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Written By: Yogita Yadav | Published : October 18, 2018 2:15 PM IST
देर तक बैठने से हमारी शारीरिक अवस्था में जो कमी आ जाती है उसे इस आसन के अभ्यास से सुधारा जा सकता है। ©Shutterstock
लगातार बैठे रहने से अगर शरीर में भारीपन महसूस हो रहा है, तो आपको नियमित उत्थानासन का अभ्यास करना चाहिए। इससे शरीर का निचला हिस्सा मजबूत होता है और कमर-घुटने आदि में लचीलापन भी बढ़ता है। उत्थान आसन हमारे पैरों, पीठ और कंधों की पेशियों में महत्वपूर्ण खिंचाव लाता है।
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उत्थान आसन
यह आसन पीठ और कमर की उन मांसपेशियों को सशक्त बनाता है जिनका प्रयोग ध्यानात्मक आसन करने में ज़्यादा होता है।
योग शिक्षक की सलाह से अपनी शारीरिक अवस्था को ध्यान में रखते हुए आसनों का चयन करना चाहिए।
उत्थान आसन करने की विधि
सीधे खड़े रहें, दोनो पैरों में लगभग एक मीटर का अंतर रखिए। यह भी पढ़ें – एक आसन हर रोज : चेहरा और आवाज, दोनों का सौंदर्य बढ़ाता है शेर की मुखाकृति वाला यह योगासन
दोनों पैरों को बाहर की ओर मोड़िए। दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में मिला लीजिए, बाजू को सीधा और ढीला रखिए. सांस भर लीजिए। यह प्रारम्भिक स्थिति है।
पहली अवस्था: सांस छोड़ते हुए घुटने मोड़े और 30 सेंटी मीटर तक नीचे बैठिए, प्रयास करें कि आगे न झुकें। सांस भरते हुए वापस सीधे खड़े हो जाए।
दूसरी अवस्था: इसी प्रकार सांस छोड़ते हुए आधा मीटर नीचे बैठिए। जब आपकी जांघ ज़मीन के समानांतर हो जाए। उस स्थिति में रुकने का प्रयास करें, फिर सांस भरते हुए प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।
तीसरी अवस्था: इस बार सांस छोड़ते हुए घुटने मोड़ते हुए इतना नीचे बैठिए कि हाथों की अंगुलियां ज़मीन से स्पर्श हो जाएं, परन्तु आगे न झुकें, रीढ़ को सीधा रखने का प्रयास करें।
बाज़ुओं को और कंधों को ढीला ही रखें। इस स्थिति में कुछ पल रुकने का प्रयास करें तत्पश्चात सांस भरते हुए वापस प्रारम्भिक स्थिति में आ जाएं।
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लाभ
नाभि से नीचे पेट का व्यायाम होता है। पीठ के मध्य की मांसपेशियां सशक्त होती हैं।
उत्थान आसन के अभ्यास से शरीर की प्राण ऊर्जा का प्रवाह नियमित होता है। आप दिन-भर तरोताज़ा महसूस करते हैं।
पैरों के टखने, घुटने और जंघाओं की कसरत हो जाती है और जोड़ लचीले बनते हैं।
सावधानी
गर्भवती महिलाएं पहले से तीन महीने के बाद पहली और दूसरी अवस्था का ही अभ्यास करें। योग प्रशिक्षक और डाक्टर की सलाह भी ली जा सकती है।
योग के अभ्यासी को कमर या पीठ दर्द ख़ासकर साइटिका और स्लिप डिस्क की संभावना नहीं रहती। जिन्हें पहले से दर्द हो उन्हें खड़े होने वाले यह आसन नहीं करने चाहिए।