Advertisement

बच्चों में मायोपिया का कारण बन रहे हैं गैजेट्स, जानें आंख से जुड़े इस गंभीर रोग के बारे में

गैजेट्स का लगातार बढ़ता चलन और घर की चार दीवारी में सीमित जीवन, शारीरिक सक्रियता की कमी और जंक फूड्स का बढ़ता चलन हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को ही नहीं हमारी आंखों की सेहत को भी प्रभावित कर रहा है।

Written By Rashmi Upadhyay
Updated : July 23, 2020 12:31 PM IST

बच्चों में तेजी से बढ़ रहा है मायोपिया का खतरा

7 साल के राहुल का सारा वक़्त आजकल मोबाइल, लैपटॉप और टेबलेट पर निकलता है फिर चाहे स्कूल की ऑनलाइन क्लास हो या दोस्तों के साथ ऑनलाइन लूडो खेलना हो। इसके चलते अब राहुल को हमेशा आँखों में दर्द या सूखापन महसूस होने लगा है क्योंकि दूसरी क्लास में पढ़ने वाला राहुल दिन के तकरीबन 5-6 घंटे अपने स्कूल की क्लास लैपटॉप पर लेता है और उसके बाद कोविड के चलते उसकी माँ घर से निकलने नहीं देंती जिसके फलस्वरूप वो अपने दोस्तों के साथ ही टेबलेट पर ऑनलाइन लूडो या अन्य खेल खेलता रहता है।

गैजेट्स का लगातार बढ़ता चलन और घर की चार दीवारी में सीमित जीवन, शारीरिक सक्रियता की कमी और जंक फूड्स का बढ़ता चलन हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को ही नहीं हमारी आंखों की सेहत को भी प्रभावित कर रहा है। शार्प साईट ग्रुप ऑफ़ आई हॉस्पिटल्स के वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. शांतनु के अनुसार बच्चों द्वारा डिजिटल डिवाइस के इस्तेमाल पर माता-पिता नजर रखें और इस बात की जांच करते रहें कि उनमें आई स्ट्रेन जैसी समस्या जैसे आंखों में दर्द, आंखों को मसलने के अलावे पीठ, गर्दन और सिर दर्द की शिकायत नहीं हो रही है। बच्चों की आंखे पूरी तरह विकसित नहीं हुई होती, लिहाजा वे कंप्यूटर विजन सिंड्रोम और थकान की वजह से जल्दी प्रभावित होती हैं और मायोपिया के भी शिकार हो जाते हैं।

Advertisement

मायोपिया या निकटदृष्टिता आंखों की वह स्थिति है जिसमें दूर का देखने में परेशानी होती है। ऐसा तब होता है जब आंख की पुतली (आई बॉल) का आकार बढ़ने से प्रतिबिंब रेटिना पर बनने के बजाय थोड़ा आगे बनता है। ऐसा होने से दूर की वस्तुएं धुंधली और अस्पष्ट दिखाई देती हैं, लेकिन पास की वस्तुएं देखने में कोई परेशानी नहीं होती है।

Advertisement

मायोपिया के कारण क्‍या हैं ?

डॉ. शांतनु बताते हैं अनुवांशिक कारण, पर्यावर्णीय स्थितियां और जीवनशैली इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। निकट दृष्टि दोष विश्वभर में दृष्टि प्रभावित होने का सबसे प्रमुख कारण है। बच्चों में यह समस्या तेजी से बढ़ती है क्योंकि उनका शरीर और आंखें विकसित हो रही होती हैं। आंखों का आकार बढ़ने से कार्निया और रेटिना में तेज खिंचाव हो सकता है। मायोपिया धीरे-धीरे या तेजी से विकसित हो सकता है।

1. अगर माता या पिता दोनों में से किसी को यह समस्या है तो इसका खतरा बढ़ जाता है। अगर माता-पिता दोनों को निकट दृष्टि दोष है तो खतरा अधिक बढ़ जाता है।

2. स्क्रीन (टीवी, कम्प्युटर, मोबाइल) के सामने अधिक समय बिताना।

3. किताबों या स्क्रीन से आवश्यक दूरी न रखना मायोपिया के खतरे को अधिक बढ़ा देता है।

4. कुछ अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि प्रकृतिक रोशनी में कम समय बिताने से मायोपिया का खतरा बढ़ जाता है।

