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spirituality was associated with increased quality of life, mental health and improved health status.© Shutterstock
आध्यात्मिक होने का क्या मतलब है? अगर मैं नास्तिक हूं तो क्या क्या मैं आध्यात्मिक बन सकता हूं? मैं अपने धर्म के नियमों का पालन नहीं करता हूं तो क्या मैं अब भी आध्यात्मिक हूं? आध्यात्मिक होने के लिए आपको भगवान या धर्म में विश्वास की जरूरत नहीं है। वास्तव में अपने मन में प्यार, सहिष्णुता, करुणा, धैर्य, अलगाव और आशा रखने वाला ही असली आध्यात्मिक होता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि आध्यात्मिक होने के अपने कई फायदे हैं। चलिए जानते हैं कैसे।
1) अवसाद से बचाता है
साल 2014 के एक अध्ययन के अनुसार, रोजाना ध्यान और अन्य आध्यात्मिक या धार्मिक अभ्यासों से दिमाग का कोर्टेक्स (cortex) हिस्सा और ज्यादा मोटा होता है। यह दिमाग को अवसाद से बचाता है, खासकर अगर आपको बीमारी का धिक् जोखिम है।
2) आत्महत्या की दर कम
आध्यात्मिकता से आपको मासिक ताकत मिलती है, बेशक आप मुश्किल में हों। जामा नेटवर्क जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जो महिलाएं धार्मिक सेवाओं में हिस्सा लेती थी, उनमें उन महिलाओं की तुलना में आत्महत्या का खतरा कम देखा गया, जो कभी इनमें हिस्सा नहीं लेती थी।
3) हैप्पी फैमिली
जो लोग र्मिक सेवाओं में हिस्सा लेते हैं उनका परिवार खुशहाल होता है। ऐसे लोगों को बेहतर रोमांटिक रिश्तों के लिए जाना जाता है। अध्ययन का कहना है कि जो लोग अपने जीवनसाथी के लिए प्रार्थना करते हैं, वे एक-दूसरे के साथ बेहतर प्रतिबद्धता का आनंद लेते हैं।
4) मुसीबत का सामना करने में मदद
लोगों के जीवन में हमेशा उतार-चढ़ाव आता रहता है। आध्यात्मिकता आपके नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करती है और आपका इम्युनिटी सिस्टम मजबूत बनाती है।
5) लंबा जीवन जीने में मदद
जब आप आशा और विश्वास के साथ जीते हैं, तो आप लंबा जीवन जी सकते हैं। जामा में 2016 में प्रकाशित हार्वर्ड टी एच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, ऐसे धार्मिक और आध्यात्मिक लोग जो मस्जिद, सभा, मंदिर और चर्च जाते हैं उन्हें हृदय रोग, कैंसर आदि का खतरा कम होता है।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock