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Written By: Yogita Yadav | Published : October 19, 2018 10:00 AM IST
भगवान विष्णु का वाहन मानेे जाने वाले गरुड़ पक्षी के समान हो जाती है इस आसन में स्थिति। © Shutterstock
अगर आप शरीर के निचले हिस्से अर्थात मूत्राशय, अंडकोष, मलाशय या जांघों में किसी तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं तो आपको गरुड़ासन जरूर करना चाहिए। यह शरीर के निचले हिस्से को मजबूत बनाने के साथ ही बाजुओं का लचीलापन भी बढ़ाता है।
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गरुड़ासन
गरुड़ासन योग खड़े होकर करने वाले योग में एक महत्वपूर्ण योगाभ्यास है। यह अंडकोष एवं गुदा के लिए बहुत लाभकारी योगाभ्यास है। इस आसन में हाथ एक-दूसरे में गूंथ लिए जाते हैं और छाती के सामने इस प्रकार रखे जाते हैं, जैसे गरुड़ की चोंच होती है, इसलिए इस आसन को गरुड़ासन कहा जाता है।
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गरुड़ासन योग विधि
गरुड़ासन योग के लाभ
इस आसन के अभ्यास से मन और शरीर के बीच सामंजस्य स्थापित होता है जिससे मन को अपार शांति मिलती है।
इसके नियमित अभ्यास से अंडकोष (Testicle) को बढ़ने से रोक जा सकता है।
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यह पैरों और जांघों को मजबूत बनाता है।
इसका नियमित अभ्यास से गुदा, मलाशय तथा मूत्राशय के रोगियों को आराम पहुंचता है।
यह जोड़ों की सक्रियता बढ़ाता है, घुटनों, पैरों एवं जोड़ों का दर्द दूर करता है।
यह आपके हाथों को मजबूत बनाता है और कोहनी के दर्द से छुटकारा दिलाता है।
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गरुड़ासन योग की सावधानी