल, सौकर, फुटबाल, बैडमिंटन, जिम आदि ऐसे खेल होते हैं जिसमें घुटने की चोटें सबसे ज्यादा देखने को मिलती हैं। युवा जो ज्यादा खेलते हैं या जो मोटरसाइकिल तेज स्पीड में चलाते हैं, उनमें सबसे ज्यादा चोट लगने की या एक्सीडेंट होने की संभावनाएं होती हैं, जिसके कारण वे एसीएल इंजरी का शिकार बने हैं। कई बार सीढ़ियों से चढ़ते-उतरते वक्त या बाथरूम में पैर फिसलने से भी एसीएल इंजरी हो जाती है।

एन्टीरियर क्रूसिएट लीगामेंट इंजरी के लक्षण

समस्या यह है कि ज्यादातर लोग इस इंजरी को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। डॉक्टर अखिलेश यादव, सीनियर हिप एंड नी रिप्लेसमेंट सर्जन, सेंटर फॉर नी एंड हिप केयर, गाज़ियाबाद कहते हैं कि कई बार मरीज समस्या के साथ डॉक्टर के पास पहुंचते हैं लेकिन फ्रेक्चर नहीं है यह जानकर वे लापरवाह हो जाते हैं। वास्तव में यह लापरवाही उनपर बहुत भारी पड़ सकती है।

चोट की शुरुआती में कुछ खास मुश्किल नहीं होती है लेकिन धीरे-धीरे लक्षण विकसित होने लगते हैं, जो मरीज खुद महसूस कर सकता है, जैसे कि चलते-चलते अचानक पैर लचक जाना, अचानक पैर मुड़ना, गिर जाना, घुटना अटक जाना आदि। यहां तक कि मरीज का पैर धीरे-धीरे पतला और कमजोर होने लगता है। इसलिए इस प्रकार की चोटों का इलाज केवल आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी से ही संभव है। इसमें, सर्जन क्षतिग्रेस्त लीगामेंट को रिकंस्ट्रक्ट (पुनर्निर्माण) करता है। टेक्रनोलॉजी में प्रगति के साथ, आज एसीएल इंजरी का इलाज करना पहले से कहीं बेहतर हो गया है।

जानें क्या है सर्जरी की प्रक्रिया

एन्टीरियर क्रूसिएट लीगामेंट पुनर्निर्माण सर्जरी के दौरान क्षतिग्रस्त लिगामेंट को हटाकर उसकी जगह पर नए टिशू लगाए जाते हैं। ये टिशू जरूरत के हिसाब से मरीज के शरीर के ही किसी अंग से लेकर लगाए जाते हैं। ज्यादातर मामलों में डॉक्टर घुटने के आसपास के टिशू का इस्तेमाल करते हैं जिससे सर्जरी आसानी से पूरी हो जाती है। यह एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें दूरबीन का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी मदद से सर्जरी में किसी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहती है। सर्जन इस दौरान फाइबर टेप और बायोडिग्रेडेबल स्क्रू (जिसमें कोई मेटल नहीं होता है) का इस्तेमाल करता है।

चूंकि, इस प्रक्रिया में बहुत छोटा चीरा लगाना पड़ता है, इसलिए मरीज को न के बराबर दर्द होता है और रिकवरी भी तेज गति से होती है। इसलिए यह एक सुरक्षित और लोकप्रिय प्रक्रिया है। जबकी पहले के समय में सर्जरी के बाद मरीज को रिकवर होने में दो से ढ़ाई महीने लगते थे। वहीं इस्टिंजेंट के लिए फाइबर टेप इस्तेमाल करने के कारण मरीज अब 1-2 हफ्तों में पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है। लगभग 1 महीने में मरीज बिना किसी सहारे के चलना शुरू कर देता है। हालांकि, उन्हें स्पोर्ट्स गतिविधियों के लिए कम से कम 5 महीने रुकने की सलाह दी जाती है। इस बीच मरीजों को अपनी मांसपेशियों को मजबूत करने का मौका मिलता है, जिसके बाद घुटना सटीक स्थान पर आ जाता है और सामान्य रूप से काम करना शुरू कर देता है। इसके बाद व्यक्ति खेल-कूद की गतिविधियों में भी वापस जा सकता है।

बिना सर्जरी के भी संभव है इलाज

आमतौर पर लोगों में डर बना हुआ है कि यदि उनके लीगामेंट क्षतिग्रस्त हो गए हैं तो उन्हें सर्जरी करानी पड़ेगी। जबकि असल में, कुछ मामलों में मरीज को बिना सर्जरी के भी ठीक किया जा सकता है। हालांकि फिजिकल थेरेपी से एसीएल की इंजरी को कुछ हद तक ठीक किया जा सकता है लेकिन ऐसा उन लोगों में ही संभव है जो लोग कम सक्रिय होते हैं या कम खेल-कूद करते हैं। यह आपकी गतिविधि के लेवल पर निर्भर करता है कि आपको सर्जरी की जरूरत है या नहीं।

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