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Written By: Jitendra Gupta | Updated : September 26, 2020 11:51 AM IST
हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ ऑस्टोपोरोसिस के खतरे को कम करते हैं ये 4 योगासन, जानें इन्हें करने का आसान तरीका
दुनिया भर में कई वर्षों से योग का अभ्यास किया जा रहा है और इसकी लोकप्रियता इसके अद्भुत स्वास्थ्य लाभों के कारण काफी बढ़ रही है। माइग्रेन से लेकर हृदय रोगों तक, योग सभी प्रकार के रोगों के जटिल लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। योग को अपने डेली रूटीन में शामिल करने का एक और कारण है और वह ये है कि योग आपकी हड्डियों की सेहत में सुधार कर सकता है।
जी हां, अगर आप हर दिन योग का अभ्यास करते हैं तो आपको अपनी हड्डियों को मजबूत बनाने और ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। यहां तक कि विज्ञान भी इस दावे का समर्थन करता है कि हर दिन योग का अभ्यास करने से फ्रैक्चर को रोकने और ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। वृद्धावस्था में हड्डियों की समस्याएं ज्यादा बढ़ जाती हैं। इसलिए अभी से उपाय कर बाद में किसी भी तरह की जटिलता से बचाव जरूरी हो जाता है। इस लेख में हम आपको ऐसे 5 योगासन के बारे में बता रहे हैं, जो आपकी हड्डियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं कौन से हैं ये योगासन।
स्टेप 1: अपने पैरों को खोलकर जमीन पर सीधे खड़े हो जाएं और अपनी दोनों बांहों को दोनों पैरों के साइड में ले जाएं।
स्टेप 2: सांस छोड़ें और अपने बाएं पैर को अपने दाहिने पैर से 2 से 3 फीट आगे ले जाएं।
स्टेप 3: अब अपने बाएं पैर को थोड़ा बाहर निकालें और घुटने के मोड़ते हुए 90 डिग्री के कोण पर झुकें।
स्टेप 4: अपने दाहिने पैरों को 15 डिग्री से अंदर की ओर मोड़ें। आपके दाहिने पैर की एड़ी, बाएं पैर के बीच नें होनी चाहिए।
स्टेप 5: अपने दोनों हाथों को उठाएं। इसे अपने कंधों के बराबर लाएं। आपकी हथेलियां ऊपर की ओर होनी चाहिए। इस स्थिति में गहरी सांस लें।
स्टेप 6: अपने सिर को अपनी बाईं ओर घुमाएं और धीरे से अपने कंधों को जितना संभव हो उतना नीचे धकेलें। कुछ सेकंड के लिए इस स्थिति में रुकें और फिर वापस पहले जैसी स्थिति में आ जाएं। दूसरी तरफ से भी इस स्थिति से दोहराएं।
स्टेप 1: आराम से चटाई पर सीधे खड़े हो जाएं। आपके पैर एक दूसरे के करीब होने चाहिए।
स्टेप 2: अपने दाहिने घुटने को मोड़ें और अपने दाहिने पैर को अपनी बाईं जांघ पर रखें।
स्टेप 3: इस स्थिति में अपने शरीर को संतुलित करने की कोशिश करते हुए धीरे-धीरे सांस छोड़ें और सांस लें।
स्टेप 4: अपने हाथों को ऊपर उठाएं और उन्हें अपने सिर के ऊपर लाएं। नमस्ते मुद्रा में दोनों हथेलियों को आपस में मिला लें।
स्टेप 5: इस मुद्रा में 5-10 सेकंड रुकें और ऐसा करते समय सांस अंदर लें और बाहर छोड़ें।
स्टेप 6: फिर अपने हाथों को धीरे से नीचे करें और अपने पैर को वापस जमीन पर रखें। दूसरे पैर के साथ भी यही प्रक्रिया को दोहराएं।
स्टेप 1: अपने घुटनों के बल झुकें और पैरों को जमीन पर सपाट रखें। आपके पैर एक दूसरे से थोड़े अलग होने चाहिए और आपके साइड में होने चाहिए।
स्टेप 2: फर्श पर पैरों को दबाएं, सांस लें और धीरे से अपने कूल्हों को फर्श से ऊपर उठाते हुए उठें।
चरण 4: अपनी छाती को उठाने के लिए अपनी बाहों और कंधों को जमीन पर दबाएं।
चरण 5: अपने कूल्हों को ऊंचा उठाने के लिए अपने पैरों और बट की मांसपेशियों को काम में लगाएं । 4से 8 बार सांस लेते हुए इसी स्थिति में रहें और फिर सामान्य स्थिति में लौट आएं।
स्टेप 1: अपने हाथों को साइड में रखते हुए पीठ के बल आराम से लेट जाएं।
स्टेप 2: अपनी आंखें बंद करें और अपने मन व शरीर को आराम कराने का प्रयास करें।
स्टेप 3: सिर्फ नाक के माध्यम से धीरे-धीरे सांस लें और अपने पैर की उंगलियों से शुरू होने वाले शरीर के हर हिस्से पर ध्यान आकर्षित करें।
स्टेप 4: सांस छोड़ें और सोचें कि आपका शरीर शिथिल है। इस मुद्रा में 10 मिनट तक रहें और फिर वापस सामान्य मुद्रा में आ जाएं।