मायोपिया के लक्षण

मायोपिया का प्रमुख लक्षण है कि बच्‍चे को दूर की चीजें धुंधली नजर आने लगती है। इसके अलावा आपको बच्‍चे में निम्‍न लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

क्लासरूम में ब्लैक बोर्ड या व्हाइट बोर्ड से ठीक प्रकार से दिखाई न देना

लगातार आंखें मसलना

पढ़ाई पर फोकस न कर पाना

बार-बार आंखे झपकाना

दूर की चीजें देखने पर आंखों में तनाव और थकान महसूस होना

सिरदर्द

भेंगापन

कुछ दूर की चीज देखने की कोशिश करने पर आंख में थकान

मायोपिया का पता कैसे चलता है ?

बहुत से बच्‍चे तो इस बारे में बताते ही नहीं है या फिर वे कह सकते हैं कि उन्‍हें दूर की चीज साफ दिखाई नहीं दे रही। चीजों को साफ देखने के लिए वे पास आने की कोशिश भी करते हैं। अगर आपको यह महसूस हो जाता है कि बच्‍चे को दूर की चीजें देखने में मुश्किल हो रही है तो तुरंत नेत्ररोग विशेषज्ञ को दिखाएं। डॉ. शांतनु बताते हैं छह महीने, तीन साल की उम्र और पहली कक्षा में आने से पहले बच्‍चों की आंखें चेक होनी चाहिए। विशेषकर, यह तब जरूरी है जब आंखे खराब होने या इनमें कोई और समस्‍या होने की आपकी फैमिली हिस्‍ट्री है।

मायोपिया को तेजी से बढ़ने से कैसे रोका जा सकता है?

रिसर्च बताते हैं कि जो बच्चे घर से खेल-कूद के लिए बहुत कम बाहर निकलते हैं या चीज़ों को बहुत करीब से देखते हैं उनमें उन बच्‍चों के मुकाबले मायोपिया तेजी से बढ़ता है, जिनकी आउटडोर एक्टिविटी ज्‍यादा हैं और नजदीक के काम कम।

1. स्‍मार्टफोन और टैबलेट के इस दौर में यह समझना बहुत महत्‍वपूर्ण है कि इन गैजेट्स का ज्‍यादा प्रयोग बच्‍चे की आंखें खराब कर सकता है। नेत्ररोग विशेषज्ञ कहते हैं कि छोटे बच्‍चे तो स्‍क्रीन बिल्‍कुल न देखें और थोड़े बड़े बच्‍चे एक दिन में आधा या एक घंटा ही स्‍क्रीन देखें। वे बताते हैं कि माता-पिता को बच्‍चे को डिजिटल डिवाइस देने का समय तय कर देना चाहिए। वे यह भी सुनिश्चित करें कि सोने के समय, बाहर खेलेने जाने के समय और अन्‍य स्वास्थ्यवर्धक गतिविधियों के समय बच्‍चा इन गैजेट्स का प्रयोग न करे।

2. मायोपिया से ग्रस्‍त बच्‍चों का नियमित रूप से चेकअप होना चाहिए। इसके अलावा मायोपिक बच्‍चों के रेटिना की भी नियमित जांच होनी चाहिए ताकि रेटिना कि किसी और समस्या से बचा जा सके।

मायोपिया का उपचार

1. चश्‍मा : हालांकि चश्‍मे से समस्‍या खत्‍म नहीं होती लेकिन इनसे बच्‍चों को साफ देखने में बहुत मदद मिलती है। चूंकि छोटे बच्‍चों में आंख और मस्तिष्‍क का कनेक्‍शन विकसित हो रहा होता है इसलिए यह बहुत जरूरी है कि वह साफ देखे।

2. कॉन्‍टेक्‍ट लेंस: यह उन बड़े बच्‍चों के लिए एक विकल्‍प हो सकते हैं जो इनके प्रयोग के लिए आवश्‍यक सावधानियां बरतने में सक्षम हों।

3. रिफ्रेक्टिव सर्जरी: एक बार आंख का नंबर ठहर जाए, आमतौर पर 18 से 20 साल की उम्र के बाद, तो य‍ह सर्जरी करवाई जा सकती है और चश्‍मे को छोड़ा जा सकता है।