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योग न सिर्फ शरीर को, बल्कि मन को भी स्वस्थ बनाता है। आधुनिक जीवनशैली के कारण होने वाली बहुत सी बीमारियों का समाधान योग के द्वारा किया जा सकता है। परंतु योग करने के लिए यह जरूरी है कि आप किसी योग प्रशिक्षक की निगरानी में ही इसकी शुरूआत करें। कई बार किसी विधि को गलत तरीके से करने के कारण उसके वे लाभ प्राप्त नहीं हो पाते जिनके लिए योग किया जा रहा है।
योग के भी हैं नियम
योग संपूर्ण जीवन की संतुलित जीवनशैली का आग्रह करता है। इसी के साथ योग करने के भी कुछ नियम हैं और इन नियमों का पालन किया जाना जरूरी है। योगासन करने के लिए जरूरी है कि जिस क्रम में इन्हें निर्धारित किया गया है, उन्हें उसी क्रम में किया जाए। ऐसे में अगर आप योग की शुरूआत कर रहें हैं तो अनुलोम विलोम और कपालभाति जरूर करें।
अनुलोम विलोम
इस प्राणायाम को करने के लिए नाक के एक छिद्र को उँगलियों से बंद कर के नाक के दूसरे छिद्र के माध्यम से सांस भरी जाती है। फिर इसी क्रिया को नाक के दूसरे छिद्र से उसी प्रकार दोहराया जाता है।
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यह प्राणायाम नाक को साफ़ तो करता हीं है साथ हीं इससे बैचैन मन को शान्ति भी मिल जाती है और मानसिक परेशानियों से निजात दिलाने में यह काफी फायदेमंद साबित होता है।
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कपालभाति
यह कपालभाति प्राणायाम “कपाल तथा भाति” शब्द की संधि से निर्मित हुआ है। कपाल का अर्थ होता है सर तथा भाति का अर्थ चमकना होता है। इस प्राणायाम को करने के दौरान आपको सीधे बैठ कर तेजी से अपनी सांस को इस प्रकार बाहर छोड़ा जाता है जिससे आपके पेट में भीतर की तरफ खिंचाव का अनुभव हो। पर इस बात का ध्यान रखें की इस दौरान आपका ध्यान आपके पेट पर न हो कर आपकी सांसों के अन्दर और बाहर जाने पर रहे।
कपालभाति प्राणयाम करने से पाचन क्रिया को मजबूती मिलती है और फेफड़े भी मजबूत होते हैं, साथ हीं यह मधुमेह और नेत्ररोग आदि में भी बहुत लाभकारी होती है।