एक आसन हर रोज : यह सिर्फ योगासन नहीं,  हैप्‍पीनेस का इनविटेशन कार्ड है

भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है , तो योग का यह आसन आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा।

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Written By: Yogita Yadav | Published : October 12, 2018 1:00 PM IST

योग सुंदर और सुखद जीवन की कुंजी है। यह शरीर और मन के लिए सुख के ताले खोलना सिखाता है। आजकल सब काम टेबल और कुर्सी पर होता है। जैसे पलथी मारकर बैठना कम हुआ है, उसी तरह कम हो गया है जीवन में सुख का अनुभव। सब कुछ आसपास होते हुए भी अगर आपको सुख अपने से दूर लगता है, तो इस आसन को हर रोज करें।

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क्‍यों जरूरी है सुखासन

सुखासन अर्थात सुख देने वाला आसन। आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई तनाव से ग्रस्त है जिसके कारण उसका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है, ऐसे में जब हम मन की शांति चाहते हैं तो सुखासन इसके लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होता है। सुखासन का शाब्दिक अर्थ होता है सुख देने वाला आसन। जब भी हम इस आसन को करते हैं, तो सच में ही हमें आत्मीय शांति और सुख की प्राप्ति होती है, यही कारण है कि हम इस आसन को सुखासन के नाम से जानते हैं।

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सुखासन की विधि

  • सुखासन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर चटाई या दरी बिछा लें।
  • अपने दोनों पैरों को सामने और सीधे रखें।
  • अपने एक पैर की एड़ी अपने दूसरे पैर की जंघा के नीचे रखें फिर दूसरे पैर की एड़ी को भी इसी प्रकार से रखें। ऐसा करके आप पलथी में आ जाओगे।
  • अपनी पीठ और मेरुदंड को बिल्कुल सीधा रखें। इस बात पर ध्यान दें कि आप अधिक झुके हुए न हो।

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  • अपने कंधों को ढीला छोड़ते हुए अपनी सांस को पहले अंदर की ओर लें फिर बाहर की ओर छोड़ें।
  • अपनी हथेलियों को एक के ऊपर एक करके अपनी पलथी के ऊपर रखें।
  • अपने सिर को ऊपर उठाते हुए अपनी दोनों आखों को बंद कर लें।
  • अपना पूरा ध्यान अपनी श्वास क्रिया पर लगाते हुए सांस लम्बी और गहरी लें।
  • अगर आप इसे पहली बार कर रहे हो, तो आपको कठनाई महसूस हो सकती है। आप किसी दीवार का सहारा लेकर इसको कर सकते हो।

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सुखासन करने के लाभ

जब भी हम इस अभ्यास को नियमित रूप से करते हैं, तो हमें मानसिक सुख और शांति का अनुभव होता है।

यदि आप चिंता, अवसाद या फिर क्रोध से ग्रस्त हैं, तो आप को सुखासन को करना चाहिए, क्योंकि इसे करने से आप को बहुत ही लाभ मिलता है।

इस आसन को करने से हमारी बैठने की सही आदत बन जाती है।

यह आसन हमारे मन की चंचलता को कम करने में सहायक होता है।

इस आसन को करने से हमारी रीढ़ की हड्डी में होने वाली रोगों से निजात मिलती है।

जब भी हम सुखासन को करते हैं तो हमारा चित शांत और मन एकाग्रस्त होता है।

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सुखासन सावधानियां

  • जिन लोगों के घुटनों में दर्द है उन्हें ये आसन नहीं करना चाहिए। अगर करना हो तो किसी एक्सपर्ट की निगरानी में करना चाहिए।
  • अगर आप की रीढ़ की चोट लगी हुई हो, तो आप को इस आसन को बहुत ही ध्यान पूर्वक करना चाहिए और आप को लम्बें समय तक नहीं बैठना चाहिए।
  • अपने शरीर की प्रकिया को समझकर उसके अनुरूप आसन को करना चाहिए।
  • इस आसन को एकांत में करना चाहिए और अगर आप इसे अध्यात्मिक रूप से कर रहे हो तो आप को पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख करके इस आसन को करना चाहिए।
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