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Written By: Atul Modi | Updated : December 27, 2023 8:01 AM IST
सर्दियां अक्सर अपने साथ सुस्ती भी लाती हैं। इस दौरान कुछ लोगों को मूड स्विंग्स होने लगते हैं। वहीं कुछ लोग उदास, गुमसुम रहने लगते हैं। मूड में इस बदलाव के कई कारण हो सकते हैं। जैसे शारीरिक गतिविधियों में कमी आना, सूरज की रोशनी की कमी, हैप्पी हार्मोन सेरोटोनिन का स्तर कम होना आदि। अगर आप भी ये उदासी महसूस कर रहे हैं तो कुछ योग आसन अपनाकर आप अपना मूड और सेहत दोनों बेहतर बना सकते हैं। जी हां, अपने डेली रूटीन में ये 5 मूड बूस्टर योग आसन जोड़कर आप फिर से खिलखिला सकते हैं। कौनसे हैं ये आसन, चलिए जान लेते हैं।
उष्ट्रासन सिर्फ आपके मूड को ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर को रीफ्रेश कर देता है। यह आसन कंधे, छाती और कमर को मजबूत बनाता है। सबसे खास बात ये है कि इससे थकान कम और चिंता दूर होती है। यह फेफड़ों को भी मजबूत बनाता है।
ऐसे करें: सबसे पहले अपनी पिंडलियों और घुटनों के बल आराम की मुद्रा में बैठ जाएं। ध्यान रखें आपकी जांघें, पिंडलियों को न छूएं। फिर धीरे-धीरे हाथों को टखने पर रखें। इस दौरान आपका चेहरा ऊपर छत की ओर होना चाहिए। इस स्थिति में आप करीब 10 से 20 सेकंड तक रहें। इस आसन को 3 से 5 मिनट तक दोहराएं।
आपके दिल और दिमाग के बीच सेतु का काम करता है सेतुबंधासन। इस आसान से आपका मस्तिष्क शांत रहता है, जिससे तनाव और डिप्रेशन दोनों कम होता है। यह आपकी रीढ़ की हड्डी सहित छाती, गर्दन और पैरों को मजबूत करता है। इससे पाचन तंत्र सुधरता है, जिससे भी तनाव कम होती है।
ऐसे करें : सबसे पहले एक योग मैट लें और उसपर घुटनों को मोड़कर पीठ के बल लेटते हुए अपने पैरों को मजबूती से जमीन पर रखें। पैरों को कूल्हे की चौड़ाई से अलग रखें। अब हथेलियों को नीचे की ओर रखें और हाथों को बगल में रखकर
श्वास लें। अब रीढ़ को ऊपर की ओर घुमाते हुए कूल्हों को फर्श से ऊपर उठाएं। इस दौरान पैरों को जमीन पर मजबूती से दबाएं। 4 से 8 बार श्वास लें और फिर पुन: उसी स्थिति में आ जाएं।
वृक्षासन बहुत ही आसान और असरदार योग आसन है। इससे मानसिक और शारीरिक संतुलन में सुधार होता है। साथ ही जांघों, पिंडली, टखनों और रीढ़ को भी मजबूती मिलती है।
ऐसे करें : सबसे पहले आप सीधे खड़े हो जाएं। फिर अपने हाथों को ऊपर उठाकर उन्हें सीधे छत की ओर लेकर जाएं। अब अपने दोनों पैरों में से किसी एक को उठाकर अपने पैरों को दूसरी जांघ पर रखें। ध्यान रखें आपका पैर जांघ पर जितना ऊपर हो सके, उतना ऊपर होना चाहिए। इस स्थिति में 30 सेकंड तक रहें। इस प्रक्रिया को 4 से 5 बार दोहराएं।
आपने मंदिरों में श्रद्धालुओं को घुटनों के बल बैठकर नतमस्तक होते देखा होगा, बालासन कुछ-कुछ वैसा ही है। इस आसन से आपके मूड स्विंग्स बंद होते हैं। इससे रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और सिर, रीढ़ की हड्डी, गर्दन में दर्द आदि से आराम मिलता है।
ऐसे करें : सबसे पहले अपने पैरों को मोड़कर सीधे बैठें। आपकी रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी होनी चाहिए। पैर ऊपर की ओर होने चाहिए। इसके बार धीरे-धीरे धड़ को जहां तक संभव हो, वहां तक फर्श पर आगे की ओर झुकाएं। अपने हाथों को भी आगे की ले जाएं। ध्यान रखें इस समय आपको चेहरा और हथेलियां दोनों फर्श की ओर हों। इस मुद्रा में करीब 15 सेकंड रखें और फिर से सीधे बैठ जाएं। यह मुद्रा आप चार से पांच बार दोहराएं।
यह आसन मानसिक तनाव को छूमंतर कर देता है। इसके साथ ही यह शरीर की सूजन को भी कम करता है। यह पाचन तंत्र को सुधारने के साथ ही नींद को भी बेहतर बनाता है। खास बात यह है कि इसे आप सुबह ही नहीं सोने से पहले भी कर सकते हैं। हालांकि इससे पहले आपको कम से कम पांच घंटे पूर्व भोजन करना चाहिए।
ऐसे करें : सबसे पहले आप पीठ के बल जमीन पर एकदम सीधे लेटें। शरीर को रिलैक्स रखें। अब दोनों पैरों को ऊपर की ओर 45 डिग्री तक उठाएं। अपने हाथों से कमर को पूरा सहारा देकर कूल्हों को भी ऊपर उठाने की कोशिश करें। इस आसन को करने के दौरान कोहनियों पर जमीन पर मजबूती से रखें, जिससे कमर को पूरा सहारा मिल सके। इस मुद्रा में आप कम से कम 40 सेकंड तक रहें। इसे 5 से 6 बार करें। अगर आप अपने आप कमर को ऊपर नहीं कर पा रहे हैं तो तकिया भी लगा सकते हैं।
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