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लिवर सिरोसिस में पैनिक होने के बजाय करें पपीते के बीज का सेवन, मिलेगा बेहतर परिणाम
फैटी लिवर की बीमारी (Fatty Liver Disease) हाल के वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ी है. लिवर इंसान के शरीर का दूसरा सबसे महत्त्वपूर्ण अंग है. फैटी लिवर (Fatty Liver) होने से शरीर में कई अन्य बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है. लिवर खून से विषाक्त पदार्थ निकालने का काम करता है. पाचन तंत्र के लिए ज़रूरी पित्त रस का निर्माण भी लिवर में ही होता है. फैटी लिवर की समस्या किसी को भी हो सकती है. वैसे तो फैटी लिवर दो तरह का होता है. एक तो एल्कोहल के सेवन की वजह से एल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज होती है. दूसरा नॉन एल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (Non-alcoholic fatty liver disease) होती है.
इंसान में फैटी लिवर डिजीज का कारण (Fatty Liver Disease causes) जीवनशैली और खान-पान की वजह से होती है. अगर आप बहुत ज़्यादा शराब पीते हैं तो आपको फैटी लिवर डिजीज हो सकती है. इसके अलावा खान-पान में बहुत अधिक फैट का सेवन और एक्सरसाइज न करना भी फैटी लिवर का कारण माना जाता है.
जब किसी को फैटी लिवर की बीमारी होती है तो उसे कई अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. फैटी लिवर की वजह से पेट में दर्द. थकान. मोटापा. डायबिटीज. कैंसर, लिवर सिरोसिस जैसी लाइलाज बीमारियाँ हो सकती हैं.
हाल ही में पेन्सिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में यह दावा किया गया है कि ग्रीन टी का सेवन फैटी लिवर डिजीज में फायदेमंद है. शोध में कहा गया है कि ग्रीन टी के सेवन से फैटी लिवर डिजीज की गंभीरता को 75 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है.
ग्रीन टी में पाया जाने वाला पॉलीफेनोल्स फैटी लिवर डिजीज के परेशानी को कम करने में मददगार होता है. इस शोध के अनुसार यह पाचन तंत्र के लिए भी अच्छा होता है. फैटी लिवर की बीमारी होने पर पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है.
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