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बैली फैट/पेट की चर्बी कम करने के लिए कठिन मेहनत की जरूरत नहीं है. पेट का मोटापा और जांघ का मोटापा कम करने के लिए कुछ आसान योगासन भी हैं. वजन घटाने के लिए योग को सबसे कारगर और सरल तरीका माना जाता है। योग को लेकर सबसे बढि़या बात यह है कि इसे किसी भी उम्र के लोग कर सकते हैं। योग किसी भी उम्र वर्ग के लिए खासा लाभदायक है। गर्भवती महिलाओं को भी कुछ विशेष सावधानियों के साथ योग करने की सलाह दी जाती है। ज्ञात हो कि तनाव के चलते कई तरह की बीमारियां जन्म लेती हैं। लेकिन योग के आसनों के जरिये इससे निजात पाया जा सकता है।
जब बैली फैट बर्न टिप्स आप पढ़कर भी पेट की चर्बी कम न कर पाएं तो इन चार योगासनों को जरूर आजमाएं. वजन घटाने और फिट रहने के लिए योग काफी कारगर है और इससे तनाव का स्तर घटने के साथ व्यक्ति का आत्मविश्वास भी बढ़ता है। नीचे योग के कुछ आसनों के बारे में जिक्र किया गया है, जिसको निरंतर करने से बैली फैट बर्न करने में काफी मदद मिलती है।
योग के तहत यह एक अहम आसन है, जिसके जरिये आप अपने पेट को दुरुस्त और संबंधित मसल्स को पूरी तरह ठीक रख सकते हैं। इस आसन में पहले आप पीठ के सहारे लेट जाएं, फिर घुटनों को मोड़ें और अपने पैरों के तलवे को कुछ दूरी बनाकर जमीन पर टिकाकर रखें। फिर अपने हाथों को शरीर की दिशा में ले जाएं। ध्यान रहे कि हथेलियां नीचे की ओर रहे। आप अपने हाथों को मिलाकर साथ रखें और फिर अपने शरीर को उपर की ओर उठाएं। इस अवस्था में तीस सेकेंड से लेकर 01 मिनट तक रहें। फिर शरीर को धीरे धीरे सतह पर ले आएं। इस अभ्यास को पांच बार दोहराएं।
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इस आसन में शरीर की आकृति फन उठाए हुए नाग के समान हो जाती है इसीलिए इसको नाग आसन, भुजंगासन या सर्पासन कहा जाता है। इस आसन से पेट की चर्बी घटती है तथा रीढ़ की हड्डी सशक्त बनती है। दमे की, पुरानी खांसी अथवा फेफड़ों संबंधी अन्य कोई बीमारी हो, तो उनको यह आसन करना चाहिए। इससे बाजुओं में शक्ति मिलती है। मस्तिष्क से निकलने वाले ज्ञानतंतु बलवान बनते हैं। पीठ की हड्डियों में रहने वाली तमाम खराबियां दूर होती है। कब्ज दूर होता है। इस आसन को करते समय अकस्मात् पीछे की तरफ बहुत अधिक न झुकें।
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इस आसन को करने से शरीर की आकृति खींचे हुए धनुष के समान हो जाती है, इसीलिए इसको धनुरासन कहते हैं। यह आसन मेरुदंड को लचीला एवं स्वस्थ बनाता है। पेट की चर्बी कम होती है। हृदय मजबूत बनाता है। गले के तमाम रोग नष्ट होते हैं। कब्ज दूर होकर जठराग्नि प्रदीप्त होती है। श्वास की क्रिया व्यवस्थित चलती है।
सर्वप्रथम मकरासन में लेट जाएं। मकरासन अर्थात पेट के बल लेट जाएं। ठोड़ी को भूमि पर टिका दें। हाथ कमर से सटे हुए और पैरों के पंजे एक-दूसरे से मिले हुए। तलवें और हथेलियां आकाश की ओर रखें। घुटनों को मोड़कर दाहिने हाथे के पंजे से दाहिने पैर और बाएं हाथ के पंजे से बाएं पैर की कलाई को पकड़ें। सांस लेते हुए पैरों को खींचते हुए ठोड़ी-घुटनों को भूमि पर से उठाएं तथा सिर और तलवों को समीप लाने का प्रयत्न करें। जब तक आप सरलता से सांस ले सकते हैं इसी मुद्रा में रहें। फिर सांस छोड़ते हुए पहले ठोड़ी और घुटनों को भूमि पर टिकाएं। फिर पैरों को लंबा करते हुए पुन: मकरासन की स्थिति में लौट आएं।
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पीठ में खिंचाव उत्पन्न होता है, इसीलिए इसे पश्चिमोत्तनासन कहते हैं. इस आसन से शरीर की सभी मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है। पशिच्मोत्तासन के द्वारा मेरूदंड लचीला व मजबूत बनता है जिससे बुढ़ापे में भी व्यक्ति तनकर चलता है और उसकी रीढ़ की हड्डी झुकती नहीं है। इसके अभ्यास से शरीर की चर्बी कम होकर मोटापा दूर होता है तथा मधुमेह का रोग भी ठीक होता है।
अपने पैर को सामने की ओर सीधी करके बैठ जाएं। दोनों पैर आपस में सटे होने चाहिए। पीठ को इस दौरान बिल्कुल सीधा रखें और फिर अपने हाथों से दोनों पैरों के अंगूठे को छुएं। ध्यान रखें कि आपका घुटना न मुड़े और अपने ललाट को नीचे घुटने की ओर झुकाए। 5 सेकेंड तक रुकें और फिर वापस अपनी पोजीशन में लौट आएं। यह पोजीशन किडनी की समस्या के साथ क्रैम्स आदि जैसी समस्या से भी निजात दिलाता है।