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ईटिंग डिसऑर्डर (खाने का विकार) को असामान्य खाने के व्यवहार से पहचाना जा सकता है, यह व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। बुलिमिया, बिंग-ईटिंग और एनोरेक्सिया सबसे ज्यादा होने वाला ईटिंग डिसऑर्डर है। ईटिंग डिसऑर्डर एक गंभीर मानसिक समस्या है जो की लोगो में भोजन, एक्सरसाइज़ और शरीर की बनावट और वजन के प्रति बहुत ज्यादा जुनून होने की वजह से उत्पन्न होती है। आमतौर पर ईटिंग डिसऑर्डर सामान्य तौर पर एंग्जायटी (चिंता) और अवसाद (डिप्रेशन) के साथ होता हैं और किसी भी समय, लगभग 0.9% महिलाएं और 0.3% पुरुष एनोरेक्सिया से पीड़ित हैं।
ज्यादातर लोगो का ईटिंग डिसऑर्डर से पीड़ित होने का एक मुख्य कारण तनाव है। तनाव के कारण बिंज ईटिंग डिसऑर्डर या खाने के वजन के प्रति बहुत ज्यादा ग्रस्तता (ओबसेशन ) दोनों का कारण बन सकता है। ईटिंग डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों के लिए उदासी, क्रोध और ऊब की भावनाओं को दूर करने के लिए भोजन का उपयोग करना एक सामान्य बात है। कोविड महामारी के दौरान व्यक्तिगत परामर्श और थेरेपी की सुविधाएं उपलब्ध नहीं थी, इसका सबसे ज्यादा प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित और विशेष रूप से ईटिंग डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों पर हुआ है । ऐसे समय में, ऐसी पीड़ित आबादी के लिए योग और ध्यान आवश्यक है।
डॉ दीपक मित्तल के अनुसार, योग स्वयं की स्वीकार करने को बढ़ावा देता है। योग मन को पुनर्जीवित करके और अंतःस्रावी तंत्र (एंडोक्राइन सिस्टम) को सक्रिय करके आंतरिक शांति की भावना प्रदान करता है। इस प्रकार यह चिकित्सकों को अपने शरीर को समग्र रूप से स्वीकार करने और अनुभव करने में मदद करता है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन द्वारा 18-30 वर्ष की आयु के बीच की महिलाओं के एक समूह पर केंद्रित एक अध्ययन में 12 सप्ताह तक योग का अभ्यास किया गया, जिसमें पाया गया कि यह एक स्वस्थ शरीर की छवि बनाने में मदद कर सकता है, जो ईटिंग डिसऑर्डर को कम करने में सहायक होगा। अध्ययन में देखा गया की प्रतिभागियों ने अपने व्यक्तिगत शरीर की छवि के साथ संतुष्टि में वृद्धि की और वे दूसरों के सामने कैसे दिखाई देते है, इस पर कम ध्यान दिया। यह संकेत यह दर्शाता है की योग ईटिंग डिसऑर्डर को ठीक करने में सहायक है और कई हद तक उसी की रोकथाम में भी सक्षम है ।
योग का अभ्यास मूल रूप से ध्यान, श्वास और व्यायाम के साथ मिलाकर विश्राम, शांति और माइंडफुलनेस (वर्तमान क्षण में केंद्रित जागरूकता) की आवश्यकता से पैदा हुआ है। और ये अभ्यास उन्हें चिंता से निपटने में मदद करती हैं, जो (चिंता) ईटिंग डिसऑर्डर का एक सामान्य कारण है।
चूंकि यह सब संतुलन के बारे में है, योग चिकित्सक जो ईटिंग डिसऑर्डर के रोगियों के साथ काम कर रहे हैं, वे तनावपूर्ण व्यायाम का सुझाव देकर उनके शारीरिक बोझ को नहीं बढ़ाते हैं। शिक्षक रोगियों के दिमाग को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने, खुद से प्यार करने और मानसिक शांति का प्रचार करने वाले योग आसनों की अधिक से अधिक शिक्षा देने का प्रयास करते है।
उन्हें यह पहचानना सिखाया जाता है कि यदि कोई शासन या आदत उनके स्वास्थ्य के लिए बहुत अधिक गहन हो रही है तो आगे बढ़ने से पहले खुद को रोके और मानसिक व शारीरिक संतुलन की स्थिति में वापस आना सीखें। ईटिंग डिसऑर्डर से पीड़ित लोग यह मानते है की जब तक उनके शरीर कुछ अस्वास्थ्यकर मापदडों को पूरा नहीं करते वे प्यार के योग्य नहीं हैं और योग इस डर को आत्म-प्रेम व माइंडफुलनेस में बदलने में मदद करता है।
(इनपुट्स: डॉ दीपक मित्तल, फाउंडर, डीवाइन सोल योगा)