वाइट ब्रेड और फ्रेंच फ्राइज़ खाने से किशोर लड़का अंधा हो गया, जानें कारण

17  साल की उम्र में आंखों की रोशनी जाना कितना भयावह है. हाल ही में एक केस स्टडी मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुयी है, जिसमें यह बताया गया है कि 10 साल तक फ्रेंच फ्राइज़, वाइट ब्रेड, चिप्स, बर्गर और सॉसेज के अलावा लड़का कुछ खाता ही नहीं था. किशोर ने बताया कि वो 10 साल तक पूरी तरह जंक फूड ही खाता था. ब्रिटेन के ब्रिस्टल चिल्ड्रन हॉस्पिटल के डॉक्टरों का कहना है कि यह ब्रिटेन का पहला ऐसा मामला है. लड़के को अभी ब्रिस्टल आई हॉस्पिटल में एडमिट किया गया है.

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : September 4, 2019 11:34 AM IST

17  साल की उम्र में आंखों की रोशनी जाना कितना भयावह है. हाल ही में एक केस स्टडी मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुयी है, जिसमें यह बताया गया है कि 10 साल तक फ्रेंच फ्राइज़, वाइट ब्रेड, चिप्स, बर्गर और सॉसेज के अलावा लड़का कुछ खाता ही नहीं था. किशोर ने बताया कि वो 10 साल तक पूरी तरह जंक फूड ही खाता था. ब्रिटेन के ब्रिस्टल चिल्ड्रन हॉस्पिटल के डॉक्टरों का कहना है कि यह ब्रिटेन का पहला ऐसा मामला है. लड़के को अभी ब्रिस्टल आई हॉस्पिटल में एडमिट किया गया है.

लड़के का इलाज कर रेह डॉक्टर डेनाइज एटन के अनुसार यह लड़का सिर्फ जंक फूड ही खाता था. बच्चे को फल-सब्जी बिल्कुल पंसद नहीं. स्वाद के साथ-साथ लड़के को सब्जियों और फलों के रंग भी पसंद नहीं आते हैं. लड़के ने अपनी पसंद से प्रिगल्स, चिप्स, फ्रेंच फ्राइज़ और वाइट ब्रेड को अपनी डाइट बना लिया. इसकी वजह से लड़के को रिस्ट्रिक्टिव फूड इंटेक डिसऑर्डर नामक बीमारी हो गयी है. वैसे तो यह जरूरत से अधिक खाने की बीमारी है.

जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड खाने से लड़के में आए ये बदलाव 

प्राइमरी के बाद लड़के नें जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड के अलावा कुछ खाया ही नहीं. इसकी वजह से लड़के के शरीर में कार्बोहाइड्रेट और शुगर का लेवल बढ़ गया. इसकी वजह से शरीर की हड्डियां भी कमजोर हो गयी हैं. इसके अलावा लड़के में सुनने की क्षमता भी कमजोर हो गयी है.

लड़के के शरीर में विटामिन बी 12 की कमी के साथ-साथ एनिमिया के लक्षण भी हैं. हलांकि लड़के का बीएमई सामान्य है. ईटिंग डिसऑर्डर की वजह से लड़का अंधा हो चुका है. सामान्यतया इस उम्र में ऐसा नहीं होता है.

क्या हो रहा है इलाज 

लड़के में इतनी बीमारियों के बाद उसे विटामिन सप्लीमेंट दिये जा रहे हैं. इसके अलावा उसे मेंटल हेल्थ टीम की निगरानी में भी रखा गया है. हलांकि अभी तक उसमें कोई सुधार नजर नहीं आ रहे हैं.

किशोर की आंखों में ब्लाइंड स्पॉट आ गये हैं. डॉक्टरों के अनुसार उसके ऑप्टिक नर्व के फाइबर खत्म हो गये हैं. इस विषय पर डॉक्टरों का कहना है कि उसके आंखों कि रोशनी वापस आना संभव नहीं है.

इस केस स्टडी के बारे में डॉक्ट एटन का कहना है कि इस तरह के खान-पान बच्चों के लिए खतरनाक हैं. माता-पिता को अपने बच्चों के खाने-पीने की आदतों पर नजर रखनी चाहिए. ऐसी आदतों से बच्चों को बचाकर ही बीमारी से बचा जा सकता है.

आंखों कि रोशनी क्यों चली गयी 

डॉक्टर एटम और उनकी टीम के अनुसार बच्चे के शरीर में विटामिन बी 12  का लेवल बहुत कम हो गया था. बच्चे के शरीर में कॉपर, सेलेनियम और विटामिन डी की कमी भी हो गयी थी.

शरीर में जरूरी विटामिन और मिनरल न होने की वजह से आंखों को ब्रेन से जोड़ने वाली ऑप्टिक नर्व खराब हो गयी. ऑप्टिक नर्व खराब होने की वजह से आंखों की रोशनी चली गयी.

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